Betul Assembly Election : बैतूल में जीतने के लिए लगेंगे 1 लाख 5 हजार से अधिक वोट
Betul Assembly Election: More than 1 lakh 5 thousand votes will be required to win in Betul.

आमला में विजेता को लेना होगा लगभग 90 हजार वोट, मतदान प्रतिशत के बाद उलझे आंकड़े
Betul Assembly Election : (बैतूल)। जिले के बैतूल और आमला विधानसभा में 17 नवंबर को हुए मतदान के बाद इस बार मतों का प्रतिशत बढ़ने के बाद जिस तरह आंकड़े सामने आ रहे हैं, इससे जीत के परिणामों में अंतर आने से इंकार नहीं किया जा सकता। सांझवीर टाईम्स अपने चुनावी आंकलन के लिए पाठकों में पैठ बना चुका है। चुनाव के बाद अलग-अलग विधानसभाओं में हुए मतदान पर सबसे पहले जिला मुख्यालय बैतूल और आमला विधानसभा सीट के आंकलन में जो तस्वीर उभर रही है, उसमें जीत-हार का अंतर गड़बड़ा सकता है। बैतूल में जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को लगभग 51 प्रतिशत वोट लेना होगा। दूसरी तरफ आमला में यह आंकड़ा बढ़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है। यहां पर विजयी उम्मीदवार को लगभग 54 प्रतिशत वोट लेने पर जीत मिल सकती है।
बैतूल विधानसभा की बात करें तो यहां का चुनाव प्रदेश में हाई प्रोफाइल हुआ है। सबकी नजर जीत-हार पर लगी है। भाजपा की ओर से प्रत्याशी हेमंत खंडेलवाल के लिए बैतूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा होने के बाद चुनाव परिणाम पर और अधिक टकटकी लगी है। कांग्रेस से यहां वर्तमान विधायक निलय डागा के मैदान में आने से मुकाबला रोचक माना जा रहा है। चूंकि दोनों ही प्रत्याशी आर्थिक रूप से मजबूत थे, इसलिए कोई भी दावे के साथ यह नहीं कह रहा है कि किसकी जीत होगी।
इस बार जिस तरह बैतूल विधानसभा में भी बंपर मतदान हुआ है। यह जीत-हार के लिए अहम रोल अदा कर सकता है। बैतूल विधानसभा में कुल 2 लाख 54 हजार 897 मतदाता है, इनमें से 2 लाख 8 हजार 875 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। वोट डालने वाले पुरूषों की संख्या 1 लाख 6 हजार 375 और महिलाओं की संख्या 1 लाख 2 हजार 496 भी दी। चार अन्य मतदाताओं ने भी अपने मतों का प्रयोग किया है। इस तरह बैतूल में पिछली बार की अपेक्षा 23256 मतदाताओं ने अधिक मतदान किया है। पिछले विधानसभा में 1 लाख 85 हजार 600 मतदाताओं ने वोट डाल थे।
मत का प्रतिशत बढ़ने पर हार-जीत में भी अंतर
सांझवीर टाईम्स के आंकलन पर यकीन करें तो इस बार बैतूल विधानसभा में जीतने वाले उम्मीदवार को पिछली बार की अपेक्षा करीब 8 से 10 हजार वोट अधिक मिल सकते हैं। यानी पिछली बार कांग्रेस के निलय डागा को 96 हजार 717 वोट मिले थे। करीबी रहने वाले भाजपा प्रत्याशी हेमंत खंडेलवाल 75 हजार 72 वोट ले पाए थे। यानी 21 हजार का अंतर जीत-हार का था।
इस मर्तबा वोट प्रतिशत बढ़ने पर जो आंकलन सामने आ रहा है उसके अनुसार बैतूल में विजेता को 51 प्रतिशत यानी लगभग 1 लाख 6 हजार वोट लेने होंगे। यह जादुई आंकड़े पर पहुंचने वाला उम्मीदवार ही विधायक बनने का गौरव हासिल कर पाएगा। हालांकि पिछले बार निर्दलीय प्रत्याशी लता महस्की भी मैदान में थी। इससे भाजपा को नुकसान हुआ था, लेकिन इस बार दो निर्दलीय मैदान में होने के बावजूद मुकाबला सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच है।
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आमला में ऐसे रह सकता है जीत का जादुई आंकड़ा
एससी वर्ग के लिए आरक्षित आमला विधानसभा में इस मर्तबा जीतने वाले उम्मीदवार को लगभग 90 हजार वोट लेना पड़ेगा। चूंकि पिछली बार आमला में 2 लाख 7 हजार 38 मतदाताओं में से 1 लाख 53 हजार 98 मतदाताओं ने मतदान किया था। 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ योगेश पंडाग्रेे ने 73 हजार 481 वोट लेकर विजेता बने थे। कांग्रेस के मनोज मालवे को महज 54 हजार 284 वोट हासिल कर पाए थे। तब यहां गोंडवान के राकेश महाले ने पंद्रह हजार से अधिक वोट लेकर कांग्रे्रस की मुश्किल बढ़ाई थी, लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। फिर भी गोंगपा के उम्मीदवार मैदान में रहने से कांग्रेस के साथ भाजपा की धड़कन बढ़ी हुई है।
सांझवीर टाईम्स के आंकलन में स्थिति स्पष्ट हो रही है कि इस बार आमला में जिसे भी जीत मिलेगी वह लगभग 54 प्रतिशत यानी 90 हजार से अधिक वोट हासिल कर सकता है। यानी डॉ पंडाग्रे को यदि यहां से जीत हासिल करना है तो पिछली बार की अपेक्षा पंद्रह हजार से अधिक 17 हजार से अधिक वोट हासिल करना पड़ेगा। यदि कांग्रेस प्रत्याशी की बात करें तो उन्हें 36 हजार और अधिक वोट हासिल करने पर जीत हासिल हो सकती है।




