Politics News: राजनीतिक हलचल: कौनसे माननीय एकला चलो की राह पर?? चुनाव में हार की किसने निकाली सार्वजनिक भड़ास??? कौनसे नेता जी को अब मातृ पार्टी में वापसी किआ आस….. पूरी खबर पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…….
Politics News: Political Stir: Which honorable Ekla Chalo is on the path??

Politics News: (बैतूल)। केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति के अस्तित्व में आने के बाद अब स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को इसके लिए तैयार किए जाने की कवायद शुरू कर दी गई है। जिले के प्रत्येक ब्लाकों में संचालित माध्यमिक वर्ग में पढ़ाने वाले शिक्षकों को 5 दिवसीय सेवा कालीन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बैतूल ब्लाक के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को सुभाष प्रायमरी स्कूल कोठी बाजार में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
तीन चरणों मे दी जा रही ट्रेनिंग(Politics News)
प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षकों के मुताबिक नई शिक्षा नीति के तहत शैक्षणिक कार्यों की गतिविधियां बदल दी गयी हैं। पाठ्यक्रमों मे भी परिवर्तन किया गया है। अभी तक बच्चों को जिस पाठ्यक्रम और जिस पैटर्न पर शैक्षणिक कार्य कराया जाता था जिसमे बदलाव होने के बाद अब शिक्षकों को नए सिरे से प्रशिक्षित किया जा रहा है। ताकि अगले सत्र में नई शिक्षा नीति के हिसाब से ही शिक्षण कार्य कराया जाए। 5 दिनों तक चलने वाले प्रशिक्षण कार्य तीन चरणों में सम्पन्न कराए जाने हैं। प्रत्येक चरण में 135, 135 शिक्षकों को शामिल किया जा रहा है। प्रशिक्षण के पश्चात सभी शिक्षक नई शिक्षा नीति के अनुसार ही बच्चों को अध्यापन कार्य करवाएंगे।
एकला चलो की राह पर एक माननीय(Politics News)
जीत हासिल करने के बाद से एक माननीय ने एकला चलो की राह पकड़ ली है। इसके पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सबसे पहले विजयी जुलूस में उनके नदारद रहने पर कई लोग सवाल पूछते रहे बाद में जिला मुख्यालय के कई कार्यक्रमों में भी उनकी दूरी बनाने से मामले में और चर्चाएं चलने लगी। हालांकि तर्क दिया गया है कि अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त है, लेकिन राजनीति में अलग चलने की राह से चर्चाएं शुरू होना लाजमी है। अब भला उनके ही क्षेत्र में एक जन प्रतिनिधि को महत्वपूर्ण पद की कुर्सी मिली तो वहां के जश्न में भी शामिल नहीं हो सके, इसलिए माननीय के अलग चलने के राजनीति में कारण तलाशे जा रहे हैं।
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चुनाव में हार पर निकाली भड़ास(Politics News)
बीते चुनाव में विपक्षी पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। ऐसे में पराजित प्रत्याशियों की नाराजगी सामान्य बात है। पिछले दिनों राजधानी में पराजित प्रत्याशियों की बैठक आहूत की गई थी। इस बैठक में जिले के कई पार्टी प्रमुख और पदाधिकारी पहुंचे। बस एक पराजित प्रत्याशी को जैसे ही अपनी हार के लिए बोलने का मौका मिला। उन्होंने भड़ास निकालना शुरू कर दिया। उन्होंने शीर्ष पदाधिकारियों के बीच लाइन से भीतरघात करने वालों पर तीखे तीर चलाना शुरू किया। उनके प्रत्यक्ष रूप से आरोप लगते ही बैठक में सन्नाटा पसर गया। हालांकि जिन पर आरोप लग रहे थे। उन्होंने भी मजबूती से अपना पक्ष रखकर पाक-साफ होने का सबूत दे दिया। अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई हुई यह तो स्पष्ट नहीं हो पाया, लेकिन प्रत्याशी की भड़ास को लेकर राजधानी की चर्चा बैतूल तक पहुंच गई।
घर वापसी का फिर इंतजार(Politics News)
बीते चुनाव में कई नेताओं ने पार्टी से पाला बदल लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार दूसरी पार्टी की आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उनकी हालत घर के ना घाट के वाली हो गई है। जिस पार्टी में शामिल हुए, उसमें पहले ही एक अनार सौ बीमार की हालत है। ऐसे में वे यहां एडजस्ट नहीं हो पा रहे है। अब वे दोबारा मूल पार्टी में जाने का रास्ता तलाश रहे है। एक अनारक्षित विधानसभा से पूर्व विधायक के परिजन भी दूसरी पार्टी में शामिल हुए थे, अब उनका यहां मन नहीं लग रहा है। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले पूर्व विधायक के विपक्षी पार्टी में शामिल हुए परिजन मूल पार्टी में आने के लिए पुराने ख्याति कार्यकर्ताओं से संपर्क साधे हुए है। देखना यह है कि उन्हें सफलता मिलती है या वनवास भुगतना पड़ता है।





