Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: नए साहब समझ रहे वर्किंग, कर्मचारियों में हड़कंप क्यों?? बैतूल में तीसरी पारी खेलने के लिए कौन है बेताब??? एक थानेदार नपी तो इनको कैसे मिला ख़ुशी मनाने का मौका???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……
Prashasnik Kona: Administrative corner: The new boss is thinking of working, why is there a stir among the employees??

साहब समझ रहे बैतूल की वर्किंग
राजस्व अमले में हालिया तबादले में एक साहब को बैतूल भेजा गया है। वे इससे पहले करीब डेढ़ वर्ष तक यहां से 35 किमी दूर वाले क्षेत्र में तैनात थे, लेकिन यहां और वहां के कामकाज में जमीन-आसमान का अंतर देखकर थोड़े चौंकन्ने हो गए। चर्चा है कि उन्हें यहां का वर्किंग सिस्टम समझ नहीं आया है। इस सिस्टम की जानकारी उन्हें किसी ने दी है कि यहां के कर्मचारी, दलालों के माध्यम से मलाई खाते आ रहे हैं। यह जानकारी जैसे ही कर्मचारियों को पता चली तो उनके हाथ-पैर फूल गए। कर्मचारियों में हडक़ंप है कि उनके नाम सार्वजनिक हो गए तो तेज तर्रार साहब की नाराजगी का कोप भाजन बन सकते हैं।
तीसरी पारी खेलने को तैयार
बैतूल में ऐसा क्या रखा है कि अधिकारियों का यहां बार-बार आने का मन होता है। ताजा मामला एक ऐसे विभाग के अधिकारी का है जो किसानों को फसल के लिए महत्पूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने ेके लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। इसके बारे में कहा जा रहा है कि आठ माह पहले ही जिले से रवानगी हुई थी, लेकिन अपनी पहुंच के चलते इन्होंने फिर अपनी पदस्थापना बैतूल में करवा ली। यह कोई पहला मौका नहीं है जब साहब को बैतूल भाया है, इससे पहले भी वे लंबी पारी खेलने के बाद जिले से बाहर भेजे गए तो एक वर्ष बाद फिर राजनीतिक जुगाड़ से बैतूल ट्रांसफर करा लाए। उनके बार-बार बैतूल कनेक्शन और राजनीतिक एप्रोच को लेकर उनके अलावा कई अधिकारियों में जमकर सुगबुगाहट चल रही है। बताते चले कि इनका कार्यालय इटारसी रोड पर स्थित है।
एक नपे तो दूसरे को मिला अच्छा मौका
वर्दी वाले विभाग में एक सुरक्षित विधानसभा के मुख्यालय में लंबी पारी खेलने वाले थानेदार के पिछले दिनों हुए तबादले पर दिल के अरमान आंसुओं में बह गए। उन्हें उम्मीद थी कि अच्छी वर्किंग के कारण बड़े थाने भेजा जाएगा, लेकिन उनके क्षेत्र में जिस थाने से थानेदार आए, उन्हें वहां भेज दिया गया। यह थाना उनकी पद और गरिमा के हिसाब से छोटा माना जा रहा था, लेकिन कुछ दिनों में ही उनके दिन फिरने लगे। पिछले दिनों एक महिला थानेदार की जनप्रतिनिधि से नाराजगी के बाद लाइन की टिकट कटी तो इन साहब को मलाईदार और बड़े थाने की कमान सौंप दी गई। इसके बाद वे खासा फीलगुड महसूस कर रहे हैं।




