Betu Ki Taza Khabar: रिश्तों की बुनियाद पर साहस के 9 वर्ष पूरे

Betu Ki Taza Khabar: Completed 9 years of courage based on relationships

सुख-दुख का धर्म निभाते हुए सांझवीर ने सभी का ध्यान रखा, प्रयोगधर्मी अखबार भी बना….

▪️मोना

Betu Ki Taza Khabar:(बैतूल)। मैं अकेला ही चला था जानिब- ए- मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया… यह बात सांझवीर टाईम्स पर इसलिए सटीक बैठ रही है, क्योंकि प्रकाशन काल की शुरुआत में ऐसे ही हालात थे। विपरित परिस्थितियों में सांझवीर टाईम्स का सांध्याकालीन प्रकाशन शुरू हुआ था, तब से लेकर आज तक अकेले चलने के बाद ऐसा कारवां जुड़ा है कि पूरे जिले में खबरों से लेकर अखबार का हर पहलू खासमखास बन गया है। सोमवार यानी 12 फरवरी को अखबार सफलतम 10 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इन 9 वर्षों में सांझवीर टाईम्स जिस तरह लोगों का अखबार बन गया है, यही पूरी टीम की सबसे बड़ी उपलब्धि कहीं जा सकती है।

दैनिक अखबार का संचालन करना सभी चुनौतीपूर्ण मानते हैं, लेकिन शाम का अखबार निकालना कितना चुनौती पूर्ण है, यह बात किसी से नहीं छिपी है, लेकिन वर्ष 2015 में जब आज के ही दिन अखबार की शुरुआत की थी तब मन में कई तरह के विचार थे। सबसे पहला विचार यह था कि अखबार नहीं चला तो बीच में बंद करना था, लेकिन सारी चुनौतियां का सामना करते हुए आगे बढ़ते गए। कारवां इतना लंबा हो गया कि बैतूल से निकलकर सांझवीर टाईम्स ने न सिर्फ पूरे जिले बल्कि प्रदेश में भी एक अलग छाप छोड़ी है। इसका पूरा श्रेय बैतूल जिले के जिज्ञासू पाठकों को जाता है, जिन्होंने गलतियां होने पर आलोचना भी की और काम अच्छा होने पर पीठ भी थपथपाई। बस इसी से हौसला औफजाई होता रहा और अखबार 2 अंक यानी 10वें वर्ष में प्रवेश कर गया।

ऐसे निभाई रिश्तों की बुनियाद

सांझवीर के शुरुआत में हमने मंच से घोषणा की थी कि सांझवीर रिश्तों की बुनियाद निभाते हुए सभी के सुख-दुख का साथी बनेगा और बना भी। अब तक हजारों की संख्या में श्रद्धांजलि, पुण्यतिथि, उठावना के विज्ञापन नि:शुल्क लगाकर हम अपनी पीठ थपथपा सकते हैं, क्योंकि किसी के सुख में तो हर कोई साथ आता है, लेकिन हम हजारों लोगों के दुख में सहभागी बने। हमें खुशी इस बात की है कि वर्ष में एक बार आने वाले सभी के जन्मदिन को भी खास बनाने का भरसक प्रयास किया, इसमें हम सफल भी हुए। जिन लोगों की शुभकामनाएं लगी उनकी नाराजगी को भी सहर्ष स्वीकार किया। भले ही हमारी परीपाटी को दूसरों ने भी शुरू किया तो इसका श्रेय भी हम अपने आप को ही देंगे कि अन्य अखबार भी लोगों के सुख-दुख मेें सहभागी बनने लगे।

नवाचारों की कई शुरुआत

अखबार चलाना आसान है, लेकिन रिश्तों की बुनियाद करना कठिन। हमने अखबार की शुरुआत से कई नवाचारों की शुरुआत कर पाठकों को कभी एहसास नहीं होने दिया कि जब सांझवीर उनके हाथ में हो तो नहीं लगे कि यह स्थानीय अखबार है। प्रादेशिक अखबारों की तर्ज पर कई कॉलम की शुरुआत की, इसे जिज्ञासू पाठकों ने हाथों-हाथ लिया। बड़े मीडिया घराने की एग्जिट पोल की शुरुआत आदिवासी बाहुल्य जिले में करने के साथ परिणामों को करीब तक पहुंचाकर ऐसा नवाचार किया है, जिसकी बैतूल से निकलकर भोपाल और दिल्ली तक चर्चा हुई।

असहाय, गरीबों के लिए उठाई आवाज

गर्व के साथ लिख सकते हैं कि इन 9 वर्ष के अल्प समय में हम कई गरीब और असहाय के अलावा जरूरतमंदों की आवाज बने। टीम वर्क का ही नतीजा है कि खबरों में प्रशासनिक तंत्र की गलतियों को उजागर करने का बीड़ा उठाया। इसके बाद सीधे तौर पर गरीब-असहाय लोगों को उनका हक दिलाने के लिए सीधे तौर पर अधिकारियों से ऐसे लड़ बैठे जैसे खुद का काम हो। खुशी इस बात की है कि गरीबों के लिए अधिकारियों से लड़ने पर अपना नुकसान करने से भी पीछे नहीं हटे। यह सिलसिला अखबार के प्रकाशन काल से आज तक जारी है। यही वजह है कि जिन जरूरतमंदों की आवाज सांझवीर टाईम्स बना, उनकी दिल की दुआ का ही नतीजा है कि अखबार 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। ऐसे असंख्य लोगों की दुआओं के भी हम सदैव आभारी-ऋणी रहेंगे।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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