Betul Police News : पुलिस के आसपास अभियान की निकली हवा
Betul Police News: There is a campaign around the police

एक ही दिन में दो युवतियों समेत एक व्यक्ति ने जहर खा कर दी जान
Betul Police News : (बैतूल)। तत्कालीन एसपी सिमालप्रसाद के कार्यकाल में बड़ेे जोरशोर से एक अभियान शुरू किया गया था। इसमें समाज के उन व्यक्तियों को अकाल मौत से रोकने का उद्देश्य मुख्य था जो मानसिक तनाव और डिप्रेशन में आकर आत्महत्या करने जैसे कदम उठा लेते हैं। इस अभियान को आसपास नाम दिया था, लेकिन पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश का पालन समय के साथ ठंडे बस्ते में चला गया और हालात यहां तक पहुंच गए कि अब इस पूरे अभियान की हवा निकल गई है।
पुलिस विभाग में इसका कोई नाम लेवा भी नजर नहीं आ रहा। यही वजह है कि आत्महत्या के आंकड़े बढ़तेू जा रहे हैं। बुधवार जिला अस्पताल में जहर खा कर आने वाले 5 लोगों की मौत हो गई, जिनका पोस्ट मार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया है। वैसे जानकारी के मुताबिक 5 लोगों ने जहर खा कर आत्महत्या की, लेकिन पुष्टि सिर्फ तीन की ही हो पाई है।
नाबालिग ने समाप्त कर दिया अपना जीवन
प्राप्त जानकारी के मुताबिक ग्राम अनकावाड़ी निवासी 15 वर्षीय बालिका को जहर खाने के बाद गम्भीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों की काफी कोशिशों के बाद भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसी तरह चिचोली ढाना ग्राम में रहने वाली 20 वर्षीय युवती ने भी आत्महत्या करने के लिए जहर खाना ही मुनासिब समझा और इस युवती ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसके अलावा कुप्पा गांव में रहने वाले 45 वर्षीय दिनेश ककोड़िया की मौत भी जहर खाने से होना बताया गया। इधर बैतूल बाजार में भी फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की जानकारी मिली है। बुधवार इन तीनो के शवों का पोस्टमार्टम कर शिव परिजनों को सौंप दी गयी।
जागरूकता की कमी सबसे बड़ा कारण
आत्महत्या के प्रकरणों को रोके जाने के लिए पुलिस विभाग द्वारा जब इस अभियान की शुरुआत की गई थी, तब लग रहा था कि अभियान को सफलता मिलेगी। अभियान के तहत गांव-गांव में शिविर आयोजित कर लोगों को समझाइशें देती कई खबरें और फोटो अखबारों की सुर्खियां बनी रहती थी, लेकिन अचानक इस अभियान पर ऐसा ब्रेक लगा कि पूरा का पूरा अभियान ही टांय टांय फिस्स होकर रह गया है।
यह आंकड़े तो सिर्फ बैतूल जिला अस्पताल के ही है। सामुदायिक स्वारस्थ केंद्र जहां पोस्टमार्टम किए जाने कि सुविधा उपलब्ध हैं। उन अस्पतालों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं हो पाते नहीं तो यह संख्या बढ़ भी सकती है। अब हालात यह हैं कि आए दिन आत्महत्या के प्रकरण बढ़ते ही जा रहे हैं, लेकिन इन घटनाओं को रोकने के लिए कोई सटीक प्लान ना ही सरकार के पास है ओर ना ही पुलिस ओर सामाजिक संगठनों के पास।
इनका कहना..
अभी मैं हत्या के एक मामले में व्यस्त हूं। इस मामले में बाद में चर्चा करूंगी।
कमला जोशी, एएसपी बैतूल




