Administrative Corner : प्रशासनिक कोना: देशी मुर्गे के शौकीन किस साहब की खातिरदारी के लिए तय करना पड़ रहा 30 किमी की दूरी?? कौनसे साहब रात को कही बात सुबह भूल जा रहे??? इनको ईमानदारी का क्या मिला सिला???? पूरा किस्सा पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..

Administrative corner: Which sir who is fond of local chicken has to travel a distance of 30 km to serve him?? Which sir is forgetting in the morning what he said at night??? What did they get for honesty???? Read the whole story in our popular column Administrative Corner...

Administrative Corner :  आप चौक गए होंगे कि ऐसे कौन से अफसर है, जिनका शौक पूरा करने के लिए महातमों को दलालों को सहारा लेकर 30 किमी दूर का सफर करना पड़ रहा है। चर्चा है कि साहब बायलर के जरा भी शौकीन नहीं है। पुरानी पदस्थापना के दौरान भी वे देशी मुर्गे का स्वाद चखने के आदी थे। अब उनकी पदस्थापना बैतूल में क्या हुई, उन्हें पता चल गया कि देशी मुर्गों की बहार है तो बायलर से तौबा कर बैठे। साहब सप्ताह कम से कम दो से तीन दिन लजीज देशी मुर्गे का स्वाद चखते हैं।

ऐसे में उनका शौक पूरा करने के लिए महातमों को एक दलाल के माध्यम से बुध, शुक्र और रवि को महूपानी के आगे जंगलों से सटे गांव भेजकर शौक पूरा करवाना पड़ रहा है। दो दिन पहले भी एक महातम दलाल के साथ बाइक पर मुर्गा टांगकर ला रहा था, तब यह बात सौ आना सच हो गई कि साहब का शौक पूरा करने के लिए सप्ताह में तीन दिन कैसे 30 किमी मुर्गा लेने जाना पड़ रहा है। यह बड़े साहब जिले में चंद माह पहले ही पदस्थ हुए हैं और अपने शुरुआती खौफ से खूब चौके-छक्के जड़ने एवं बाद में न्यूट्रल हो जाने के कारण चर्चा में है।

रात को बोली बात सुबह क्यों भूल रहे साहब

पुलिस महकमे में इन दिनों आमद देने वाले नए साहब की भूल भूलैया वाली आदत से सभी परेशान है। यह आदत उन्हें पहले से ही है या बैतूल में पदस्थापना के बाद हुई, इसकी जानकारी नहीं है। चर्चा है कि साहब रात में अधीनस्थों को मोबाइल या सेट पर कोई आदेश देते हैं तो उसका पालन भी हो जाता है, लेकिन सुबह खुद साहब भूल जा रहे हैं कि उन्होंने आदेश क्या दिया। पहले तो अधीनस्थ समझे कि हो सकता है कि भूल गए होंगे, लेकिन अक्सर साहब की यही आदत पूरे महकमे में खासी चर्चा बटोर रही है। अधीनस्थ चटकारे लेकर साहब की इस भूल भूलैया वाली आदत के कई मायने निकाल रहे हैं। माजरा क्या है यह तो अब तक किसी को समझ नहीं आया, लेकिन उम्र के लिहाज से कहा जा सकता है कि अभी साहब की भूलने की उम्र नहीं है।

ईमानदारी का यह मिला ईनाम

राजस्व अमले की फील्ड में मेहनत और ईमानदार से काम करने के बावजूद एक अफसर को दूसरे जगह का प्रभार सौंपा जाना खासा चर्चा में है। हालांकि कहा जा रहा है कि उन्हें पूर्व पदस्थापना स्थल से हटाया नहीं जा रहा था, लेकिन उन्हीं के एक साथी बड़े साहब से तहसील के निरीक्षण के दौरान हुज्जत कर बैठे। बड़े साहब ने दरियादिली दिखाते हुए इनके निलंबन का प्रस्ताव नहीं भेजा, लेकिन जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर उक्त तहसील से साहब को अटैच करना पड़ा।

चुनावी बेला में नए की पदस्थापना के दौरान मुख्यालय में पदस्थ एक ईमानदार साहब को उनकी जगह पदस्थ कर 45 किमी दूर स्थित लोप्रोफाइल के अधिकारी को यहां पदस्थ करना पड़ गया। इससे साहब नाराज है। हालांकि इसे उन्होंने सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन अपनी पदस्थापना के दौरान जिस ईमानदारी से उन्होंने काम किया, उसकी जनप्रतिनिधि भी तारीफ करने से नहीं चुकते हैं। बताते चले कि यह साहब हल्की दाढ़ी रखते हैं।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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