Betul Political Column : बैतूल पॉलिटिकल कॉलम: हार से दुखी किस नेता ने पद त्यागा? कौन घर के रहे न घाट के, अब भगवान की शरण मे क्यों?? विभीषणों की फैज आखिर अचानक सक्रिय क्यों हुई??? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम पॉलिटिकल कॉलम में…..

Betul Political Column: Betul Political Column: Which leader resigned from his post saddened by the defeat? Who remains at home or from the ghat, why now take refuge in God?? Why did Vibhishan's phase become active suddenly??? Read our popular columns in Political Column...

Betul Political Column : चुनाव में हार-जीत तो लगी रहती है, लेकिन कांग्रेस के एक नेता ने एक संघ का अध्यक्ष का पद ही छोड़ डाला। उन्हें मलाल था कि ना सिर्फ अपने गांव बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों में कांग्रेस को बढ़त नहीं दिला पाए। एक गांव के मुखिया होने के अलावा वे अपने संघ के जिलाध्यक्ष थे। चुनाव परिणाम आने के कुछ दिनों बाद उन्होंने अपने प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिख डाला और पद से मुक्त करने का आग्रह भी किया। भले ही उन्होंने पत्र में पद छोड़ने का कारण नहीं लिखा है, लेकिन कहा जा रहा है कि नेताजी कांग्रेस प्रत्याशी के हार के बाद से ही अवसाद में चले गए। महज 8 माह पहले ही उनकी जिलाध्यक्ष के पद पर नियुक्ति हुई थी, लेकिन उन्होंने हार की वजह से यह पद त्यागकर दूसरे कांग्रेसियों के लिए मिसाल जरूर पेश कर दी। नेताजी के इस रूख की ना सिर्फ कांग्रेसी बल्कि भाजपाई भी प्रशंसा कर रहे है।

घर के रहे ना घाट, अब नए घर की तलाश

विधानसभा चुनाव में पराजित होने के बाद कांग्रेस अब तक हार के कारणों को तलाश नहीं कर पाई। इस बीच एक पार्टी के नेता भी बागी होकर चुनाव मैदान में कूद पड़े। वे पहले दावा कर रहे थे कि उनकी जीत तय है, लेकिन परिणाम आए तो 5 अंकों में भी नहीं पहुंच पाए। उनसे कई अधिक एक संगठन ने पैठ जमाते हुए वोट ले डाले। हार के बाद यह प्रत्याशी फिलहाल भगवान की शरण में पहुंचकर आगे की रणनीति बनाने में लगे हुए है। उन्हें उम्मीद है कि या तो उनकी घर वापसी होगी या पुरानी पार्टी का सहारा मिल जाएगा। उसी पार्टी ने एक महत्वपूर्ण चुनाव में प्रत्याशी बना दिया था, किंतु ऐनवक्त पर पड़ोसी जिले के एक नेता को टिकट से नवाजा गया। एक विशेष जाति से संबंध रखने वाले यह नेता युवा है, लेकिन उन्हें भी बागी होकर चुनाव लड़ने का अब पश्चताप हो रहा है, अन्यथा लोकसभा चुनाव की टिकट भी मिल सकती थी।

विभिषणों की फौज अचानक हुई सक्रिय

सोशल मीडिया पर जैसे कि संभावना थी, हो भी ठीक वैसा ही रहा है। चुनाव में दोनों ही पार्टी के लिए विभिषण की भूमिका निभाने वाले अब बिलों से बाहर निकल आए है। जीते हुए नेताओं के यहां इन विभिषणों की संख्या अन्य लोगों की अपेक्षा कही ज्यादा दिखाई दे रही है। कुछ विभिषण तो ऐसे है, जो दुहाई दे रहे कि उनके क्षेत्र से अधिक वोट दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। जैसे ही दूसरे नेताओं ने चुनाव में दोनों तरफ से आर्थिक सहयोग लेने की चिमटी वाली बात उनके चेहरों की हवाईयां ही उड़ने लगी है। ऐसे नेताओं की सभी दूर जग हंसाई हो रही है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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