Betul Ki Khabar: लाखों रुपयों के फव्वारे और नाव गायब, अपनी दुर्दशा पर रो रहा अभिनंदन सरोवर

Betul Ki Khabar: Fountains and boats worth lakhs of rupees missing, Abhinandan Sarovar crying over its plight

फेंसिंग करने में लाखों खर्च, लोग नहीं कर पाए सैर सपाटा

Betul Ki Khabar: बैतूल। नगर पालिका द्वारा विकास के नाम पर जनता के पैसों की बर्बादी के कई उदाहरण सामने आते रहे हैं। नपा द्वारा अभी तक कि गई लाखों रुपयों की बर्बादी के नायाब नमूनों में दूसरा उदाहरण अभिनंदन सरोवर का है, जो अपनी बदहाली और उपेक्षा की कहानी खुद बयां कर रहा है। लोगों को सुविधा देने और सरोवर की सुंदरता बढाने का बखान तो खूब किया गया। बकायदा इसका भव्य शुभारम्भ भी हुआ, लेकिन देखरेख के अभाव में जनता की कमाई सरोवर के ही पानी में डूब कर रह गई। अब मौके पर केवल इसके अवशेष ही बाकी रह गए हैं।

कागजों और उद्घाटन तक सीमित होकर रह गई सुविधाएं

करीब पांच साल पहले इस सरोवर की सुंदरता बढ़ाने और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए गए थे। सरोवर के बीच में आकर्षक फव्वारा लगाया गया था, ताकि शाम होते ही रंग-बिरंगी रोशनी और पानी की धाराएं लोगों का मन मोह लें। इसके अलावा नगरवासियों को नॉका विहार का आनंद दिलाने के लिए नावें भी खरीदी गईं। यह तय किया गया था कि पांच रुपए प्रति व्यक्ति नॉका विहार के लिए नपा वसूली करेगी। नाव संचालन के लिए बकायदा लोहे का बड़ा प्लेटफार्म भी तैयार किया गया, लेकिन यह सब महज कागजों और उद्घाटन के मौकों तक ही सीमित होकर रह गया।

नावें कभी चली नहीं, फव्वारे कभी चले नहीं और अब तो हाल यह है कि नावों से लेकर प्लेटफार्म तक मौके से पूरी तरह गायब हैं। फव्वारा कब तक चला और किसने इसका रखरखाव किया, इसका कोई हिसाब किसी के पास नहीं है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद जनता को न तो मनोरंजन की सुविधा मिली और न ही सरोवर का स्वरूप निखर पाया। आज की स्थिति यह है कि सरोवर चारों ओर से झाड़ियों से घिरा हुआ है।

फेंसिंग तो बना दी गई, लेकिन लोगो के घूमने फिरने के लिए पाथवे तक नहीं बनाया गया जिससे लोग आराम से टहल सकें। न तो यहां कोई पर्यटक आता है और न ही स्थानीय लोग आकर्षित होते हैं। नपा की लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का नतीजा यह है कि अभिनंदन सरोवर विकास के बजाय उपेक्षा का प्रतीक बन कर रह गया है।

पूछती है जनता क्या जनप्रतिनिधियों के दबाव में हो रही बर्बादी

यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जनता के टैक्स से वसूले गए लाखों रुपये की इस बर्बादी की जिम्मेदारी किसकी है। क्या जनप्रतिनिधियों के दबाव में अधिकारियों ने यह काम कराया या फिर यह सब कमीशनखोरी का खेल था? हर बार विकास के नाम पर बजट खर्च करना और बाद में उसकी दुर्दशा होने देना, कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की ओर ही इशारा करता है।

जनता अब जागरूक हो रही है और सवाल पूछ रही है कि आखिर उनके खून-पसीने की कमाई से जमा किए गए टैक्स का इस्तेमाल इस तरह बर्बाद क्यों किया जाता है। जरूरत है कि नागरिक ऐसे मामलों में सजग होकर जवाब मांगें और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग करें। वरना ऐसे फव्वारे, नाव और परियोजनाएं महज कमीशनखोरी का शिकार होकर जनता के पैसों की बर्बादी बनती रहेंगी।

इनका कहना….

तालाब में फव्वारों को लेकर अधीनस्थ अधिकारियों से जानकारी लेंगे। यदि सम्भव हो सका तो इन्हें पुन: शुरू करने के प्रयास किये जायेंगे।

सतीश मटसेनिया, सीएमओ नपा बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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