Amla Vidhan Sabha Chunav : आमला में फिर घमासान, निशा को मोनिका की ना!
Amla Vidhan Sabha Chunav: Amla's arrogance again, Nisha's right to Monica!

महिला कांग्रेस अध्यक्ष बोली-सीमा और मनोज हारे हुए प्रत्याशी तो टिकिट किसे?
Amla Vidhan Sabha Chunav : (बैतूल) । चुनावों को लेकर लाइम लाइट बन चुकी आमला सारणी विधानसभा में स्थानीय प्रत्याशी की मांग जोर पकडऩे लगी है। इसका इशारा भी मिलना शुरू हो चुका है। जिस तरह से प्रशासनिक अधिकारी येन केन प्रकरण इस विधान सभा से सक्रियता बताते हुए कांग्रेस से टिकट के मंसूबे पाले हुए थी, अब उन मंसूबों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।

हालांकि वे हाईकोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रही है। इस बीच जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस में आमला-सारणी विधानसभा क्षेत्र से स्थानीय को टिकट दिए जाने का अधिकार सबसे पहले बनता है। रही बात निशा बांगरे की तो उनका कोई राइट नहीं बनता कि कांग्रेस उन्हें इस विधानसभा से टिकिट दें। इशारा साफ है कि आमला सारणी विधानसभा के कांग्रेसियों को किसी भी कीमत पर कांग्रेस का आयातित उम्मीदवार स्वीकार नहीं है।
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ऐसे में निशा बांगरे की मुश्किलें बढऩे की संभावना भी दिख रही है। एक तरफ इस्तीफे को लेकर उन्होंने प्रशासन को कोर्ट की चौखट पर ला खड़ा किया है तो दूसरी तरफ जिस विधानसभा से चुनाव लड़े जाने के वे सपना देख रही हैं, उसी विधानसभा के कांग्रेसियों ने अपने वजूद को लेकर निशा बांगरे की खिलाफत करनी शुरू कर दी है। ऐसे में निशा बांगरे के चुनाव लड़े जाने पर भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं।

कांग्रेस की सदस्यता नहीं तो टिकिट का सवाल नहीं
आमला-सारणी विधानसभा मे निशा बांगरे के विरोध की लहर चलेगी। यह सांझवीर टाईम्स ने पहले ही बता दिया था। रही कसर महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोनिका निरापुरे के डिबेट में पूरी कर दी, जिसमें उन्होंने कहा है कि प्रशासनिक अधिकारी निशा बांगरे का चुनाव लडऩे का कोई मामला ही नहीं है। उनकी कांग्रेस की सदस्यता तक नहीं है।
क्षेत्र में कई स्थानीय नेता हैं, जो कांग्रेस के प्रति हमेशा निष्ठावान रहे हैं। कार्यक्रमों में दरी चादर उठाई और बिछाई है। ऐसा कोई माहौल ही यहां नहीं है कि निशा बांगरे को आमला-सारणी विधानसभा से टिकट मिले। जिले में महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने एक चैनल के डिबेट में खुलकर कहा कि ये बताने और समझने में काफी महत्वपूर्ण है कि संभवत: निशा को टिकट मिल भी जाती है, तो चुनावी राह उनके लिए उतनी आसान नहीं हो पाएगी जितना कि समझा जा रहा है। यानी कि ऐसी स्तिथि में स्थानीय कांग्रेसी भी निपटाओ अभियान में जी जान से जुट जाएंगे।
मेरी दावेदारी सबसे मजबूत(Amla Vidhan Sabha Chunav)
कांग्रेस में महिला नेत्रियों का नेतृत्व करने वाली मोनिका निरापुरे ने बता दिया है कि आमला विधानसभा के टिकट के दावेदारों में वे खुद भी शामिल हैं और उनकी दावेदारी सबसे मजबूत है। हालांकि उन्होंने पूर्व में विधानसभा चुनाव लड़ चुके मनोज मालवे और पार्षद का चुनाव लड़ चुकी सीमा अतुलकर को भी निष्ठावान कांग्रेसी बताया, लेकिन बातों-बातों में यह भी बता दिया कि मनोज मालवे पूर्व में कांग्रेस की टिकट पर 20 हजार वोटों से चुनाव हार चुके हैं।

वहीं सीमा अतुलकर भी आमला में अपने वार्ड से पार्षद का चुनाव हार चुकी हैं। ऐसे में मोनिका का दावा है कि आमला-सारणी विधानसभा मे कांग्रेस से टिकट की उनकी दावेदारी सबसे मजबूत है। रही निशा बांगरे की बात तो अभी तक शासन ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। दूसरी तरफ निशा ने इस्तीफे को लेकर कोर्ट का रुख अपनाकर शासन के अधिकारियों को घसीट लिया है। इस्तीफे की अटकलों की वजह से निशा को अभी तक कांग्रेस की सदस्यता भी नहीं मिल पाई है, ये तमाम ऐसे तथ्य हैं जो राजनीतिक समीक्षकों के रडार पर हैं। कुल मिलाकर कहानी ये सामने आ रही है कि बहुत कठिन है डगर निशा की।




