Politics: राजनीतिक हलचल: अपने फायदे के लिए आख़िर क्या बोल गए ये माननीय पुत्र?? ये कैसे नेताजी! मां का अपमान हो गया और चुप्पी साधे रहे???? जेबकतरों का शिकार हुए नेताओं को अब किस उम्मीद की दरकार???? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में….

Politics: Political stir: What did this honorable son say for his own benefit?? What kind of leader is this! Mother was insulted and remained silent???? What hope do the leaders who have become victims of pickpockets need now???? Read our popular columns in political turmoil....

अपने फायदे के लिए आखिर क्या बोल गए माननीय पुत्र

Politics: राजनीति में अपने फायदे के लिए जनप्रतिनिधि तो बड़ी बात कह जाते हैं, लेकिन जिले के एक माननीय पुत्र ने अपने क्षेत्र में हस्तक्षेप न करने के लिए अपनी ही पार्टी के एक बड़े नेता को कही बात खासी सुर्खियां बटोर रही है। यह बात उस समय कही, जब विधानसभा सत्र चल रहा था। उस समय इस बात के कई राजनैतिक मायने निकाले जा रहे हैं। बड़बोले माननीय पुत्र का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी वे रेत को लेकर हस्तक्षेप कर अधिकारियों पर रौब झाड़ चुके हैं। उनकी इस आदत से क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ता भी खासे आक्रोशित है। कुछ मर्तबा सोशल मीडिया पर भी उनके कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ पीड़ा जाहिर की है, लेकिन उनकी आदत में कोई सुधार नहीं हुआ है। इससे माननीय की भी परेशानी बढ़ गई है। पिछले दिनों दो अधिकारियों के बहाने राजनीति रोटी सेक कर नेता पुत्र अपनी पावर भी दूसरों को दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि उनके इस बड़बोलेपन के कारण बैतूल जिले से लेकर भोपाल तक खासी किरकिरी हो रही है।

मां का अपमान हो गया और चुप्पी साधे बैठे रहे नेता

जिले के एक माननीय अपने क्षेत्र की पवित्र नदी के बारे में एक कथा वाचक द्वारा की गई टिप्पणी पर अब तक चुप्पी साधे बैठे हैं। वे जिस क्षेत्र का नेतृत्व करते हैं, वहां के लोग भी खासे आक्रोशित है, लेकिन इन माननीय की चुप्पी से दबी जुबान से उनके खिलाफ पुजारियों और लोगों में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एक शब्द भी उन्होंने इस बारे में किसी से नहीं कहे। अलबत्ता मीडियाकर्मियों ने उनसे कथा वाचक द्वारा कही गई बात याद दिलाई तो वे बोल पड़े कि इस बारे में वर्जन लेना है तो उनके घर आओ। राजनीति में सीनियर होने के बावजूद उनका इस तरह का रवैया न सिर्फ पार्टी बल्कि आम लोगों में भी खासा चर्चा का विषय बना हुआ है।

जेबकतरों का शिकार नेताओं को उम्मीद का सहारा

पिछले दिनों जिले के एक बड़े नेता को बड़ा पद मिलने के बाद प्रथम आगमन के दौरान जेबकतरों ने जैसा कहर ही बरपा दिया। एक नहीं बल्कि पार्टी के कई नेताओं की जेब पर जुलूस में डाका डाल दिया गया। हद तो तब हो गई जब पुलिस की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी तो अपने नेता का स्वागत करने गए कुछ मध्यमवर्गीय नेताओं को भी परेशान होना पड़ गया। जेबकतरों का शिकार हुए नेताओं को उम्मीद है कि जिनके जुलूस में शामिल होने गए थे, वे कहीं न कहीं इसे एडजेस्टमेंट करवाएंगे। इसी उम्मीद से कुछ नेताओं को आस है कि मेहनत की कमाई का कुछ हिस्सा उन्हें मिल जाएगा।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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