Politics: राजनीतिक हलचल: आखिर युकां के चुनाव में सदस्य बनाने के लिए कौन दे रहा 10 रुपए का बोनस?? विपक्षियों ने भी किस राजनेता को लिया हाथोंहाथ??? एक ही पार्टी के नताओ की राह में खुद क्यों बम रहे रोड़ा???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

Politics: Political stir: Who is giving a bonus of Rs 10 for making members in the Yuva Congress elections?

युकां में सदस्य बनाने 10 रुपए का बोनस

कांग्रेस के अनुसांगिक संगठन युवक कांग्रेस में इन दिनों संगठनात्मक चुनाव की सुगबुगाहट चल रही है। प्रदेश और जिला स्तर पर पदाधिकारी बनाने के लिए संबंधितों को बकायदा 50 रुपए शुल्क देकर सदस्य बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने वाले ही युकां के पदाधिकारी बन पाएंगे। इस बीच अपने चहेतों को प्रमुख पद पद आसीन करने के लिए एक पूर्व माननीय हर तरीका अपना रहे हैं।

चर्चा है कि कुछ अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को भी सदस्यता की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए बकायदा 50 रुपए सदस्यता शुल्क के अलावा 10 रुपए का बोनस आफर भी शुरू किया है, ताकि अधिक से अधिक सदस्य बनाकर चहेतों को प्रमुख पद पर आसीन कराया जा सके। हालांकि इस नीति से चुनाव में जीत हासिल कर ले तो युकां का संगठन कैसे चलेगा, इस बात को लेकर खूब चर्चा हो रही है। दस रुपए बोनस के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी सदस्य बनाने का काम जोरशोर से चलने की जानकारी सामने आई है। अब देखना यह है कि बोनस का क्या फायदा होता है और क्या नुकसान?

विपक्षियों ने भी हाथों हाथ लिया

राजनीति में परस्पर एक दूसरे के विरोधी होना आम बात है। यदि पार्टी दूसरी हो तो वैयमनस्ता बढ़ती है, लेकिन बैतूल इससे धीरे-धीरे अछूता होते जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से जिले की इस परिपाटी में काफी परिवर्तन देखने को मिला है। दरअसल एक पार्टी के वरिष्ठ नेता को प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारी का ओहदा मिला। इसे उनकी पार्टी से असंतुष्ट लोग भी भुनाने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

ऐसे में विपक्षी पार्टी के कुछ नेता भी अपने संबंधों के आधार पर प्रदेश पदाधिकारियों को हाथों-हाथ ले रहे हैं। चर्चा है कि पार्टी के वरिष्ठों को इस बात की जानकारी न मिले, इसका ख्याल रखकर बधाइयां तो दी ही जा रही है। अब मिलने के प्रयास भी हो रहे हैं। इस बात से साफ जाहिर है कि बैतूल के राजनीतिक पदाधिकारी उगते सूरज को दंडवत प्रणाम करने में माहिर हो गए हैं।

एक ही पार्टी, लेकिन मतभेद जमकर

जिले की एक आरक्षित विधानसभा में एक ही पार्टी के लोग एक-दूसरे की काट बन गए है। यह बात इसलिए कही जा रही है कि विपक्ष को आरक्षित विधानसभा में कुछ करने की जरूरत ही नहीं है। सत्तारूढ़ पार्टी के नेता ही एक-दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। विधानसभा क्षेत्र में हो रहे घोटाले को लेकर एक पक्ष पूरा सहयोग कर रहा है तो दूसरा इसके विरोध में मोर्चा खोले हुए है। सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए अपनी भड़ास निकाली जा रही है।

चर्चा यह भी है कि आपसी विवाद के कारण सत्ता पक्ष के नेताओं ने कारोबार को भी अस्त्र बनाकर निशाना साधा है, इससे आपसी मतभेद जमकर बढ़ गए है। कहा जा रहा है कि यदि पार्टी के नेताओं ने यहां ध्यान नहीं दिया तो आने वाले विधानसभा में चुनाव में पार्टी की नैय्या डूबने से इंकार नहीं किया जा सकता। बताते चले की इस विधानसभा में पार्टी को सबसे कम मतों से जीत हासिल हुई है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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