Betul Samachar : सडक़ों पर दौड़ रहे ट्रैक्टर-ट्रालियों में न रिफ्लेक्टर लगे और न रेडियम पट्टी
Betul Samachar: Neither reflectors nor radium strips are installed in the tractor-trolleys running on the roads

अनदेखी: जिलेभर से रोजाना शहर में आते हैं 250 से 300 ट्रैक्टर ट्रॉली
Betul Samachar : (बैतूल)। जिले में स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे से लेकर विभिन्न ग्रामीण मार्गों पर दौड़ रहे कृषि और व्यवसायिक ट्रैक्टर ट्राली में न तो रिफ्लेक्टर लगे हैं और न ही रेडियम पट्टी ही लगाई गई है। जबकि ट्रैक्टर ट्रालियों में बैकलाइट भी नहीं होती है। ऐसे में रात के वक्त अंधेरे में इन वाहनों के पीछे से आने वाले वाहनों में हादसों की आशंकाएं बनी रहती है।
साथ ही इनमें सरिए से भरी ट्रालियों पर भी यातायात पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। इससे इन वाहन चालकों के हौंसले बढ़ते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि करीब दो साल पहले ट्रैक्टर ट्रालियों पर रेडियम लगाने का काम शुरू हुआ था। लेकिन लंबा समय बीतने के बाद यह अभियान फिर ठंडा हो गया।
बताया जाता है कि कृषि उपज मंडी व अन्य कामों के लिए रोजाना करीब 250 से 300 तक ट्रैक्टर-ट्राली शहर में आते हैं। इनमें से कई को किसान व ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग यहां वहां खड़ा कर देते हैं। ट्रालियों के पीछे संकेतक के लिए रेडियम पट्टी या रिफ्लेक्टर नहीं होने से रात को अंधेरे में यह दिखाई नहीं देते हैं। जबकि कई ट्रैक्टर व ट्रालियों में लादकर ग्रामीण क्षेत्र के लोग सरिया भी ढोते हैं जिनमें पीछे की तरफ लटके सरिया की वजह से कई बार हादसे भी हो चुके हैं।
इतना ही नहीं, हाईवे सहित अन्य मार्गों पर स्थित ढ़ाबों व होटलों के आगे भी सडक किनारे ट्रक सहित अन्य वाहन बगैर ब्रेक लाइट लगाए खड़े कर दिए जाते हैं। इसके अलावा हाईवे पर दौडऩे वाली बसों व अन्य बड़े वाहन फिटनेस के लिए जब परिवहन विभाग पहुंचते हैं तो वहां से सुरक्षा की दृष्टि से संकेतक रिफ्लेक्टर लगाकर भेजा जाता है। रात के समय वाहनों के पीछे चलने वाले वाहन चालकों से जरा सी चूक मौत के मुंह में धकेल देती है।
लोहे के सरियों से हादसों का रहता है अंदेशा
ट्रैक्टर के पीछे लगी ट्रालियों में किसी तरह के इंडिकेटर व ब्रेक लाइट नहीं होते हैं। इन पर रेडियम व रिफ्लेक्टर ही हादसे से बचने का एक मात्र साधन होता है। ट्रैक्टर ट्रालियों में रेडियम रिफ्लेक्टर नहीं होने की वजह से उनके रुकने का पीछे वाले वाहनों को आभास नहीं हो पाता है। कई बार देर रात चौराहों पर ट्रैक्टर ट्रॉली न दिखने से लोग टकराते टकराते बचते हैं तो कई बार हादसे का शिकार भी हो जाते हैं।




