Betul Samachar: मुठ्ठी में कैद राजनेता ,आवासीय विद्यालयों में समिति की बैठक तक नहीं होती
Betul Samachar: Politicians in handcuffs, committee meetings are not even held in residential schools

करोड़ों का बजट ठिकाने लगाने में लगा जनजाति कार्य विभाग…
Betul Samachar:(बैतूल)। आदिवासी बाहुल्य जिले में जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत आवासीय विद्यालय शाहपुर ,चिचोली और भैंसदेही में भी करोड़ों रुपए का बजट ठिकाने लगाने में लगा है। इन आवासीय विद्यालयों में वर्ष 2023 ,2024 में विद्यालय स्तरीय समिति की भी बैठक नहीं हुई हैं। इन आवासीय विद्यालयों मे एसडीएम विद्यालय स्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं और प्राचार्य सचिव है। शासन के निर्देश है की प्राचार्य, सचिव को प्रतिमाह बैठक आयोजित करना है, बिना बैठक आयोजन के ही इन आवासीय विद्यालयों को संचालित करने वाले प्राचार्यों ने करोड़ों के बजट को ठिकाने लगा दिया । यहां मोदी की भ्रष्टाचार की गारंटी भी फेल हो गई है।जनजातीय कार्य विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एकलव्य आवासीय विद्यालय में जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष कलेक्टर है और जनजाति विभाग की प्रमुख सहायक आयुक्त सचिव है। शासन के निर्देश हैं की जिला स्तरीय समिति के सचिव को त्रैमासिक बैठक आयोजित करना ही है । परंतु वर्ष 2023,24 में कोई भी बैठक आयोजित नहीं की गई।
जनजाति कार्य विभाग ने प्राचार्यों के साथ मिलकर एकलव्य आवासीय विद्यालय शाहपुर ,चिचोली , भैंसदेही में करोड़ों के बजट को ठिकाने लगा दिए, लेकिन आज तक इन आवासीय विद्यालय में सामग्री खरीदी एवं छात्रावास कैसे संचालित हो रहे हैं। इस ओर जिला स्तरीय समिति ने कभी इन आवासीय विद्यालयों की ओर वर्ष 2023 ,24 में बैठक ही नहीं ली और किसी भी तरह बजट का कोई अनुमोदन ही नहीं किया गया। प्राचार्यों ने अपने मनमर्जी से नियमों को ताक पर रखकर आउटसोर्स और मेस संचालन का ठेका अपने पसंद के ठेकेदारों को दे दिया। वे यही नहीं रूके उन्होंने अपने पसंद के ठेकेदारों से स्थाई और अस्थाई सामग्री क्रय कर भ्रष्टाचार किया है, यह भी जांच का विषय है। इसी तरह कलेक्टर को चिचोली और भैंसदेही के आवासीय विद्यालयों की भी जल्द जांच करानी चाहिए।
सत्ता संगठन और संघ का हस्तक्षेप और कब्जा
एकलव्य आवासीय विद्यालयों में भाजपा से जुड़े सत्ता संगठन संघ के राजनेताओं की तूती बोलती है। यहां 15 -15 वर्षों से सरकारी महकमा अपनी ढपली अपना राग अलाप रहा है। यहां पदस्थ सरकारी अमले में कोई सत्ता से जुड़ा है तो कोई सत्तारूढ़ दल के संगठन का खास है। बताया जाता हैं की इन्ही की सिफारिश पर यहां प्राचार्य से लेकर अधीक्षक तक को पदस्थ किया जाता है। छात्रावास में अधीक्षक की पद स्थापना के लिए सांसद भी खूब सिफारिश करते हैं। वही संघ से जुड़े लोग भी सिफारिश करने में आगे हैं।





