Betul Ki Khabar: कांग्रेस की राजनीति में हरिराम, कबरबिज्जू और कनखजूरों का बोलबाला!

Betul Ki Khabar: Hariram, the mongoose and the centipedes dominate Congress politics!

वरिष्ठ नेताओं के लिए रहस्य बनी इन प्रजातियों की कारगुजारी, जमकर हो रही चर्चा

Betul Ki Khabar: बैतूल (सत्येंद्र सिंह परिहार)। जिले में कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रहे दो गुटों के बीच खींचतान में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा तीन विशेष प्रजातियों की हो रही है। पहला हरिराम,दूसरा कबरबिज्जू और तीसरा कनखजूरा। हालात यह हो गए हैं कि इन तीनों का नाम सुनते ही दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की पेशानियों पर बल पड़ रहे हैं, क्योंकि इनकी सक्रियता और रणनीति दोनों गुटों में गहरी पैठ बना चुकी है।

बताया जा रहा है कि यह तीनों प्रजातियां जिलाध्यक्ष के चुनावी माहौल में अपनी-अपनी भूमिका पूरी निष्ठा और चालाकी के साथ निभा रहे हैं। हरिराम का मुख्य काम है कि एक गुट से गोपनीय सूचनाएं लेकर दूसरे गुट तक पहुंचाना। वह बिना किसी शोर-शराबे के दोनों पक्षों से दोस्ती निभा रहा है, लेकिन असली फायदा अपनी सूचना-प्रेषण क्षमता से उठा रहा है। दूसरी ओर कबरबिज्जू कि खासियत यह है कि वह खोद-खोदकर जानकारी निकाल रहा है।

बैठक के एजेंडे से लेकर नेताओं के निजी रुझानों तक यह प्रजाति हर बात को जानने में माहिर मानी जा रही है। वहीं कनखजूरा सूचनाओं को चुपके से सही समय पर, सही कानों तक पहुंचाने में उस्तादी निभा रहा है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलने तक की संभावना बन रही हैं, जो नेताओं के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। सूत्र बताते हैं कि राजनीति के इस खेल में जहां नेता किले पर कब्जा जमाने की कोशिश में हैं, वहीं यह तीनों प्रजातियां अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता समीकरणों को प्रभावित करने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं।

दोनों गुटों में इनकी मौजूदगी का असर इतना है कि किसी भी बैठक या रणनीतिक चर्चा करने के दौरान नेताओं को पहले यह चिंता रहती है कि कहीं इनमें से कोई सुन तो नहीं रहा या सुन भी रहा है तो कहीं गोपनीयता भंग तो नहीं हो जाएगी। सूत्र बताते हैं कि यह प्रजातियां दोनों गुटों में बराबरी से मौजूद हैं और खुलेआम रणनीति पर नजर गड़ाए हुए हैं। कार्यकर्ताओं की बैठकों में ये ऐसे शामिल होते हैं जैसे पार्टी के सच्चे सिपाही हो, लेकिन भीतर ही भीतर यह आंकलन करते रहते हैं कि कौन-सी जानकारी दूसरे गुट के लिए संजीवनी बन सकती है।

वरिष्ठ नेताओं को इनकी कारगुजारियों का अहसास तब हुआ जब कई अहम और गोपनीय जानकारियां लीक होकर प्रतिद्वंदी गुट तक पहुंच गईं। नतीजतन बैठकों में हुई चर्चाएं और फैसले लीक होने से न केवल रणनीतियां प्रभावित हुईं, बल्कि नेताओं में अविश्वास का माहौल भी पनपने लगा। दिक्कत यह है कि इन हरिरामों, कबरबिज्जुओं और कनखजूरों को पहचाना कैसे जाए। गुट में शामिल हर कार्यकर्ता पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा और भावनात्मक प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करता है, जिससे शक करना भी मुश्किल हो रहा है।

यह लोग इतनी सहजता से गुट के कामकाज में घुलमिल जाते हैं कि इनकी पहचान किसी भी नेतृत्व के लिए सिरदर्द साबित हो रही है। मजे की बात यह है कि इनकी कार्यप्रणाली अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है और भविष्य में यह दोनों गुटों के लिए बड़े नुकसान का कारण भी बन सकती है,लेकिन जब तक इनकी पहचान नहीं होती, तब तक कांग्रेस की स्थानीय राजनीति में इनकी भूमिका एक रहस्य बनी रहेगी।

नेताओं के लिए यह आत्मचिंतन का विषय है कि गोपनीय सूचना-लीक होने से रोकने और अंदरूनी माहौल को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाएं। फिलहाल बैतूल की कांग्रेस राजनीति में हरिराम, कबरबिज्जू और कनखजूरा यह तीनों नाम रणनीतिक चर्चाओं से लेकर चाय की गपशप तक हर जगह सुर्खियों में हैं और दोनों गुटों के लिए एक समान चिंता का विषय बने हुए हैं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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