Politics: राजनीतिक हलचल: किस माननीय के लिए सिरदर्द बनते जा रहा?? कौनसे नेताजी है,जिन्हें गुड़ से परहेज, गुलगुले से नहीं??? कार्यकारिणी घोषित होते ही किस नेता के दिल के अरमान आंसुओं में बह गए.???? विस्तार पढ़िये हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

माननीय के लिए सिरदर्द बने वसूली करने वाले
एक वरिष्ठ और आरक्षित विधानसभा के नेतृत्व करने वाले माननीय इन दिनों वसूलीकर्ता गैंग से खासे परेशान हो गए। इसी गैंग में उनके तथाकथित पीए, कांग्रेस से भाजपा में आए मनोज और कमलेश के नाम से सामने आ रहे हैं। यह गैंग पंचायतों से लेकर कई सरकारी दफ्तरों में ऐसी धमाचौकड़ी मचा रही है कि पार्टी के सोशल मीडिया ग्रुप पर इन्हें लेकर महत्वपूर्ण सूचना तक जारी करना पड़ा, लेकिन इस सूचना पर भी यह गैंग वसूली करने से पीछे नहीं हट रही।
माननीय का नाम लेकर सीधे धौंस देकर सरकारी दफ्तरों में वसूली करने से कार्यकर्ता भी नाराज है। चर्चा है कि इन मामलों को लेकर माननीय ने भी नाराजगी जताई, लेकिन कोई नतीजा सामने नहीं आया। यह जानकारी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक भी पहुंचने की पुख्ता खबर है। देखना यह है कि माननीय वसूली करने वाली गैंग पर रोक लगाते हैं या फिर यह सिलसिला चलते रहेगा।
इन्हें गुड़ से परहेज, गुलगुले से नहीं
विपक्षी दल के एक जिला प्रमुख को लेकर यह चर्चा जोरों पर है कि उन्हें गुड़ से परहेज है, लेकिन गुलगुले से नहीं। यह बात पिछले दिनों एक पर्व के मौके पर देखने को मिली। जब वे अपने समर्थकों के साथ इसी समुदाय से जुड़े नेताओं के यहां सेवई खाने पहुंचे तो उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट नहीं की, जबकि उन्हें करीब से जानने वाले बताते हैं कि वे मौके पर चौका लगाने वाले नेता है, लेकिन यहां की फोटो सार्वजनिक नहीं करने के पीछे उनकी मंशा क्या है, यह कोई समझ नहीं पा रहा है।
दिल के अरमां आंसुओं में बह गए
सत्तारूढ़ पार्टी के एक युवा नेता के अरमान आंसुओं में बह गए। दरअसल युवा संगठन ने हाल ही में प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की। उम्मीद थी कि उनका नाम समाज विशेष के अलावा वरिष्ठ नेताओं की गुडबुक में होने के कारण जरूर आएगा, लेकिन पिछले दिनों चर्चित प्रकरण का विवाद उनके लिए गले की हड्डी बन गया है।
चर्चा है कि उम्र फैक्टर में थोड़ा अधिक होने के कारण प्रदेश बॉडी में स्थान मिलने की प्रबल संभावना थी, लेकिन नउम्मीद लगी। वर्तमान में वे जिला प्रमुख के पद पर जरूर है, लेकिन उनकी दोबारा वापसी की संभावना दूसरे सशक्त दावेदारों के कारण कमजोर बताई जा रही है। वैसे भी संगठन में नया अध्यक्ष बनने के कारण रिपीट होना डेढ़ी खीर साबित हो रहा है। अब देखना यह है कि नेताजी की लाटरी लगती है या दूसरी जगह एडजेस्ट किया जाता है।
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