Ayodhya Car Sevak: संस्मरण- 1: कार सेवक पूरन साहू की कहानी, उनकी जुबानी: विवादित ढांचा गिरने के बाद मची थी अफरा- तफरी, अयोध्या से 25 किमी दूर फ़ैजाबाद कैसे आ गया, भगवान श्रीराम की कृपा से पता ही नहीं चला

Ayodhya Car Sevak: Memoir- 1: Story of car servant Puran Sahu, in his words: There was chaos after the collapse of the disputed structure,

Ayodhya Car Sevak: बात 19 नवंबर 1992 की है, जब राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के बैनर तले अयोध्या जाने का निर्णय लिया था तो मन में कई संकोच थे। परिवार वाले मना कर रहे थे, पर राम नाम की अगाध श्रद्धा ने सब की बात को दरकिनार कर दिया। चूंकि अयोध्या जाकर कार्यसेवा करने की तैयारी काफी पहले से की थी, इसलिए घर से एक बैग भरकर अपने साथियों के साथ 19 नवंबर 1992 को नेहरू युवा केंद्र पहुंच गए, उस समय मैं बजरंग दल के नगर संयोजक के पद पर था जब नेहरू युवा केंद्र में कार्यसेवा के लिए जाने वालों का तिलक लगाकर स्वागत किया जा रहा था तो मन में और जोश आ गया।(Ayodhya Car Sevak)

कार्यकर्ताओं का जत्था इसके बाद बैतूल स्टेशन आ गया और जैसे ही ट्रेन में बैठे बस अयोध्या पहुंचकर कारसेवा करने की जल्दी थी। दूसरे दिन 20 नवंबर को पूरी टीम के साथ अयोध्या पहुंच गए। सबसे पहले हमने पवित्र सरयु नदी में स्नान कर रामलला की पावन धरती पर उनके दर्शन करने के अलावा हनुमान गढ़ी में भी दर्शन लाभ लिया। दर्शन के बाद मन में राम जी के अगाध श्रद्धा का ज्वार कई गुणा बढ़ चुका था। रात्रि में विश्रामालय पहुंचे तो यहां की व्यवस्था देखकर मंत्रमुग्ध हो गया।(Ayodhya Car Sevak)

हमको रात्रि में लंगर के दौरान बताया गया कि कौन कितने देर विश्राम करेगा और किसे कौन सी व्यवस्था संभालना पड़ेगा। संयोगवश हमे अपनी मनपसंद भोजन की व्यवस्था में तैनात किया गया। करीब 6 दिन तक यह सेवा की। इसके बाद लगातार 5 दिसंबर तक सौंपे गए अन्य दायित्वों का निर्वहन किया। मुझे यह कहते हुए जरा भी गुरेज नहीं कि अयोध्या में कारसेवा करते हुए कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि घर से सैकड़ों किमी दूर है। यहां के लोगों और अन्य लोगों का इतना भावनात्मक रिश्ता बन गया कि जैसे सब एक दूसरे से परिचित है।(Ayodhya Car Sevak)

एक पखवाड़े की सेवा के बाद आखिर वह दिन आ गया जब 6 दिसंबर 1992 को विवादित गुंबज स्थल की ओर जाने का मौका मिला। इसकी शुरुआत सुबह मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती की सभा से हुई। हमने भी उनके उद्बोधन को ध्यान से सुना तो कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ गया। भाषण के बाद सभी कार्यकर्ताओं में इतना जोश बढ़ गया कि सुबह 11 बजे विवादित स्थल गुंबज की ओर बढऩे लगे। हम भी अपनी टीम के साथ हजारों की संख्या में एकत्रित हुए। कारसेवकों के साथ पहुंच गए। शाम 5 बजे तक विवादित ढाचा को कार्यकर्ताओं ने पूरा समतल कर दिया। इसके बाद विवादित ढाचे स्थल के पास पुलिस ने आश्रु गैस के गोले छोडक़र लाठी चार्ज शुरू कर दिया, इससे सारे कार्यकर्ता तितर-बितर हो गए।(Ayodhya Car Sevak)

आंखों से यह दृश्य देखकर लग रहा था कि पुलिस हमे भी निशाना बना सकते हैं, इसलिए साथियों के साथ भागते-भागते दूसरी ओर निकल गए। संयोग यह था कि हमारी टीम के सभी सदस्य लाठी चार्ज और आश्रु गैस के गोले छोडऩे के दौरान इधर-उधर नहीं हुए। नरेश जैन के पैर में चोट भी आई, लेकिन चोट अधिक न होने के कारण राहत मिली। सबसे बड़ी चौकाने वाली बात यह है कि अयोध्या में भारी भीड़ होने के बाद भी हम लोग अयोध्या से 25 किमी दूर फैजाबाद स्टेशन के लिए निकल पड़े।(Ayodhya Car Sevak)

रात के अंधेरे में रेल की पटरी और खेतों-खेत पौ फटते फैजाबाद कब आ गया पता ही नहीं चला किसी के पैर में भी 25 किमी पैदल चलने का दर्द नहीं था, लेकिन सभी के मन में ढांचे को ढहाने की खुशी हजारों गुणा अधिक थी। जब फैजाबाद स्टेशन पहुंचे तो यहां का माहौल देखकर और अधिक खुशी मिली, क्योंकि स्थानीय कारसेवकों ने नाश्ते और चाय की व्यवस्था कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद ट्रेन आने पर हम पूरी टीम के साथ 8 दिसंबर 1992 को सकुशल बैतूल वापस आ गए। अयोध्या में 15 दिन कि की गई कार सेवा के एक-एक दिन जेहन में याद है। 22 जनवरी को राम मंदिर में जब राम लला स्थापित होंगे तो पूर्व में लिया संकल्प पूरा हो जाएगा।(Ayodhya Car Sevak)

जय श्री राम!!!!!!

(जैसा कारसेवक पूरन साहू ने सांझवीर टाईम्स को बताया)

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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