Betul News : साल बीता, स्कूली बच्चों को नहीं मिल पाई गणवेश
Betul News: Year passed, school children could not get uniform

अब बोल रहे अधिकारी , खातों में डाली जाएगी राशि
Betul News : (बैतूल)। सरकार ने गरीब स्कूली विद्यार्थियों के हित को दृष्टिगत रखते हुए गणवेश प्रदान किए जाने का प्रावधान तो किया, लेकिन यह दावे शिक्षण स्तर 2023-24 में खोखले साबित हुए हैं। पहली से आठवीं तक विद्यार्थियों को नि:शुल्क गणेवश दी जानी थी , लेकिन इस शिक्षा सत्र की गणवेश अभी तक प्राप्त नहीं हुई और सत्र भी बीत चुका है। अब जिम्मेदार अधिकारी गणवेश की राशि सीधे बच्चों के खातों में डाले जाने की बात कर रहे हैं, लेकिन यह राशि कब तक डाली जाएगी यह अधिकारियों को भी नहीं पता।
जानकारी के मुताबिक पहली से लेकर आठवीं तक के कुल लगभग 1 लाख 41 हजार बच्चों को गणवेश दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन 2023-24 शिक्षा सत्र की गणवेश विद्यार्थियों को प्राप्त ही नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि यह शासन स्तर का निर्णय है। शासन से जब भी निर्देश आएंगे, उन निर्देशों का पालन किया जाएगा। साथ ही अधिकारियों ने गणवेश का बजट मिलने से भी इंकार करते बताया कि बजट लेप्स नहीं हुआ, बल्कि शासन के निर्देश के मुताबिक राशि खातों में ही डालने का निर्णय लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को नि:शुल्क गणवेश दिए जाने के लिए पहले स्कूलों के माध्यम से यूनिफार्म खरीदी जाती थी। इसके बाद कुछ बड़े व्यापारियों से अनुबंध करके कपड़े खरीदकर स्व सहायता समूहों से यूनिफार्म तैयार कराई जाती थी, लेकिन इस बार ना ही विद्यार्थियों के खाते में राशि डाली गई और ना ही समूहों से यूनिफार्म तैयार कराई गई। यही कारण है कि विद्यार्थियों को समय पर यूनिफार्म नहीं मिल पाई है। बताया जा रहा है कि विद्यार्थियों के खातों का सत्यापन किया जा रहा है, ताकि आसानी से सभी के खातों में राशि चली जाए। कई बार खाता संख्या गड़बड़ होने के कारण राशि नहीं पहुंच पाती है, इसलिए अभी खातों का सत्यापन किया जा रहा है। सम्भवना है कि अब अगले शिक्षण सत्र में ही बच्चों को गणवेश मिल पाएगी।
- Also Read : Today Betul Samachar : गवासेन रेंज कटाई कांड: जांच के लिए बनी टीम, 15 दिनों बाद जंगल पहुंची
इनका कहना….
गणवेश की राशि लेप्स नहीं हुई है। यह राशि बच्चों के बैंक खातों में डालने की कार्यवाही की जा रही है। राशि कब तक खातों में आएगी इसकी जानकारी नहीं है।
संजीव श्रीवास्तव, डीपीसी बैतूल।





