बैतूल प्रशासनिक कोना: कौन है प्रशासन का विभीषण, जो लंका ढाह रहा?? पुलिस विभाग के कौन से साहब है, जिनके निर्णय लेने की खूब चर्चा हो रही??? आते ही निकाय के ये अधिकारी आखिर क्यों हुए चर्चित??? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में पूरी खबर……

Betul Administrative Corner: Who is Vibhishana of administration, who is making Lanka collapse?? Who is the sir of the police department, whose decisions are being discussed a lot??? Why did these officials of the civic body become famous as soon as they arrived??? Read the full news in our popular column Administrative Corner...

Betul Administrative Corner : (बैतूल)। जिन अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया शासन स्तर पर शुरू की गई है, वहां के लोग खासे परेशान है। वहां न सड़क है, न बिजली और न ही पीने का पानी…। इन्हीं तमाम दिक्कतों के बीच वे रहने को मजबूर है। अभी तक उनकी न नगर पालिका सुनती थी न ही संबंधित कॉलोनाइजर ही सुनता है। कॉलोनाइजर के तो भूखंड काटने के बाद से पता ही नहीं है।

दरअसल मप्र शासन के निर्देशानुसार शहरी क्षेत्रों में कॉलोनियों का सर्वे कार्य शुरू किया गया। इनमें अधिकांश कॉलोनियां अवैध है, जिन्हें वैध की जाना है। इनमें तमाम खामियों को पूरा करने के बाद ही यह वैध हो पाएंगी। इसके लिए भवन अनुमति शुल्क सहित अन्य प्रकार की राशि संबंधित कॉलोनाइजर से नपा वसूलेगी। कई जगह जहां मकान सभी बन गए वहां संबधित रहवासी, प्लॉट मालिक से यह राशि ली जाएगी। 60 फीसदी राशि की भरपाई संबंधित कॉलोनाइजर करेंगे। इसके बाद बची हुई राशि शासन की ओर से अनुदान के तौर पर मिलेगी।

हालांकि चुनावी साल में लोगों को रिझाने के लिए भले ही अवैध को वैध करने की प्रक्रियाएं शहरी क्षेत्र में लागू की गई है, लेकिन कॉलोनाइजरों की प्रताड़ना से रहवासी खासे तंग है, वे परेशान हैं, उनकी दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। अब सर्वे के तहत प्रारूप तैयार किया गया है। कंसलटेंसी यह पूरा प्रारूप नगरीय प्रशासन विभाग के समक्ष रख देगा, इसके बाद पूरी प्रक्रिया की जाएगी।

2016 के बाद की अवैध कॉलोनियां की भरमार

शिवराज सरकार ने वर्ष 2016 के पहले की कॉलोनियों को वैध करने का निर्णय लिया है, लेकिन इसके बाद भी कई कॉलोनियां काट दी गई। कॉलोनियों में न सड़कें हैं न ही पानी और बिजली। यहां तक कि कई भू-खंड के डायवर्सन तक नहीं है। कई नदी किनारे काट दिए गए, जिनमें बसाहट तक करवा दी गई है। साथ नजूल की अनापत्ति भी राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत कर ले ली। अब उन्हीं कॉलोनियों में लोग आधी-अधूरी सुविधाओं के बीच रहते हैं।

यह प्रमुख खामियां मिलीं कॉलोनियों में

कहीं भी ब्रॉशर अनुसार पक्की सड़कें नहीं हैं, गार्डन की जगह पानी भरा है, कहीं भी डवलप नहीं किया गया। लाइट की व्यवस्था इन कॉलोनियों में नहीं मिलीं। पानी का प्रबंध वैकल्पिक तौर पर भी इन कॉलोनियों में नहीं है। नपा का हिस्सा नहीं होने से सफाई भी प्रॉपर नहीं। सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं, चौकीदार और अन्य बाउंड्री भी नहीं। कॉलोनी में रहने वालों की कोई भी कॉलोनाइजर सुनता ही नहीं।

अधिकारियों को विभीषण की तलाश

जिले में अधिकारियों की बड़ी फौज काम कर रही है, लेकिन कुछ विभीषणों ने शीर्ष अधिकारियों की ऐसी परेशानी बढ़ाई है कि वे सिर धुंनते नजर आ रहे हैं। भोपाल में कुछ मामले ऐस हैं जो इन्हीं विभीषणों के कारण छोटी बात से बड़ी का रूप धारण कर चुके हैं। हाल ही में एक ट्विटर कांड के बाद शीर्ष अफसर की मुसीबत बढ़ गई है, उन्हें यहां पदस्थ हुए लगभग पौने तीन वर्ष का अरसा बित गया, लेकिन वे अपने ही बीच विभीषणों की तलाश नहीं कर सके। इतना जरूरी है कि काम न करने वाले प्रति सोमवार होने वाली बैठक में उनकी पारखी नजर से नहीं बच पा रहे।

इन पर कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटते, किंतु लंबा अरसा बितने पर उनकी सख्ती के कारण कई विभीषण नेवले की तरह निकल आए हैं। मुंह में राम बगल में छूरी की तर्ज पर साहब की पीठ में खंजर घोपने में माहिर इन विभीषणों के कारण पल-पल की खबर ऊपर तक भी पहुंच जा रही है। ट्विटर के मामले में तो साहब की जमकर किरकिरी हो रही है। विभाग में चर्चा जोरों पर है कि साहब लंबी पारी खेल चुके हैं, लेकिन विभीषणों की तलाश न करना उन्हें चुनाव के पहले भारी पड़ गया है।

साहब के निर्णय लेने की क्षमता के सभी कायल

पुलिस विभाग में शीर्ष अधिकारी को यहां पर आए हुए चंद माह का समय ही बीता है। वैसे महकमे में उनका नाम सीनियर अधिकारी के रूप में जाना-पहचाना जाता है। शुरू में लो प्रोफाइल रहने के बाद साहब ने जिले की नब्ज टटोली और अधिकारियों को पारखी नजर से पहचाना तो निर्णय लेने की क्षमता में भी परिवर्तन आ गया।

विभाग में साहब द्वारा लिए गए कुछ निर्णय की अधीनस्थ कर्मचारी भी खासे कायल हो गए हैं। विवादित मामलों में साहब ने कुछ मामलों में दंड भी दिया और आनन फानन में कार्रवाई के आदेश दिए। दूसरी तरफ ईमानदार अधिकारियों और कर्मचारियों को फील्ड में पोस्टिंग देकर नवाजा भी गया। साहब के बारे में कहा जाता है कि उनके चेंबर में आए कर्मचारी और अधिकारी को आने जाने में भी कोई पाबंदी नहीं है। इसलिए बड़े साहब इस समय विभाग में हीरो बने हुए हैं।

अधिकारी की पारदर्शिता ऐसी की दरवाजा ही निकाला

निकाय के एक अधिकारी का काम के प्रति प्रेम जग जाहिर है। उन्हें कुछ माह पहले ही एक निकाय में पदस्थ किया गया। साहब ने आते ही नरम रूख अपनाया। नतीजा यह निकला कि इस निकाय के कामों में गति आई और कर्मचारी काम के प्रति पहले से ज्यादा सजग हो गए।

साहब ने एक और बात से अपना दिल जीत लिया कि चेंबर में लगे एक कांच के गेट को ही हटवा दिया। इसके पीछे साहब की मंशा थी कि यह गेट आम लोग और उनके बीच बाधा बन रहा है। आनन-फानन में कांच का गेट निकाला गया। अब साहब से जिसे भी मिलना है वे सीधे चेंबर में जाकर अपनी बातें आसानी से रख रहा है। पिछले डेढ़ माह से साहब के खुले दरबार में असंख्य शिकायत लेकर लोग पहुंच चुके हैं। कर्मचारी भी बेहिचक साहब से मिलकर किसी भी मामले में चर्चा कर रहे हैं। साहब कुछ दिन पहले छतरपुर से जिले में पदस्थ हुए हैं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button