Politics: राजनीतिक हलचल: कौनसे नेताजी जी ने नारेबाजी शुरू होते ही भागने में भलाई समझी?? अधिकारी से नेता बनी कौनसी मैडम अध्यक्ष जी से मिलने करते रही जुगलबंदी??? अपनी ही पार्टी को किन नेताओं ने बनाया दागदार???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

नारे बाजी शुरू होते ही वरिष्ठ नेता रफूचक्कर
हाल ही में एक मुखिया के आगमन पर विपक्षी दल की युवा ईकाई ने विरोध दर्ज कराने का उपक्रम किया। इसके पीछे उन नेताजी की अक्ल थी, जो हमेशा दूसरों के प्रदर्शन में घूस कर लाईम लाईफ घूसड़ने की मंशा रखते है। इस बार उनकी मंशा पर प्रदर्शन में संख्या कम होने से पानी फिर गया। प्रदर्शन का एक वीडियों भी वायरल हो रहा है जिसमें वे युवाओं की अगुवाई करते दिख रहे है। इस दौरान युवा कार्यकर्ताओं ने जैसे ही नारे बाजी शुरू की नेताजी के चेहरे की हवाई उड़ गई। कार्यकर्ता प्रदेश के मुखिया की बजाए एक दमदार नेता के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। यह वहीं नेता है, जिनके दरबार में पहुंचने पर विपक्षी नेताओं की बात खाली नहीं जाती। विपक्षी पार्टी के यह नेता ठेकेदार भी है इसलिए उन्हें लगा कि कार्यकर्ताओं की नारेबाजी से कहीं उनके नम्बर ना कट जाए। इसी वजह वे आदत के मुताबिक वहां से खिसक लिए। बाद में युवा कार्यकर्ता उन्हें तलाशते रहे, लेकिन उनका मोबाईल भी बंद हो गया। चर्चा है कि नेताजी के भाग जाने की शिकायत कार्यकर्ताओं ने पार्टी प्रमुख से की है।
मेडम की कार में जुगलबंदी
अधिकारी से माननीय बनने की लालसा में नौकरी गवा चुकी एक मेडम की पिछले दिनों मीडियाकर्मी के साथ राजधानी में स्पॉट होने का मामला खुब सूर्खियों में है। बैतूल के ही कुछ लोगों ने मेडम को मीडियाकर्मी के साथ देखा करीब एक माह पहले हुए इस घटनाक्रम की राजधानी के बाद जिले में खुब चर्चा हो रही। बताया यह भी जा रहा है कि मीडियाकर्मी सत्तारूढ़ पार्टी के एक प्रमुख नेता से अपनी निकटता के चलते मेडम की मुलाकात कराने लेकर गए है, लेकिन उन्होंने मिलने का समय ही नहीं दिया। इससे उनके अरमान अधूरे रहे गए। नेताजी के बंगले के आस-पास मेडम को कार से लेकर पहुंचे मीडियाकर्मी को जिले से गए कुछ लोगों ने भी देखा तो वह भी चौके बिना नहीं रह सके।
अपनी ही पार्टी की किरकिरी करा गए सीनियर
सत्तारूढ़ पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं ने अपनी ही पार्टी की जमकर किरकिरी करा दी। जिस मुद्दे पर विपक्षी पार्टी हावी होकर मुद्दा बना रही थी उसे और अधिक और बड़ा मुद्दा मिल गया। दरअसल पंजीयन में घोटाले के बाद जिस तरह दो वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए इससे पार्टी में भी बवाल मच गया। नेताओं पर लेन-देन कर मामला दबाने सहित आरोप लगाकर राजनीति गरमा दी है। चर्चा है कि इस फर्जीवाड़े में पुलिस ने एफआईआर भी कर ली है। हालाकि नेताओं की गिरफ्तारी नहीं हुई है। यदि पद पर बैठे नेताओं की गिरफ्तारी होती है तो उन्हें प्राथमिक सदस्यता से भी हाथ धोना पड़ सकता है।




