Assembly Elections : पांसे, धरमू के किले में चंद्रशेखर और महेंद्र करेंगे सेंधमारी?
Assembly Elections: Will Chandrashekhar and Mahendra break into the fort of Panse, Dharmu?

दोनों ही विधानसभा में अब तक मतदाता एक बार कांग्रेस तो दूसरी बार कांग्रेस को मौका देते आए है
Assembly Elections : (बैतूल)। विधानसभा चुनाव के ठीक तीन माह पहले ही भाजपा ने अपने 39 प्रत्याशियों की टिकिट घोषित कर निश्चित ही राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है। वह भी ऐसे समय जब कांग्रेस का अभी तक दूर- दूर तक अपने प्रत्याशियों की सूची जारी किए जाने की गुंजाइश दिखाई नहीं दे रही। गुरुवार भाजपा द्वारा जारी की गई प्रत्याशियों की सूची में बैतूल जिले की मुलताई और भैंसदेही विधानसभा से भी प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया गया है। मुलताई से एक बार फिर पूर्व विधायक चन्द्रशेखर देशमुख का नाम फाइनल किया गया है तो भैंसदेही विधानसभा से भी पूर्व विधायक महेंद्र सिंह चौहान पर फिर भरोसा जताया है।
भाजपा का स्टैंड साफ है कि मौजूद कांग्रेस विधायक सुखदेव पांसे जो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के काफी करीबी माने जाते हैं और भैंसदेही विधानसभा के कांग्रेस विधायक धरमूसिंह सिरसाम के किले को भेदने के लिए चंद्रशेखर और महेंद्र ही काफी हैं। हालांकि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि मुलताई में सुखदेव पांसे और भैंसदेही में धरमू सिंह का अपना खुद का जनाधार भी काफी मजबूत है। ऐसे में चंद्रशेखर देशमुख और महेंद्र सिंह चौहान कैसे इन महारथियों के किले को भेद पाएंगे। यह देखना काफी दिलचस्प होगा।
मतों का विभाजन तय करेगा फैसला(Assembly Elections)

मुलताई विधानसभा का प्रतिनिधित्व वर्तमान में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस विधायक सुखदेव पांसे कर रहे हैं, जो कि कुनबी समाज से आते हैं। भाजपा ने भी कुंबी समाज से ही ताल्लुक रखने वाले चंद्रशेखर देशमुख को टिकट देकर मास्टर स्ट्रोक खेला है। दरअसल वर्ष 2013 में चंद्रशेखर और सुखदेव पांसे में सीधी टक्कर हुई थी। इस चुनाव में चन्द्र शेखर देशमुख ने लगभग 30 मतों से सुखदेव पांसे को शिकस्त दी थी।
मुलताई विधानसभा की राजनीति और मतदाताओं के रुख को लेकर स्थानीय राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि विस मे मतों का विभाजन ही प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करता है। मुलताई विधान सभा मे कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 2 लाख 25 हजार है, इनमें सर्वाधिक मतदाता कुंबी और पवार समाज से ताल्लुक रखते हैं। कुंबी समाज के अनुमानित 70 हजार मतदाता हैं तो व पवार समाज के 40 हजार मतदाताओं का होना बताया जा रहा है।
पिछले चुनावों में कुंबी समाज के सुखदेव पांसे और पवार समाज के राजा पवार के बीच मुकाबला हुआ था। दो अलग-अलग समाज के प्रत्याशी होने की वजह से कुुंबी समाज के सर्वाधिक मत कांग्रेस के पक्ष में जाने और अन्य वर्गों के मतों में विभाजन होने के चलते कांग्रेस के सुखदेव पांसे ने भाजपा के राजा पवार कोकरीब 18 हजार मतों से शिकस्त दी दी थी, लेकिन इस बार दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशी कुंबी समाज से मैदान में है।
मतों का विभाजन तय(Assembly Elections)
स्वाभाविक है कि कुंबी समाज के मतों में विभाजन होना तय है। पवार समाज के जो परंपरागत वोट हैं, उनमें भी मतों का विभाजन तय है। कुछ मत कांग्रेस को मिलेंगे तो कुछ भाजपा को। इसके अलावा क्षेत्र में किरा? , साहू , रघुवंशी , मुस्लिम आदिवासी मतदाताओं का रुख भी दोनों पार्टियों के प्रति सकारात्मक रहा है। यहां भी विभाजन की स्थिति देखने को मिलेगी। चूंकि भाजपा के चंद्रशेखर देशमुख ने भाजपा से 2013 में चुनाव रिकार्ड मतों से जीता था। और अगले पांच साल वे बिना किसी पद पर रहे। जनता के सीधे संपर्क में रहे तो यह माना जा सकता है कि, चन्द्रशेखर देशमुख इस बार कांग्रेस के सुखदेव पांसे को कड़ी टक्कर देंगे।
महेंद्र पर भाजपा का दांव कितना ठीक?

भैसदेही विधानसभा प्रत्याशी महेंद्र सिंह चौहान को पार्टी द्वारा छठी बार प्रत्याशी बनाया है। चौहान तीन बार के विधायक रहे हैं। वर्ष 1998, 2003 और वर्ष 2013 में उन्होंने भैसदेही विधान सभा का प्रतिनिधित्व किया तो वहीं दो बार चुनाव हारे भी हैं । छठी बार पार्टी ने पूर्व विधायक महेंद्र सिंह चौहान पर एक बार फिर भाजपा ने अपना भरोसा दिखाया है। महेंद चौहान की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीति से प्रेरित रही है। हालांकि मौजूदा कांग्रेस विधायक धरमू सिंह सिरसाम की छवि भी क्षेत्र में अच्छी होने के साथ साथ उनका जनाधार भी ठीक कहा जा सकता है, लेकिन क्या महेंद्र धरमू का किला भेद पाएंगे? यह सवाल विधानसभा क्षेत्र में सुर्खियां बना हुआ है।
स्थानीय राजनीतिक राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि मौजूदा राजनीति पर नजर डालें तो भाजपा का एक धड़ा महेंद्र का नाम फाइनल होने से नाराज है। इसके पीछे उनका 5 साल सक्रिय न रहना सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है। विधायक रहते हुए कार्यकर्ताओं से दूरी, लोगों के काम काज का ना होना, समय समय पर आम जनता के बीच पहुंचकर संवाद स्थापित ना करना कहीं ना कहीं आम मतदाताओं के साथ साथ भाजपा नेताओं की भी नाराजगी का कारण बना हुआ है।
दूसरे दावेदारों की उम्मीदों पर फिरा पानी(Assembly Elections)
विधान सभा चुनावों के नजदीक आते आते दावेदारों की संख्या अक्सर बढ़ती हुई नजर आती है। इस चुंनाव के पूर्व भी जिले की पांचों विधान सभाओं में दावेदारों की अच्छी खासी संख्या नजर आ रही है, किंतु मुलताई और भैंसदेही विधानसभा मे उन दावेदारों के अरमान बस अरमान ही रह गए, जो चुनाव लड़ने का सपना संजोए हुए अपनी जमीन तलाश करने में लगे हुए थे।
मुलताई में पहले से ही कुनबी समाज के आधा दर्जन दावेदार अपनी दावेदारी के चलते जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में जुटे हुए थे । इनमें संघ से जुड़े हेमन्त विजयराव देखमुख, पूर्व जिप उपाध्यक्ष नरेश फाटे, , राजू अनुराग पवार, तथा भाजपा महिला नेत्री माधुरी साबले शामिल थी, लेकिन सबकी उम्मीद पर पानी फिर गया है। इसी तरह भैंसदेही विधान सभा में भी हेमराज बारस्कर, राहुल चौहान, डॉ महेंद्र सिंह चौहान की दावेदारी धरी की धरी रह गई।




