Betul News : शहर में सब्जी बाजार या सब्जी बाजार में शहर समझना मुश्किल
Betul News: It is difficult to understand the vegetable market in the city or the city in the vegetable market.

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की अनदेखी से बिगड़ी शहर की तस्वीर, सब्जी व्यापारी भी स्थाई बाजार के पक्षधर
Betul News : (बैतूल)। इन दिनों आप बैतूल शहर की किसी भी प्रमुख सड़क से गुजर रहे हो वहां चलते हुए आपको सड़क किनारे एक बात निश्चित तौर पर देखने मिलेगी और वह है सब्जी की दुकानों की कतारें, जो एक सिरे से शुरू होकर खत्म होती नहीं दिखती। आलम यह है कि शहर के आम से लेकर खास और प्रशासनिक परिसरों के आसपास भी सब्जियों फलों की दुकाने सजी हैं। इससे ना केवल शहर बदसूरत दिखाई देता है बल्कि यातायात व्यवस्था भी बेपटरी हो रही है। एक छोटी सी पड़ ताल से जानिए आखिर क्यों और कैसे बने यह हालात। अगर केवल पांच छह साल पहले की तस्वीर पर नजर डाले तो बैतूल शहर में तीन प्रमुख साप्ताहिक सब्जी बाजार लगा करते थे।

कोठीबाजार, सदर और गंज सब्जी बाजार शामिल थे, जिनके दिन भी नियत थे। बाकी दिनों में जो स्थाई सब्जी बाजार थे, उनमें कोठीबाजार गुजरी ,गंज सब्जी मंडी सबसे प्रमुख हुआ करते थे। स्थाई सब्जी बाजारों का आकार भी सीमित था यानि सब्जी विक्रेता बाजार की सीमा के अंदर ही रहते थे । जब हमने इस विषय पर पड़ताल की तो जो कारण सामने आए वो एकतरफा तो बिल्कुल नहीं हैं । दरअसल इसके पीछे सब्जी विक्रेताओं की मजबूरी है साथ ही पॉलिटिकल और प्रशासनिक सिस्टम की नाकामी भी शामिल है। कुछ उदाहरणों से इसे समझाने का प्रयास किया है।
उदाहरण 1- पहले गंज रामलीला मैदान के परिसर में एक स्थाई सब्जी हुआ करता था, लेकिन नगरपालिका ने गंज व्यावसायिक कॉप्लेक्स बनाने के लिए सब्जी बाजार को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था किए हटा दिया । पांच साल बीत गए ना तो वहां कॉप्लेक्स बनकर पूर्ण हुआ और ना सब्जी बाजार के लिए स्थान आरक्षित किया गया जिससे मजबूर सब्जी विक्रेता सड़कों पर सब्जी बेचने लगे। अब बाबू चौक से गंज मस्जिद चौक तक और हाथीनाले से कॉलेज चौक तक सड़क के दोनो तरफ स्थायी सब्जी बाजार बन चुका है। यहां एलआईसी दफ्तर ,जेएच कॉलेज , कई बैंक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हैं जिनके सामने आपको सब्जी विक्रेता नजर आएंगे।
उदाहरण 2- पहले कोठी बाजार में गांधी चौक पर रोजाना एक नियत स्थान पर सब्जी विक्रेता बैठते थे । रविवार और गुरुवार के दिन कोतवाली चौक से डागा हाउस तक, कोतवाली चौक से कमानी गेट तक और कोतवाली चौक से न्यू बैतूल स्कूल तक ही सब्जी बाजार लगा करता था, लेकिन साल 2020 के बाद से हालात यह हैं कि कोतवाली चौक से गांधी चौक तक रोजाना दर्जनभर सब्जी विक्रेता सड़कों के किनारे बैठने लगे हैं। इससे ना केवल यातायात प्रभावित होता है बल्कि आवारा मवेशी भी यहां पर घूमते रहते हैं। साप्ताहिक बाजार में तो पैदल चलना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि अब कमानी गेट से महावीर मिष्ठान तक और न्यू बैतूल स्कूल से देशबंधु वार्ड तक भी सब्जी बाजार भरने लगा है। कोठीबाजार की छोटी छोटी गलियों में भी सब्जी विक्रेता बैठ रहे हैं।
उदाहरण 3 – बैतूल शहर का तीसरा सबसे बड़ा साप्ताहिक सब्जी बाजार रविवार और गुरुवार के दिन सदर में लगता है । पहले यह सब्जी बाजार महाजन चौक से लेकर स्वागत कॉफी हाउस तक और पीडब्ल्यूडी चौक से विवेकानंद महाविद्यालय तक होता था, लेकिन अब यह सब्जी बाजार स्टाफ क्वाटर की गलियों तक में फैल चुका है। इससे साप्ताहिक बाजार के दिन यहां पार्किंग से लेकर पैदल चलने तक के लिए मुसीबत बन जाता है। आम दिनों में भी महाजन चौक से लेकर बैलबाजार तक सब्जी की दुकानें लगी रहती हैं।
क्या कहते है व्यापारी
सब्जी व्यापारी सुमित कहार का कहना है कि स्थाई व्यवस्था न होने से सड़क किनारे व्यवसाय करना मजबूरी है। जिनके घरों के सामने सब्जी दुकान लगाते है, उनसे विवाद हो रहे है। यदि नगरपालिका सब्जी बाजार के लिए स्थाई व्यवस्था कर दे तो सभी की समस्या का निराकरण हो जाएगा। दूसरे सब्जी व्यापारी मनीष राठौर बताते है कि जबसे होश संभाला तबसे आलू और प्याज का व्यापार कर रहे है। कोठीबाजार से लेकर कालापाठा तक दुकान लगा रहे है, लेकिन कहीं भी स्थाई सब्जी बाजार नहीं है। परिवार के भरण पोषण के लिए व्यवसाय करना पड़ेगा, इसके लिए नगरपालिका को सहुलियत दी जानी चाहिए।
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नगरपालिका और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही का नतीजा
स्वच्छता रैंकिंग के लिए हमेशा माथापच्ची में जुटी रहने वाली नगरपालिका का ध्यान केवल बेनतीजा अभियानों और टेंडर निपटाने तक सीमित नजर आता है । कागजों पर शहर नम्बर वन बन जाए बस यही टारगेट है । शहर में सब्जी और फल बाजारों के लिए नगरपालिका ने कोई नियत स्थान चिन्हित नहीं किए हैं। इससे सब्जी विक्रेता जहां तहां दुकान लगाकर सब्जी बेचने को मजबूर हैं । जनप्रतिनिधियों से कई बार स्थायी सब्जी मार्केट की मांग की जा चुकी है, लेकिन नतीजा शून्य है। जनप्रतिनिधियों में इतनी क्षमता नहीं दिख रही कि वो सब्जी विके्रताओं के साथ साथ आमजन की सुविधा के लिए एक स्थाई सब्जी बाजार की व्यवस्था करें।
सब्जी विक्रेताओं की अपनी समस्याएं जिनका समाधान नहीं दिखता
सब्जी बाजार के मकड़जाल पर ध्यानाकर्षण का हमारा उद्देश्य छोटे सब्जी विके्रताओं को नुकसान पहुंचाना नहीं है बल्कि एक स्थाई व्यवस्था बनाने का प्रयास मात्र है। सड़क किनारे बैठे कुछ सब्जी विके्रताओं से बात करने पर उनका दर्द भी सामने आता है। अधिकतर छोटे सब्जी विके्रता शहर या आसपास के ग्रामीण इलाकों से सब्जी बेचने आते हैं जो उनकी आजीविका का एकमात्र जरिया है । इसलिए जरूरी यह नहीं कि उन्हें हटाकर मुद्दे की इतिश्री कर दी जाए बल्कि नगरपालिका और जनप्रतिनिधि इस विषय को गम्भीरता से लेकर ऐसा स्थायी समाधान खोजें जिससे छोटे सब्जी विके्रताओं की रोजी रोटी भी चले तो शहर की सुंदरता और यातायात व्यवस्था भी सुचारू रूप से चलती रहे । छोटे सब्जी विके्रता इस बात पर सहमत दिखते हैं कि शहर में उन्हें व्यापार के लिए एक निश्चित स्थान मिलना चाहिए, इससे वो सड़कों के किनारे बैठने मजबूर ना रहे ।
व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने हो रही पार्किंग की समस्या
इन दिनों शहर की बेतरतीब यातायात व्यवस्था की सबस बड़ी वजह है सब्जी बाजार का मकड़जाल । गंज से लेकर कोठीबाजार तक बड़े-छोटे दुकानदारों ,सराफा व्यापारियों से चर्चा करने पर वे बताते हैं कि उनकी दुकानों के सामने सब्जी की दुकाने लगने से वाहनों की पार्किर्ग प्रभावित होती है । अगर दुकानदार सब्जी विक्रेताओं को कुछ कह दें तो विवाद होता है, इसलिए इस समस्या का समाधान करना उनके लिए तो सम्भव नहीं है। अगर प्रशासन चाहता है कि शहर में पार्किंग व्यवस्था सुलभ रहे तो बेतरतीब सब्जी और फल बाजारों के लिए अलग व्यवस्था बनानी ही होगी। वरना बस कागजों पर मेरा बैतूल नम्बर वन लिखते रह जाइए और कागजों में ही स्वच्छता रैंकिंग हासिल कर लीजिए ।
इनका कहना….
यह बात सही है कि सब्जी बाजार के लिए उचित स्थान नहीं मिल पा रहा है, इसलिए स्थल ढूंढने में परेशानी आ रही है। शीघ्र ही स्थाई सब्जी बाजार के लिए स्थान तय कर लिया जाएगा।
ओमपाल सिंह भदौरिया, सीमएओ नपा बैतूल।






