Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: बड़े साहब की आक्रमकता के आगे सबकी बोलती बंद, पर इस लिस्ट में नहीं आया नाम!! बैचमेट के ऐसे किस्से, 1 अनुविभाग और दूसरा सम्भाल रहा प्रमुख थाना…. कौनसे सीएमओ अध्यक्ष पति के गुलाम बनकर हिला रहे दुम????? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..
Administrative Corner: Everyone was speechless in the face of the big boss's aggression, but his name didn't appear on this list!! Such stories of batchmates, one managing a subdivision and the other a major police station...

बड़े साहब की जबरदस्त आक्रमकता
पिछले एक सप्ताह से बड़े साहब कुछ ज्यादा ही आक्रमक नजर आ रहे हैं। इसके पीछे तर्क दिए जा रहे थे कि कुछ दिनों बाद निकलने वाली तबादला सूची में उनका नाम पहले पायदान पर होगा, लेकिन सूची आ गई और उनका नाम गायब है। मतलब साफ है कि वे आगामी कई माह तक लंबी पारी खेलते रहेंगे। उन्हें इस बात से कोई मलाल नहीं है कि वे यहां रहे या न रहे, लेकिन बीते एक सप्ताह से किसी भी कर्मचारी को अपने अनमोल वचन से बख्श नहीं रहे। सभी कर्मचारी-अधिकारी इसका अलग-अलग आंकलन करने में लगे थे।
किसी का कहना था कि साहब को मनपसंद जगह पोस्टिंग नहीं मिल रही है, इसलिए उनका गुस्सा निकल रहा है। खैर! साहब का नाम तबादला सूची में नहीं आया। अब अधिकारी-कर्मचारी देखना चाह रहे हैं कि साहब का मूड कैसा रहता है?
बैचमेट महसूस कर रहे फीलगुड
वर्दी वाले विभाग में मुख्यालय इन दिनों दो सीनियर अधिकारी फीलगुड महसूस कर रहे हैं। एक डीएसपी स्तर के है तो दूसरे थानेदार बताए जाते हैं। इनके बारे में कहा जाता है कि दोनों एक ही बैच के है, इसलिए पहले से ही जमकर याराना है। हाल ही में नए साहब ने उन्हें एक प्रमुख थाने का जिम्मा सौंपा तो डीएसपी साहब की खुशी का ठिकाना न रहा। हालांकि थानेदार अब तक डीएसपी नहीं बन पाए, लेकिन उनके बैचमेंट को दो वर्ष पहले प्रमोशन मिल गया। इसके पीछे कुछ पुराने मामले बताए जाते हैं। हालांकि थानेदार इसी में खुश है कि उनका सीनियर बैचमेट ही है। यही वजह है कि दोनों में जमकर फीलगुड देखने को मिल रहा है।
अध्यक्ष के गुलाम बने अधिकारी
मुख्यालय की करीबी एक परिषद में अध्यक्ष कम और उनके पति की दबंगई ज्यादा चल रही है। अध्यक्ष पति अपने मन में जो आ रहे, वह सीएमओ से करवाते जा रहे हैं। कई नियम के विरूद्ध काम कर यह अधिकारी पहले से ही नियमों कें घिरे हुए हैं। अब नियम विरूद्ध कई कार्यों को अंजाम देकर अपनी परेशानी बढ़ा रहे हैं। पूर्व में इन साहब की बड़े अफसरों से शिकायत हो चुकी है। वे सोच रहे हैं कि अध्यक्ष पति उनकी कुर्सी हमेशा बचा सकते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता है कि नियमों के फेर में परेशानी उनकी ही बढ़ेगी।




