Rajnitik Halchal: राजनीतिक हलचल: आखिर किसे पड़ रही अब फार्च्यूनर की जरूरत?? एकजुटता का पाठ पढ़ाकर इन महाशय ने हाईकमान को क्या संदेश दिया??? छात्रावास घोटाला निलंबन कांड में अधिकारियों को किस नेता ने बचाया???? विस्तार से पढ़िए हमारे कॉलम राजनीतिक हलचल में…..
Rajnitik Halchal: Political turmoil: Who needs Fortuner now?? What message did

इन्हें एक फारच्यूनर की जरूरत
राजनीति में आने के बाद पद के हिसाब से ओहदा बढ़ते जाता है। भले ही उम्र में इजाफा हो, लेकिन राजनीति का यह आड़े नहीं आती। अब जिले के एक माननीय को ले लीजिए, जिन्हें एक अदद फारच्यूनर की आवश्यकता महसूस हो रही है। उन्होंने यह बात अपने कुछ कट्टर समर्थकों को भी बताई फिर क्या था माननीय की डिमांड पूरी करने के लिए उनके गृह क्षेत्र की जनपद के अंतर्गत आने वाले कुछ पंचायत प्रतिनिधि और सरकारी ओहदे वाले छोटे कर्मचारियों को डिमांड पूरी करने का फरमान जारी कर दिया।
माननीय की डिमांड सुनकर सबके हाथ पैर इसलिए फूल गए, इसलिए जिस वाहन में बैठकर सवारी करने की उनकी इच्छा, इसकी कीमत काफी अधिक है। हालांकि माननीय को इससे छोटी टोयटा गाड़ी की सिफारिश भी की गई, लेकिन सीनियारटी के हिसाब से वे फारच्यूनर से कम की बात करने से तैयार नहीं हो रहे।
बेचारे पंचायत से जुड़े लोग अपने काम न अटक जाए, इसलिए कुछ अन्य जनपद क्षेत्र से भी माननीय की डिमांड को पूरी करने के लिए चर्चा कर रहे है। यदि कुछ दिनों में एक माननीय के पास यदि फारच्यूनर दिख जाए तो आसानी से समझा जा सकता है कि आखिर वे है कौन? बताते चले कि यह माननीय हमेशा मोबाईल का स्वीच ऑफ रखने और देर सुबह तक नींद से जागने वाले कहे जाते है।
एकजुटता से दिखाई ताकत
एक पार्टी में इन दिनों कुछ पूर्व माननीयों की एकजुटता की खासी चर्चा चल रही है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों का नेतृत्व कर चुके इन नेताओं की ट्यूनिंग इतनी बेहतर नहीं रही। केवल कुछ पूर्व माननीयों में ही आपस में पटरी बैठती, लेकिन चुनाव के लिए किसी का नाम तय होना इनकी एकजुटता का कारण बन गया।
चर्चा है कि एक पावरफूल माननीय इसके सूत्रधार बने और सभी को एकजुट लेकर विरोध जताने भी 200 किलोमीटर दूर जा पहुंचे। विरोध का असर भी थोड़ा दिखाई दिया, लेकिन पूर्व में बड़े साहब के निकट रहे सभी को उनकी फटकार पड़ी तो बैकफूट पर आना पड़ गया। खबर है कि पावरफूल माननीय सभी का नेतृत्व कर अब बड़े साहब के घूर विरोधी हो गए है। यदि लोकसभा चुनाव के बाद कुछ राजनैतिक बदलाव नहीं होता है तो इसके परिणाम भी देखने को मिल सकते है।
निलंबन कांड में बचाव के सूत्रधार की तलाश
जिले के एक छात्रावास कांड में करोड़ों के फर्जीवाड़े पर छोटी मछलियों के खिलाफ तो बड़े साहब ने निलंबन की कार्रवाई कर दी, लेकिन प्रथम श्रेणी दो अधिकारियों का निलंबन प्रस्ताव राजधानी में ठंडे बस्ते में चला गया है। इस पूरे मामले में सत्तारूढ़ पार्टी के एक प्रमुख कहे जाने वाले नेता पर शक की सूई घूमने से लोकसभा चुनाव में असर पड़ने की संभावानाओं से इंकार नहीं किया जा रहा। विभाग की मुखिया से इन नेता की खासी पटरी बैठती है।
ऊपर से मदद को लेकर भी खूब चर्चाए चल रही है, लेकिन इस कांड में मुखिया पर गाज गिरने के पहले ही फ्रंटफूट पर आकर सत्तारूढ़ पार्टी नेता ने बैटिंग कर बड़े साहब कर बड़े साहब को कार्रवाई करने से रोक दिया। इसके बाद भोपाल में भी मुखिया के अलावा निलंबन के प्रस्ताव को इन्हीं के इशारे पर ठंडे बस्ते में डालने की चर्चा है। यह नेता सत्तारूढ़ पार्टी के युवा होने साथ प्रमुख पद पर आसीन है।





