Betul News : सहकारी समिति के मैन्युअल- आनलाइन रिकार्ड में बड़ा हेरफेर
Betul News: Big manipulation in manual- online records of cooperative society

जिले की 92 समितियों को किया जा रहा ओन लाइन, कई समितियों में लाखों का अंतर, बड़ा घोटाला सामने आने की उम्मीद
Betul News : (बैतूल)। बैंकों की तर्ज पर अब उन सहकारी समितियों के कामकाज भी ओन लाइन किये जा रहे हैं। जहां अभी तक समस्त रिकार्ड मैन्युअल रजिस्टर आदि में संधारित किये जाते रहे हैं। सूत्रों से जानकारी मिली है कि मैन्युअल रिकार्ड संधारण में समितियों द्वारा किये गए हेरफेर की पोल तब खुलनी शुरू हुई जब इन रिकॉर्डों की जांच कर इसका डाटा कम्प्यूटर पर लोड किया जाने लगा । बताया जा रहा है कि, ऐसी कई समितियां हैं जिनके रिकार्ड में संधारित राशियों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। यह राशि लाखों और करोड़ों में बताई जा रही है। इससे साफ है कि सहकारी समितियों में समय समय पर उजागर होने वाले फर्जीवाड़े में कुछ तो सच्चाई है। वहीं अधिकारी ऐसे किसी भी मामले से साफ इंकार कर रहे हैं, लेकिन यह जरूर बोला जा रहा है कि सभी समितियों का डाटा अपलोड होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
रिकार्ड खंगालते ही सामने आने लगी अनियमितताएं
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सहकारी समितियों में सभी कार्य आनलाइन किए जाने के निर्देश मिलते ही इस पर काम शुरू किया गया था। सभी समितियों के मैन्युअल रिकार्ड का डाटा कम्प्यूटर में अपलोड किया जाने लगा था, परंतु जांच के दौरान कई समितियों के रिकार्ड में संधारित की गई राशियों में अंतर साफ नजर आने लगा था। जिसे देखकर अधिकारियों के हाथपांव फूलने शुरू हो गए। बताया जा रहा है कि कुछ समितियों के रिकार्ड में लाखों रुपयों का अंतर साफ नजर आ रहा है। अब यह अंतर कैसे आ रहै क्यों आ रहे यह तो समिति के कर्ताधर्ता ही जाने, लेकिन यदि यह सही है तो प्रशासन को इस मामले को गम्भीरता से लेने की जरूरत है। ताकि सहकारी समितियों में अतीत में किए गए फर्जीवाड़े का खुलासा हो सके।
क्या आंखे मूंदकर किए जा रहे थे आडिट
सहकारी समितियों के कसमकाज पर लग रहे इस आरोप के बाद समूचा विभाग सवालों के घेरे में नजर आ रहा है, वो इसलिए कि इन समितियों द्वारा साल भर किए गए कामकाज का वार्षिक आडिट भी किया जाता है। आ
डिट का जिम्मा भी उप पंजीयक कार्यालय सहकारी समितियों में पदस्थ ऑडिटरों द्वारा किया जाता है। सवाल यह खड़ा हो रहा है की मैन्युअल रिकार्ड का आडिट क्या अभी तक ऑडिटर आंख मूंद कर रहे थे।अगर अनियमितताएं की जा रही थी, रिकार्ड में हेरफेर किया जा रहा था तो इस पर ऑडिटरों ने ऑब्जेक्शन क्यों नहीं लिया। सवाल यह भी है कि यदि ऑब्जेक्शन लिया भी गया तो सम्बंधित समिति ने इसका निराकरण किया था या नहीं। ये तमाम ऐसे सवाल हैं जो पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। हालांकि उपायुक्त सहकारी समिति द्वारा ऐसे किसी भी मामले के होने से इनकार किया जा रहा है।
इनका कहना….
ऐसा कुछ भी नहीं है। जब तक पूरा डेटा अपलोड नहीं हो जाता इस संबंध में कुछ नहीं बोला जा सकता।
केके शिव, उपायुक्त सहकारी समितियां बैतूल




