Betul Hindi Samachar: कालोनियां बनाने के लिए नियम-कायदे ताक पर, बैतूल में फायदें के लिए राजनैतिक दल के लिए लोग भी चोर-चोर, मौसेरे भाई बन बैठे

Betul Hindi Samachar: Rules and regulations are ignored to build colonies, people in Betul become thieves and cousins ​​for political party's benefit

Betul Hindi Samachar:(बैतूल)। बैतूल अजब है, गजब है, यह बात लोग देश नहीं विदेश में भी कहते रहते हैं। भले ही इसका कई अर्थ निकाला जाए। कोई बैतूल की खूबियों को लेकर अजब-गजब वाली बात मुंह पर लाता है तो कोई नियम-कायदों को ताक पर रखने के लिए इस शब्द का उपयोग करता है। यहां पर हम ऐसी बात कर रहे हैं जो लोगों भी हजम न हो पाए, लेकिन हकीकत है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में कॉलोनियां बनाने के लिए बैतूल में राजनैतिक दल के लोग भी चोर-चोर, मौसेरे भाई बन बैठे हैं। हालांकि सांझवीर टाईम्स इनके नाम प्रकाशित नहीं करा है, लेकिन कालोनियां बनाने के नाम गरीबों का निवाला छिनने वाले अलर्ट हो जाए, वरना उनके नाम सबूत के साथ प्रकाशित करने से गुरेज नहीं करेंगे।

दरअसल बैतूल शहर में पिछले कुछ वर्षां में जिस तरह कालोनाइजरों की संख्या में इजाफा हुआ है, इसमें कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पहले शहर के कुछ रईस प्रापर्टी के काम में उतरते थे, लेकिन अब राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों और जिम्मेदारों के भी इस व्यवसाय में कूदने से रंगत बदलते दिखाई दे रही है। पिछले तीन वर्षों में देखा जाए तो कही न कहीं कालोनाइजरों के साथ बैतूल के राजनैतिज्ञों का हस्तक्षेप बढ़ते जा रहा है। इसकी वजह आम लोगों की जमीन अब खतरे मेें दिखाई दे रही है। यह बात इसलिए कही जा रही, क्योंकि प्रशासनिक तंत्र नाम की चीज कालोनाइजरों के मामले में बैतूल में दिखाई नहीं दे रही है। भले ही कुछ दिनों पहले चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई, लेकिन यही सिलसिला रियल स्टेट कारोबार में चलता रहा तो बैतूल की राजनीति में इसका बड़ा असर और चौकाने वाले परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

अधिकारियों ने आंख बंदकर किए सारे काम

एक अपुष्ट, लेकिन जानकर सूत्र ने बताया कि बैतूल में पिछले 3-4 वर्षों में जिस तरह आधिकारियों ने आंख बंदकर राजनीतिज्ञों के दबाव में खेल खेला है, यह दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर कर रहा है। सूत्रों ने दावा किया है कि कुछ अधिकारियों ने अपने फायदें और राजनीति के दबाव के कारण ऐसे जमीन को भी कालोनाइजरों के हवाले कर दिया है, जो शासकीय रिकार्ड में दर्ज है। यानी शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी कर बड़े पैमाने पर पिछले चार वर्षों में जमीन इधर से उधर करने का खेल चलता रहा। सूत्र बताते हैं कि चूंकि इस पूरे मामले में राजनीति दलों के दबाव के कारण अधिकारियों ने ऐसी कलम चला दी, यदि इसका फंडाफोड़ हो तो कई नौकरी जाने के साथ बैतूल की राजनीति में भी भूचाल आने से इंकार नहीं किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि बैतूल से कुछ माह पहले विदा हुए तहसील के एक अधिकारी ने तो पिछले डेढ़ वर्षों में नियम-कायदे को ताक पर रखकर शासकीय जमीन को भी कालोनाइजरों के हवाल कर दिया है।

खतरें में गरीबों के अशियाने

जानकारी मिली है कि कुछ कालोनाइजरों ने नाले के किनारे की बेशकीमती जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाकर इसे हथियाने का दुस्साहस किया है। ताज्जुब की बात यह है कि बैतूल में कलेक्टर के अंडर में एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी आते हैं, लेकिन किसी ने नालों के किनारे बाउंड्रीवाल बनाकर वर्षों से पट्टेधारी गरीबों की झुग्गियां भी हथियाने का प्रयास भी शुरू किया है। सांझवीर टाईम्स को कालोनाइजरों के काले कारनामों की जानकारी मिलने के बाद प्रयास किया जाएगा कि ऐसे चेहरों को बेनकाब कर वास्तविकता को सामने लाया जाए, ताकि गरीबों से उनकी जमीन को न छिन सके। इसके अलावा शासकीय भूमि पर कब्जा कर कहीं बाउंड्रीवाल तो कहीं कालोनी बनाने वालों को भी बेनकाब करना हमारा लक्ष्य है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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