Betul Fraud News: जमीन फर्जीवाड़ा : आधी जमीन बेची, पटवारी ने पूरी खरीददार के नाम कर दी

Betul Fraud News: Land fraud: Half the land was sold, the patwari transferred the entire land to the buyer.

न्याय के लिए पांच वर्षों से जनसुनवाई के चक्कर काटकर घिस गई चप्पले

Betul Fraud News: बैतूल। जिले के मुलताई ब्लॉक में भूमि फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महतपुर ग्राम निवासी वृद्ध किसान दयाल रघुवंशी बीते पाँच वर्षों से अपनी जमीन वापस पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, मगर भ्रष्टाचार और लापरवाही के दलदल में उसकी फरियाद अब तक अनसुनी पड़ी है।

दयाल रघुवंशी ने बताया कि पटवारी हल्का नंबर 43 की खसरा संख्या में कुल 1.704 हेक्टेयर भूमि उनके परिवार के नाम दर्ज थी। 20 मई 2007 को उन्होंने वैधानिक रूप से अपनी आधी जमीन 0.852 हेक्टेयर, गांव के ही निवासी प्रताप सिंह पिता दौली को बेची थी। शेष आधी भूमि उनके पास ही रही। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मात्र डेढ़ महीने बाद, 7 जुलाई 2007 को तत्कालीन पटवारी ने रिकॉर्ड में हेराफेरी करते हुए पूरी 1.704 हेक्टेयर जमीन प्रताप सिंह के नाम दर्ज कर दी।

फर्जीवाड़े की पोल तब खुली जब वर्ष 2020 में किसी सरकारी परियोजना के तहत मुआवजे का प्रकरण उठा और रघुवंशी परिवार ने अपने जमीन के दस्तावेज निकलवाए। कागजात देखकर उनके होश उड़ गए, जहाँ आधी जमीन उनके नाम रहनी थी, वहाँ पूरी की पूरी जमीन खरीददार के नाम दर्ज दिखी। इसी के बाद से वृद्ध किसान न्याय की उम्मीद में जनसुनवाई से लेकर तहसील कार्यालय तक दर-दर भटक रहा है। पाँच साल से अधिक समय गुजर चुका है, पर न तो जांच पूरी हुई और न ही जमीन वापस मिली। कहते हैं, ‘जनसुनवाई में इतनी बार गया हूँ कि चप्पलें घिस गईं, पर सुनवाई कोई नहीं करता।Ó इस मामले की शिकायत फिर से मंगलवार को हुई जनसुनवाई में की गई।

वृद्ध किसान की व्यथा सुनकर जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया। दस्तावेजों की जांच करने के बाद सीईओ ने पाया कि मामला केवल लापरवाही का नहीं बल्कि राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट फर्जीवाड़े का प्रतीक है। उन्होंने मुलताई एसडीएम और नायब तहसीलदार को जमकर फटकार लगाई तथा तत्काल जांच कर जमीन मूल स्वामी के नाम बहाल करने के निर्देश दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार के कई मामलों में भ्रष्ट पटवारी और बाबू मिलकर किसानों की जमीन पर कागजी कब्जा करवा देते हैं, जबकि गरीब किसान सालों तक न्याय के लिए दर-दर भटकता रहता है।

शासन द्वारा पारदर्शिता और डिजिटलीकरण की तमाम योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि एक वृद्ध किसान की पुश्तैनी जमीन भी सुरक्षित नहीं रह पाई। अब देखना यह होगा कि सीईओ के निर्देशों के बाद क्या प्रशासनिक मशीनरी जागेगी या फिर दयाल रघुवंशी जैसे गरीब किसानों की आवाजें फिर से सरकारी फाईलो में दबकर रह जाएंगी। जनता उम्मीद कर रही है कि इस बार दोषी पटवारी पर सख्त कार्रवाई होगी और पीड़ित वृद्ध को आखिरकार न्याय मिलेगा।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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