Forest Department News: बैतूल के वन विभाग में रामराज्य, सीसीएफ की महीनों से नियुक्ति नहीं, मर्जी के मालिक डीएफओ, अधीनस्थों पर नियंत्रण नहीं होने से बिगड़े हालात

Forest Department News: Ramrajya in the Forest Department of Betul, CCF has not been appointed for months,

Forest Department News:(बैतूल)। बैतूल का सागौन पूरे एशिया में प्रसिद्धि पा चुका है। नेताओं से लेकर शीर्ष अफसरों को भी यहां के सागौन के फर्नीचर की खासी डिमांड है, लेकिन इस समय बैतूल में मुख्य वन संरक्षक का पद खाली होने का फायदा जंगलमाफिया उठा रहे हैं। कहने को तो जिले में तीन मंडलों में डीएफओ की नियुक्तियां उत्पादन और वन प्रशिक्षण में भी आईएफएस तैनात है, इसके बावजूद जंगल सुरक्षित नहीं है। ऊपर से डीएफओ मनमर्जी के मालिक बन बैठे हैं। सीसीएफ के नहीं होने के कारण उनका न तो आफिस आने का ठिकाना है और न ही जंगलों का भ्रमण करने का समय, इसलिए बैतूल के वन महकमे में रामराज्य जैसे हालात निर्मित हो गए हैं।

नर्मदापुरम-भोपाल संभाग के प्रमुख जिले बैतूल में वन संपदा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इसके बावजूद वन विभाग के प्रमुख अधिकारी बैतूल में स्थाई सीसीएफ की नियुक्ति नहीं कर पा रहे हैं। करीब 6 माह पहले सीसीएफ पीसी फुलझले को बैतूल से हटा दिया गया, इसके बाद से अब तक स्थाई सीसीएफ की नियुक्ति नहीं हो पाई है। हालात यह है कि राज्य शासन ने बैतूल से करीब डेढ़ सौ किमी दूर खंडवा के सीसीएफ को बैतूल का प्रभार सौंपा है। पड़ोसी जिले हरदा और नर्मदापुरम की दूरी क्रमश: 90-120 किमी है, लेकिन पास के जिलों की बजाए दूर के जिले के अधिकारियों को सीसीएफ का प्रभार सौंपना किसी के गले नहीं उतर रहा है। वे महीने-दो महीने में आकर औपचारिकता निभाकर लौट जा रहे हैं। इससे व्यवस्थाएं पूरी तरह से बेपटरी हो गई है।

डीएफओ मनमर्जी के मालिक(Forest Department News)

देखने में आ रहा है कि सीसीएफ की स्थाई नियुक्ति नहीं होने के कारण जिले के तीन वन मंडल दक्षिण सामान्य, पश्चिम सामान्य और उत्तर सामान्य में डीएफओ मर्जी के मालिक हो गए हैं। सांझवीर टाईम्स की पड़ताल में तथ्य उजागर हुए हैं कि पश्चिम और उत्तर सामान्य वन मंडल के डीएफओ केवल औपचारिकता निभाने के लिए ही कार्यालय पहुंच रहे हैं। यह सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि वन मंडलों के डीएफओ का आफिस आने का कोई ठिकाना ही नहीं रहता है। कई महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर के लिए उनके बंगलों पर जाना पड़ रहा है। केवल वन विभाग की वीसी और महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए डीएफओ अपने कार्यालय आ रहे हैं, इससे पूरी व्यवस्थाएं बेपटरी हो गई हैं।

जंगलों में माफिया सक्रिय, अधिकारियों को कोई सरोकार नहीं

सूत्र बताते हैं कि स्थाई सीसीएफ नहीं होने के कारण जिलों के तीनों वन मंडलों में माफियाओं की गैंग जबरदस्त सक्रिय हो गई है। खासकर महाराष्ट्र की सीमा से सटे जंगलों में इन दिनों माफियाराज चल रहा है। स्थानीय कर्मचारियों द्वारा गश्ती नहीं करने का फायदा जंगल माफिया उठा रहे हैं। यही वजह है कि जंगलों का बेजा सफाया होता जा रहा है। यदि बाहर की टीम आकर औचक निरीक्षण करें तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। खबर तो यह भी है कि माफियाओं द्वारा जंगल काटने की जानकारी डीएफओ को मोबाइल पर देने पर वे काल रीसिव नहीं करते हैं। यही वजह है कि माफियाओं में जंगल काटने में कोई भय नहीं दिख रहा है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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