Betul Today News: बड़ा सवाल: जय-जय कमलनाथ के नारे लगाने वाले नाथ के होंगे या अनाथ?
Betul Today News: Big question: Will those raising slogans of Jai-Jai Kamal Nath belong to Nath or orphans?

जिले में 80 प्रतिशत से अधिक कांग्रेसी कमलनाथ समर्थक, भाजपा में गए तो समर्थकों को लेकर संशय…
Betul Today News: (बैतूल))। पड़ोसी जिले छिंदवाड़ा में पिछले 45 सालों से राज कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भाजपा में जाने की अटकलों के बाद सियासी पारा जमकर गर्म है। यह तो तय है कि कांग्रेस के क्षत्रप माने जाने वाले कमलनाथ ओर उनके सांसद पुत्र जल्द ही भाजपा का दामन थाम लेंगे, लेकिन उन कांग्रेसियों का क्या होगा, जो आज तक कमलनाथ की छत्र-छाया में रहकर कांग्रेस का झंडा बुलंद करते आए हैं। जिले में चर्चा है कि क्या जय-जय कमलनाथ का नारा लगाने वाले नाथ के होंगे या फिर अनाथ? यहां अनाथ इसलिए कहा जा रहा है कि जिले के कांग्रेसी और उनकी राजनीति बरसों से कमलनाथ के इर्दगिर्द घूमती रही है। सवाल यह भी है कि क्या कमलनाथ के भाजपा में जाने के बाद जिले से कांग्रेस का नामोनिशान खत्म हो जाएगा।
पसोपेश की स्थिति में कमलनाथ समर्थक
जिले की कांग्रेसी राजनीति में कमलनाथ को छोड़कर किसी भी कांग्रेस के किसी बड़े नेता का वर्चस्व इतना दिखाई नहीं दिया। हालांकि कुछ समय दिग्विजय सिंह जरूर यदाकदा बैतूल की राजनीति में दखल देते थे, लेकिन जब से बैतूल संसदीय सीट नई परिसीमन में आई, तब से यहां कमलनाथ का वर्चस्व बरकरार है। देखा जा रहा है कि जब भी कमलनाथ बैतूल आए उनके स्वागत में जय-जय कमलनाथ के नारों से हमेशा उन्हें उपकृत किया जाता रहा है। जिले की पांचों विधानसभाओं कि राजनीति कमलनाथ के इर्दगिर्द ही घूमती नजर आई है, लेकिन अब जब कमलनाथ और उनके सांसद पुत्र के भाजपा में प्रवेश को लेकर अटकलों का दौर शुरू हुआ स्थानीय नेता भले ही इसे कोरी अफवाह बता रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर इनमे चिंता जरूर है, लेकिन यह चिंता अब इस स्थिति में पहुंच चुकी है कि ना निगलते बन रहा है और न उगलते।
जिले में पूरी कांग्रेस कमलनाथ समर्थक
जिले में कांग्रेस की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का खासा दखल रहा है। कमलनाथ समर्थकों की लंबी चौड़ी फेहरिस्त भी है, जिनमें सबसे प्रमुख मुलताई के पूर्व विधायक सुखदेव पांसे का है। इसके अलावा जिला कांग्रेस के शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा भी कमलनाथ के कट्टर समर्थकों में शामिल हैं। जो कोई भी कदम उठाने से पहले कमलनाथ की सलाह जरूर लेते दिखाई देते हैं। तीसरा नाम प्रदेश कांग्रेस सचिव समीर खान का है जो कमलनाथ के काफी करीबी माने जाते हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के ग्रामीण अध्यक्ष हेमन्त वागद्रे, घोड़ाडोंगरी के पूर्व विधायक ब्रम्हा भलावी, भैंसदेही पूर्व विधायक धरमू सिंह सिरसाम, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम, बैतूल नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष डॉ राजेन्द्र देशमुख, आमला नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष मनोज मालवे, भैंसदेही से विनय शंकर पाठक, धर्मेंद्र मालवीय, शाहपुर से पण्डित नरेंद्र मिश्रा, नवनीत मालवीय, अरुण गोठी समेत तमाम कांग्रेसी कमलनाथ के वरदहस्त पर ही जिले में कांग्रेस की राजनीति करते आए हैं।
कमलनाथ के साथ इन नेताओं ने भाजपा में जाने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। यह कहा जा रहा है कि कमलनाथ का भाजपा में प्रवेश मात्र कोरी अफवाह ही है, लेकिन कहीं ना कहीं अब यह कमलनाथ समर्थक अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित जरूर हो चुके हैं। हालांकि इस बात के संकेत जरूर पुख्ता हो रहे हैं कि कमलनात यदि भाजपा का दामन थामते हैं तो मुलताई के पूर्व विधायक सुखदेव पांसे, मनोज मालवे, सुनील शर्मा, पूर्व विधायक धरमू सिंह सहित कई नेताओं की यह मजबूरी बन जाएगी कि उन्हें भी भाजपा में जाना ही पड़ेगा, क्योंकि कमलनाथ को छोड़कर प्रदेश कांग्रेस में इन नेताओं का कोई दूसरा गॉड फादर नहीं है।
क्या पुराना रसूख रह पाएगा बरकरार?
वर्तमान में देश की राजनीति में आए भूचाल ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं और करीब दर्जन भर पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। अब कांग्रेस के कद्दावर नेता कमलनाथ भी इसकी तैयारी में हैं। राजनीति के जानकारों की माने तो भाजपा शुरू से ही एक ही विजन लेकर चल रही है कि देश को कांग्रेस मुक्त भारत बनाना है। काफी हद तक भाजपा इसमें सफल भी हुई है। वर्तमान में तो यह देखने मे आ रहा है की कांग्रेस में भगदड़ मच चुकी है, लेकिन भाजपा में यह ट्रेंड है कि दूसरी पार्टी से आये नेताओं को शुरुवाती दौर में उतनी तवज्जो नहीं दी जाती जितनी तवज्जों छोड़कर ये कांग्रेसी भाजपा का दामन थामेंगे। एक अकेले कमलनाथ को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस छोड़कर साथ भाजपा में जाने वाले नेताओं का पार्टी में वो रसूख कायम नहीं रह पाएगा जितना कि अभी कांग्रेस में कायम है। राजीनीति के जानकार बताते हैं कि यदि इन कांग्रेसियों को भाजपा में तवज्जों नहीं मिलती है। और भविष्य में ये नेता कांग्रेस में पुन: वापसी का विचार भी करते हैं तो इनकी वापसी के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे। वह इसलिए कि तब तक काफी देर हो चुकी होगी, क्योंकि जिस तरह से लगातार कांग्रेस का सूपड़ा साफ होते नजर आ रहा है। इन नेताओं की वापसी तक कांग्रेस बचेगी भी या नहीं इसकी गुंजाइश कम ही नजर आ रही है। साफ है कि जब कांग्रेस ही नहीं रहेगी तो आखिर यह नेता जाएंगे कहां?





