Diwali 2023 : माटी के दीपों से रोशन होगी अमावस्या की काली रात
Diwali 2023: The dark night of Amavasya will be illuminated with earthen lamps.

कल महापर्व दीपावली पर घर-घर जलेंगें आस्था के दीप
Diwali 2023 : (बैतूल)। जिले भर में दीपावली पर्व की धूम है। धनतेरस, रूप चौदस के बाद रविवार को दीपावली का पर्व पूरे हर्षोल्लास एवं परम्परागत तरीके से मनाया जाएगा। रविवार को सुबह से ही पूजन सामग्री खरीदने लोग बाजार में उमडऩे लगे। बाजार खील-बताशे, मोरपंख, झाड़ू सहित कमल एवं गेंदे के फूलों की दुकानों से बाजार में सज चुका है। दीपावली पर्व का उत्साह लोगों में इस बार काफी अलग है।
रविवार को सुबह से ही दीपावली पर्व को लेकर घर-आंगन की सजाएं जाएंगे, आंगन लीपकर रंगोली बनाई जाएगी। शाम को घरों में दीप जलाकर भगवान श्री गणेश एवं मां लक्ष्मी का शुभ मुहर्त में विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। वैसे तो धनतेरस से ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरूआत हो गई है, लेकिन दीपावली पर पटाखे फोडऩे की ललक बच्चों को सुबह से उत्साहित करती है। दीपावली को लेकर वाट्सएप, फेसबुक, इस्ट्राग्राम, हाइक सहित अन्य एप के माध्यम से दीपावली की शुभकामनाएं देने का सिलसिला शुरु हो गया। दीपावली पर्व पर माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने घरों को बंधनवारों से सजाया जा रहा है।
मिट्टी के दीपक से रोशन होंगे घर
दीपावली के दिन मिट्टी के दिए जलाने एवं मिट्टी से बनी मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। दीपावली के दिन घरों में मिट्टी की प्रतिमा लायी जाती है। वहीं ऐश्वर्य के प्रतीक मोरपंख एवं लक्ष्मी की प्रतीक झाड़ू का भी पूजन किया जाता है। इस दिन खील-बताशे, मिठाई का प्रसाद बांटा जाता है। ज्ञात हो कि पांच दिनों तक लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। बैतूल शहर सहित जिले के विभिन्न अंचलों में लक्ष्मी जी की प्रतिमाएं सामूहिक रुप से भी स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है।
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आतिशबाजी से रंगबिरंंगा होगा आसमान
रविवार को अमावस्या की रात पूरी तरह आतिशबाजी और पटाखों से रंगबिरंगी हो जाएगी। इस दिन पूरे जिले में हजारों की संख्या में लोग आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार करेंगे। इससे पहले श्री गणेश एवं मां लक्ष्मी का विधि विधान से पूजन कर भोग लगाया जाएगा। इसके बाद आतिशबाजी, पटाखे फोडऩे का सिलसिला शाम से लेकर देर रात तक जारी रहेगा। हिन्दू धर्म के सबसे बड़े दीपावली पर्व को लेकर खासा उत्साह है। हालांकि प्रशासन ने रात दस बजे तक ही पटाखे जलाने के दिशा निर्देश जारी किए है। दीप पर्व के उत्साह में लोगों ने कोरोना का संकट भूला दिया है लेकिन सावधानी बेहद जरुरी है।
दीपावली पर कड़वे तेल से दीए जलाने का रिवाज (Diwali 2023)
जिले भर में दीपावली का पर्व पारम्परिक रीति रिवाज एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत दो दिन पहले हो चुकी हैै। कल दीपावली को लेकर हर वर्ग में उत्साह है। बाजार में भीड़ उमड़ रही है। बैतूल जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और यहां दीपावली पर्व को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलन में है। वैसे तो आदिवासी एक महीने तक दीपावली का पर्व मनाते है। होली के बाद दीपावली ही ऐसा त्योहार है जो आदिवासी समाज पूरा माह उत्सव के रुप में मनाते है। दीपावली पर करंज या सरसों के तेल से दीपक जलाने का रिवाज भी पूरे जिले में निभाया जाता है।
करीब दस साल पहले 50 रुपए लीटर मिलने वाला करंज के तेल पर भी महंगाई का असर देखने मिल रहा है। भले ही करंज का तेल 150 रुपए लीटर हो गया है लेकिन तेल खरीदने वालों का उत्साह कम नहीं हुआ। हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहार दीपावली का पर्व धनतेरस से शुरू हो रहा है. वही दिवाली अमावस्या के दिन मनाई जाती है. इस दिन माता लक्ष्मी भगवान विष्णु गणेश और कुबेर महाराज का पूजन किया जाता है. माता लक्ष्मी विष्णु और कुबेर की पूजन करने से धन की प्राप्ति होती है।




