Rajnitik Halchal : राजनीतिक हलचल: आखिर क्यों बह गए इन नेताजी के दिल के अरमान आसुंओ में?? पार्टी बदलने पर दाल गलने को लेकर क्यों बढ़ी चिंता??? आखिर मुंह से एक- दूसरे के खिलाफ आग उगलने वाले कैसे आए 1 मंच पर???? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में….
Rajnitik Halchal :Political stir: Why were the desires of Netaji's heart washed away in tears? Why did the concern about melting of pulses increase due to change of party??? After all, how did people who spit fire against each other come on the stage???? Read our popular columns in political turmoil....

Rajnitik Halchal : भाजपा के स्थापना दिवस पर उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस में बड़ा विस्फोट देखने को मिलेगा। इसकी तैयारियां भी लगभग पूरी की जाने की खबर थी, लेकिन स्क्रिप्ट लिखे जाने के बाद अचानक राजनीति में ऐसा भूचाल आया कि जिले की राजनीति में एक अलग मुकाम रखने वाले पूर्व माननीय को पैर पीछे खींचना पड़ गया। उनके साथ दो और पूर्व माननीय भी भाजपा का झंडा थामने वाले थे, यह भी सपना ही बनकर रह गया। जब प्लान फेल हुआ तो वे बूझे मन से अपनी पार्टी के उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे हैं। अब कहा जा रहा है कि इसके पीछे भी कही भाजपा को फायदा पहुंच गया है तो अंचभित नहीं कहीं जा सकती है। वैसे शहर में चर्चा है कि नेताजी के दिल के अरमान आंसूओं में बहने के बाद वे काफी बदले-बदले से नजर आ रहे हैं।
यहां दाल गलेगी या नहीं?
पिछले दिनों दल-बदल में एक पार्टी के प्रमुख ने दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया। वर्षों तक पार्टी के प्रमुख पद पर रहे। कहा जा रहा है कि उनका यहां पर काफी दबदबा भी था, लेकिन दूसरी पार्टी में शीर्ष नेताओं की भरमार है, इसलिए दाल गलने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। वैसे नेताजी को लेकर चटकारे लगाए जा रहे हैं कि ठेकेदारी के बिल निकालने के लिए मातृ पार्टी के साथ धोखा किया है। वैसे नेताजी अपनी शालीनता के लिए भी जाने जाते हैं, लेकिन उनके बड़बोले छोटे भाई हर मामला बिगाड़ दे रहे हैं। भाई के बड़बोलेपन और करतूत से वे भी परेशान है। हालांकि उन्होंने भी पार्टी को बाय-बाय कहकर अपने भाई का साथ देने का निर्णय लिया है। हालांकि देखने लायक यह होगा कि बड़बोले भाई की भी नई पार्टी में दाल गलती है या नहीं?
मुंह से आग उगलने वाले अब एक मंच पर
कहते हैं राजनीति में ऊंट किस करवट बैठ जाए, यह कहा नहीं जा सकता है। बैतूल की राजनीति में भी यह नजारे देखने को मिल रहे हैं। दरअसल कुछ पार्टियों का राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन का असर यहां पर भी देखने को मिल रहा है। इसमें उन पार्टियों के नेता भी शामिल हैं जो कभी भाजपा के साथ कांग्रेस को भी चोर-चोर मौसेरा भाई कहने से नहीं चूकते थे, लेकिन अब गठबंधन के कारण पार्टी के मंच पर सत्ता पक्ष की खामियां निकाल रहे हैं, लेकिन कांग्रेस की आलोचना उनके मुंह से नहीं निकलता देख उन्हें सुनने वाले दांतों तले अंगूली दबा रहे हैं। कुछ दिनों बाद बड़े नेता एक मंच पर रहेंगे तो नजारा दिलचस्प दिखाई देगा।





