Deer Death In Sarni: जंगल से भटककर शहर में आए हिरण और उसके शावक की मौत
Deer Death In Sarni: Deer and its cub died in the city after wandering from the forest

वन विभाग में है जरूरी सुविधा का अभाव
Deer Death In Sarni (सारनी)। सतपुड़ा मेलघाट कारीडोर से घिरे सारनी क्षेत्र में संरक्षित वन्य जीवों की मौजूदगी बनी रहती है। बावजूद इसके वन विभाग द्वारा यहां प्राथमिक उपचार से लेकर वन्य जीवों को सुरक्षित रखने कोई खास संसाधन नहीं है। इसके चलते रेस्क्यू किए जाने वाले वन्यजीवों को मौत का सामना करना पड़ रहा है।ताजा मामला जंगल से भटककर शहर में आए मादा हिरण और उसके शावक का समाने आया है। उचित सुविधा के अभाव में हिरण और उसके शावक की मौत हो गई। इससे वन विभाग में हड़कंप मच गया है।

गौरतलब है सारनी और आसपास के जंगलों में अक्सर टाइगर, लेपर्ड, हिरण, सांभर, भालू, मोर समेत अन्य वन्य जीवों की मौजूदगी बनी रहती है। हालही में लेपर्ड के पगमार्क दिखाई दिया है। इससे पहले काफी दिनों तक टाइगर शहरी क्षेत्र के आसपास दिखाई देता रहा। फिर भी वन विभाग द्वारा वन्य जीवों को रेस्क्यू करने से लेकर उनके इलाज जैसे पर्याप्त जरूरी इंतजाम नहीं किए हैं। जिसके चलते वन्य जीवों की मौत हो रही है।
- Also Read : Unique News : बच्चों का भविष्य संवारने जनपद सदस्य ने छोड़ी राजनीति, जनपद सदस्य पद से दिया इस्तीफा, बनी शिक्षक
नहीं दिखती सक्रिय भूमिका(Deer Death In Sarni)

वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले समाजसेवी आदिल खान बताते हैं की स्थानीय स्तर पर वन्यजीवों को रेस्क्यू करने से लेकर उनके इलाज करने तक वन विभाग की भूमिका सक्रिय नहीं है। इसके चलते वन्यजीव रेस्क्यू करने के बाद भी नहीं बच पा रहे।
आदिल खान बताते हैं कि 9 अगस्त को हिरण के 1 बच्चे को नगर के जागरूक लोगों द्वारा रेस्क्यू किया गया था। इसकी सूचना वन विभाग को देकर हिरण के शावक को उनके सुपुर्द कर दिया गया था।उसी दिन सूचना मिली थी कि एक मादा हिरण को कुत्ते ने घायल कर दिया है। शहर के आसपास की झाड़ियां और नालों में मादा हिरण भटक रही है। लोगों की सूचना पर हिरण को सर्च किया। लेकिन नहीं मिली। 17 अगस्त को पुन: सूचना मिली की मादा हिरण ट्रिपल स्टोरी के पास घायल अवस्था में घूम रही है। इसकी सूचना वन विभाग के जिम्मेदार अफसर को देने के बाद हिरण की तलाश शुरू की गई।
आदिल ने वन परिक्षेत्र अधिकारी सारनी एवं उप वन मंडल अधिकारी सारनी को भी सूचना दी और उनसे मौका स्थल पर आने का आग्रह किया परंतु व्यस्तता के चलते वे नहीं आए। वहीं अंधेरा होने की वजह से हिरण को रेस्क्यू करने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा। रेस्क्यू के दौरान वन्य जीव संरक्षण के लिए कार्य करने वाले समाजसेवी आदिल खान घायल हो गए। हिरण को रेस्क्यू करते ही पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना दी गई और हिरण का इलाज किया गया। लेकिन अगले ही दिन सुबह होते तक हिरण की मौत हो गई।
पहले शावक, फिर हिरण ने तोड़ा दम(Deer Death In Sarni)
आदिल खान बताते हैं कि हिरण के शावक की मौत रेस्क्यू करने के कुछ दिन बाद ही हो गई थी। लेकिन इसकी जानकारी वन विभाग द्वारा मुझे नहीं दी गई। जब हिरण को रेस्क्यू कर वन विभाग के गेस्ट हाउस ले जाया गया और शावक की जानकारी ली गई। तब बताया गया कि हिरण के शावक की मौत हो चुकी है। आदिल खान का कहना है कि सारणी में जब सुविधा नहीं है, तो फिर हिरण के शावक को यहां रखा ही क्यों, उसे समय रहते वन विहार पहुंचा दिया जाता। ऐसा करने से हिरण के शावक की जान बच जाती। इस मामले की शिकायत आदिल खान द्वारा प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी असीम श्रीवास्तव से भी की है।
- Also Read : Betul ki khabar: चने की भाजी खाने से एक ही परिवार के 6 लोग गंभीर रूप से बीमार, अस्पताल में इलाज जारी
जानकारों को नियुक्त करने की मांग
वन्य जीव संरक्षण के लिए कार्य करने वाले समाजसेवी आदिल खान ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक से उत्तर वन परीक्षेत्र सारणी में वन्यजीवों के जानकारों, वन विहार, राष्ट्रीय उद्यानों में सेवारत अधिकारी, कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग की है। आदिल खान का कहना है कि वन विभाग में भी अधिकारी, कर्मचारी वन्यजीवों को रेस्क्यू करने से लेकर उनकी देखभाल करने तक सभी में योग्य हो, उन्हें ही यहां नियुक्त करना चाहिए। क्योंकि उत्तर वन परिक्षेत्र के जंगल में वन्यजीवों की हलचल हमेशा ही बनी रहती है। वहीं सारनी क्षेत्र में स्थाई पशु चिकित्सा अधिकारी की भी नियुक्ति नहीं हुई है। जिसको लेकर भी आदिल खान ने पशु चिकित्सा विभाग को कुछ महीने पहले पत्र लिखा है।




