Nisha Bangre Betul : काफी हो-हल्ला मचाने के बाद अचानक अंडरग्राउंड हो गई निशा बांगरे !

Nisha Bangre Betul: After much hue and cry Nisha Bangre suddenly went underground

  • इस्तीफा को लेकर जाने वाली थी हाईकोर्ट, अब बात करने से भी परहेज

Nisha Bangre Betul : (बैतूल)। आगामी चुनाव को लेकर जिले की पांचों विधान सभाओं में सरगर्मी तेज हैं, लेकिन इस सबके बीच जिस विधानसभा ने आम लोगों और राजनीतिज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है तो वो आमला , सारणी विधानसभा है। यहां कुछ ही दिनों पूर्व प्रशासनिक अधिकारी निशा बांगरे ने प्रशासकीय पद से इस्तीफा देकर राजनैतिक माहौल गर्म कर दिया था।

खुल्लमखुल्ला तो नहीं बल्कि पर्दे के पीछे से यह खबरें जरूर छन-छन कर बाहर आ गयी थी कि, निशा बांगरे इस्तीफा देने के बाद इस विधानसभा से चुनाव लड़ने का पूरा मूड बना चुकी हैं, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि बांगरे का यह हल्ला शांत होते जा रहा है, क्योंकि उनके मुताबिक शासन द्वारा इस्तीफा स्वीकार ना किए जाने की दशा में उन्होंने कोर्ट की शरण लिए जाने की बात मीडिया से कही थी, लेकिन इस्तीफा स्वीकार हुआ या नहीं।

बांगरे ने कोर्ट की शरण ली या नहीं, इन सवालों का जवाब देने से अब खुद निशा बांगरे परहेज कर रही हैं, यहां तक कि पिछले 5 दिनों के दौरान उन्होंने मीडिया के फोन तक रिसीव नहीं किये हैं। जिससे अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि चुनाव लड़ने की मंशा कहीं धरी की धरी तो नहीं रह गई।

सोमवार दाखिल होनी थी याचिका

इन कयासों को बल इस बात से ज्यादा मिल रहा है कि, 10 दिन पहले की तारीख इस्तीफा स्वीकार किये जाने की अंतिम डेड लाइन थी। इसी समय जब साँझवीर टाईम्स ने निशा बाँगरे से यह पूछा था कि , इस्तीफा स्वीकार ना होने की दशा में उनका अगला कदम क्या होगा, तो उन्होंने बताया था कि, इसके खिलाफ वे न्यायालय की शरण लेंगी।

जानकारी के मुताबिक बीते सोमवार को उनके कोर्ट जाने की जानकारी जब सार्वजनिक हुई तो निशा बांगरे को वस्तुस्तिथि जानने के लिए कई बार फोन लगाया गया , लेकिन उन्होंन फोन रिसीव नहीं किया गया।

यहां तक कि वाट्स एप पर सवाल लिख कर उन्हें भेजे गए, लेकिन 4 दिन बीत जाने के बाद भी उनका कोई जवाब नहीं आया, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि, कहीं ऐसा तो नहीं कि निशा बांगरे के चुनाव लड़ने के मंसूबों पर पानी फिर गया हो।

भरी बारिश में चर्चाओं का बाजार हुआ गर्म

जिस तरह से अचानक राजनीतिक परिदृश्य और मीडिया से निशा बांगरे अदृश्य दिखाई दे रही हैं उसके बाद चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो चुका है। खासतौर पर आमला-सारणी के कांग्रेसियों में हलचल ज्यादा नजर आ रही है।

राजनीतिक समीक्षक इसकी वजह यह बता रहे हैं कि, निशा का प्रशासकीय पद से स्तीफा देना, आमला नगर में मकान का निर्माण करना, विश्वस्तरीय सर्व धर्म सम्मेलन का आयोजन करना, और सबसे बड़ा कयास उनका इस विधानसभा से चुनाव लड़ना कहीं ना कहीं स्थानीय नेताओं को पच नहीं रहा था।

संभावना है , की इन कांग्रेसी नेताओं ने अपनी चिंताओं से कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व को अवगत कराया हो, या फिर भाजपा के दबाव में , इस्तीफा स्वीकार ना करके निशा पर दबाव बनाया गया हो । यह तमाम ऐसी संभावनाएं हैं, जिससे लगता है कि, पूर्व में काफी हो हल्ला मचाने के बाद निशा बांगरे को अंडर ग्राउंड होने पर मजबूर होना पड़ा हो।

खैर जो भी है, अखबार इसकी पुष्टि तो नहीं करता पर निशा बांगरे को आगे आकर अपना पक्ष जरूर रखना चाहिए। आज भी उनसे दो बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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