Betul News : इस बार ‘लालबत्ती’ से अछूता नहीं रहेगा बैतूल जिला
Betul News: This time Betul district will not remain untouched by 'Red Light'

नए सीएम मोहन यादव से निकटता का फायदा मिलना तय, हेमंत कल ले सकते है मंत्री के रूप में शपथ!
Betul News : (बैतूल)। भाजपा की सरकार में जिले के साथ भेदभाव जैसी स्थिति इस बार खत्म होने वाली है। दअरसल प्रदेश को एबीव्हीपी से जुडक़र राजनीति में प्रवेश कर संघ की पसंद का मुख्यमंत्री मिला गया है। संयोगवश नए मुख्यमंत्री मोहन यादव का जिले के भाजपा नेताओं के साथ जबरदस्त तालमेल है। बस यही वजह है कि इस बार मंत्रिमंडल में जिले का सूखा खत्म होने वाला है। खबर है कि कल नए मुख्यमंत्री मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल में शपथ ग्रहण करेंगे तो बैतूल से दूसरी बार के विधायक और कई जिम्मेदारी संभालने वाले हेमंत खंडेलवाल को भी शपथ दिलाई जाएगी। इसकी संभावना सबसे अधिक बलवती है। हेमन्त के अलावा आदिवासी सीट भैंसदेही से चौथी बार जीत हासिल करने वाले महेंद्र सिंह चौहान, मुलताई से तीसरी बार जीते चंद्रशेखर देशमुख और आमला से दूसरी बार विजयी हुए डॉ योगेश पंडाग्रे का नाम भी चर्चा में हैं।
प्रदेश में भले अधिकांश समय कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन जिले से जीत हासिल करने के बाद यहां के विधायकों को मंत्रिमंडल में स्थान देना कोई भी मुख्यमंत्री नहीं भुला। यह सिलसिला रामजी महाजन से शुरू होकर सुखदेव पांसे पर खत्म हुआ है। कांग्रेस में मंत्री बनाए जाने का सिलसिला पहले भी जारी रहा औऱ डॉ अशोक साबले और प्रताप सिंह उइके जैसे जमीनी नेताओं को भी मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया। मतलब कांग्रेस की जब- जब सरकार आई जिले को लाल बत्ती से अछूता नहीं किया गया। वर्ष 2018 में 15 माह की सरकार में भी मुलताई विधायक रहे सुखदेव पांसे को कैबिनेट मंत्री से उपकृत किया गया। इसके विपरीत भाजपा की सरकार वर्ष 2020 में आई तब भी बैतूल की अनदेखी हुई। इसके पहले 2013 में भाजपा के 5 विधायक जीत हासिल करने के बाद भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई। पहले भी यह सिलसिला जारी था।
अब खत्म होगा सूखा
प्रदेश में चूंकि नया मुख्यमंत्री चुना जा चुका है। ऐसे में इस बार जिले से मंत्रिमंडल का सूखा पूरी तरह खत्म होने के आसार दिख रहे है। चूंकि नए मुख्यमंत्री संघ से जुड़े है और यहां भी कई विधायक संघ के काफी करीबी है। इसी वजह 5 में से कम से कम 1 विधायक को मंत्री बनाकर भाजपा पड़ोसी जिले छिंदवाड़ा और हरदा में पार्टी के 1 भी विधायक की जीत न होने पर भुनाने का भरसक प्रयास करेगी। इसके बाद मुख्यमंत्री का जिले के भाजपा नेताओं से पहले से बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित होना कहीं न कहीं मंत्रिमंडल में जिले का सूखा खत्म होने की ओर इशारा कर रहा है। यदि यह सूखा खत्म होता है तो सुंदरलाल पटवा के मुख्यमंत्री रहते हुए घोड़ाडोंगरी से जीत हासिल करने पर संसदीय सचिव बनाए गए रामजीलाल उइके के बाद किसी विधायक को वर्षों बाद मौका मिलेगा।
हेमन्त का नाम लगभग तय, पंडाग्रे- चौहान का नाम भी चर्चा में
राजधानी भोपाल से छनकर आ रही खबर पर यकीन करें तो बैतूल से दूसरी बार जीत हासिल करने वाले हेमंत खंडेलवाल का मंत्री बनना लगभग तय हो चुका है। उन्हें संघ के अलावा नए मुख्यमंत्री की पसन्द भी बताया जा रहा है। वे जिले सेसत्ता और संगठन दोनों की पसन्द एकलौते विधायक हैं। पार्टी उन पर जबरदस्त भरोसा करते आई है, इसलिए उनकी राह काफी आसान है। हेमन्त के अलावा महेंद्र सिंह चौहान और डॉ योगेश पंडाग्रे को एसटी- एससी कोटे से जगह मिल सकती है। महेंद्र सिंह चौथी बार विधायक चुने गए है तो उनका दावा भी मजबूत माना जा सकता है। डॉ पंडाग्रे के पक्ष में युवा औऱ अनुभवी होना फायदेमंद हो सकता है। मुलताई से तीसरी बार विधायक बने चंद्रशेखर पिछड़ा वर्ग कोटे से मंत्री बनने के दावेदार कहे जा रहे हैं।




