Betul Samachar: बेटी का गला घोंटकर जलाया शव, 11 वर्ष बाद परिवार के 5 लोगों को उम्रकैद
Betul News: Daughter strangled and burnt, 5 family members sentenced to life imprisonment after 11 years

ऑनर किलिंग में गई थी 14 वर्षीय किशोरी की जान, पिता-दादी समेत परिवार के 5 लोगों को उम्रकैद
Betul Samachar: बैतूल। जिले के पाथाखेड़ा में ऑनर किलिंग मामले में बैतूल की एक अदालत ने 11 वर्ष बाद दोषी पिता समेत परिवार के 5 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला 1 जनवरी 2014 का बताया जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक कंचन कुशवाह (14) का शव उसके फूफा के घर के बाथरूम में जली हुई हालत में मिला था। दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। परिजन ने इसे आत्महत्या बताया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि उसकी हत्या गला दबाकर की गई थी। वह 9वीं की छात्रा थी। अदालत ने 11 वर्ष तक चले इस प्रकरण में छात्रा के पिता-दादी समेत परिवार के 6 लोगों को दोषी मानते हुए उम्रकैद का ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है।

लोक अभियोजक गोवर्धन मालवीय ने बताया कि प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ महजबीन खान के न्यायालय में सुनवाई चल रही थी। न्यायालय ने कंचन के पिता सुरेंद्र प्रसाद कुशवाह, दादी गीता कुशवाह, दीपक सिंह और उनकी पत्नी राधिका, ओमप्रकाश को दोषी ठहराया है। इन पर हत्या और साक्ष्य छिपाने के आरोप थे। न्यायालय ने इन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत आजीवन कारावास और धारा 201 के तहत सात साल कैद और जुर्माने की सजा सुनाई।
इस मामले में कोई चश्मदीद नहीं था। पुलिस ने पड़ोस के 70 लोगों के बयान दर्ज किए थे। इन बयानों से यह साबित हुआ कि घटना के दिन घर में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आया था। जांच के बाद कंचन के फूफा जोगेंद्र, उसके पिता सुरेंद्र समेत परिवार के अन्य सदस्यों को आरोपी बनाया गया था। कुल सात आरोपी थे। सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी जोगेंद्र की मौत हो गई। अनुराधा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

गला दबाने से हुई थी मौत
जांच अधिकारी सुरेंद्र नाथ यादव ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि कंचन की मौत गला दबाने से हुई थी। बाद में साक्ष्य छिपाने के लिए शव को जलाया गया। शुरुआती जांच में परिजनों ने इससे इनकार किया था। यह मामला लंबे समय तक चला और इसे देश के चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड जैसा पेचीदा माना गया। इस मामले में जांच अधिकारियों ने पड़ताल की, जिसमें बताया गया कि 27 दिसंबर 2013 को मृतिका अपनी सहेली बरखा के साथ खाता खुलवाने बैंक जाने की बात कहकर गई थी।
वहां से उसे पड़ोसी रवि द्वारा कहीं लेकर गया था। इन्हें कुछ लोगों ने देख लिया था, फिर किशोरी अपने घर आ गई। अचानक उसे घर के लोगों ने फूफा के घर भेज दिया और 1 जनवरी 2014 को उसका शव फूफा के घर संदिग्ध परिस्थितियों में जला मिला। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो किशोरी का शव बैठी हुई अवस्था में मिला। यहां से मिट्टी का तेल भी पुलिस ने बरामद कर जांच शुरू की थी। इसी वजह सभी की निगाहें इस मामले पर टिकी थी। न्यायालय ने जब फैसला सुनाया तो पूरी स्थिति स्पष्ट हो गई।

जांच अधिकारी के खिलाफ परिवार हाईकोर्ट तक पहुंचा
इस ऑनल किलिंग के मामले में पाथाखेड़ा चौकी के तात्कालीन प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव जांच अधिकारी थे। उन्होंने पूरे मामले का खुलासा किया और चालान भी पेश किया। इस मामले में यादव ने शुरू से ही किशोरी के परिजनों पर हत्या का संदेह जताया था। जब जांच की तो पूरे परिवार की संलिप्तता निकली।
यादव ने बताया कि दो दिन पहले किशोरी को परिजनों ने किसी युवक के साथ देखा था। इसके बाद उसे फूफा के घर भेज दिया था और यही पर ऑनर किलिंग को अंजाम दिया गया। उन्होंने बताया कि मां ने पुलिस को दिए बयान में हत्या करने की बात कबूली थी, लेकिन न्यायालय में बदल गई। इकसे बाद परिजनों ने उनके खिलाफ भी हाईकोर्ट में केस लगा दिया कि वे परिवार को बेवजह फसा रहे हैं, लेकिन न्यायालय में पेश किए गए सबूतों के बाद न्यायालय ने फैसला सुनाया है।




