Betul Politics: आमला विधानसभा में कांग्रेस-भाजपा के लिए गैंम चेंजर साबित होगी गोंगपा!

Betul Politics: Gongpa will prove to be a game changer for Congress-BJP in Amla Assembly!

क्या गोंगपा के वोट बैंक में सेंध लगा पाएगी कांग्रेस? या भाजपा को मिलेगा लाड़ली बहनों का साथ

Betul Politics: (बैतूल)। वर्ष 2018 का चुनाव पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे के करीबी मनोज मालवे और डॉक्टरी का पेशा एक तरफ रख चुनाव लड़ने के इच्छुक डॉ.योगेश पंडाग्रे ने एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस दौरान यह माना जा रहा था कि आमला विधानसभा में स्थानीय का मुद्दा काम कर जाएगा, लेकिन मनोज के कुछ नेगेटिव नेचर ने इस मुद्दें को धराशाही किया और डॉ. योगेश पंडाग्रे ने मनोज को लगभग 19 हजार मतों से कड़ी शिकस्त दी डाली। अब विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा उम्मीदवार डॉ. योगेश पंडाग्रे और कांग्रेस उम्मीदवार मनोज मालवे के बीच एक बार फिर कड़ी टक्कर की बताई जा रही है।

मतदान के बाद से ही चुनाव परिणाम को लेकर कयासो का दौर जारी है। भाजपा और कांग्रेस के समर्थक दोनों ही अपनी पार्टी की जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि इस चुनाव में आदिवासी और महिला मतदाता निर्णायक स्थिति में दिखाई दे रहे हैं क्योंकि भाजपा को लाड़ली बहना से जहां काफी उम्मीदें हैं तो वहीं कांग्रेस पिछले चुनावों में किसानों की कर्ज माफी सहित नारी सम्मान योजना से आस लगाए हुए है। मौजूदा हालातों के मुताबिक जीत की हैट्रिक लगा चुकी भाजपा को इस विधानसभा चुनाव में लंबे समय बाद कांग्रेस से तगड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते यह तय है कि इस बार जीत हार का अंतर कम होगा

क्या गोंगपा का पिछला अंतर कम कर पाएगी कांग्रेस

लगातार तीन चुनाव बड़े अंतर से हार चुकी कांग्रेस को इस चुनाव में आदिवासि क्षेत्रों में भरपूर समर्थन की उम्मीद है। गोंगपा प्रत्याशी को पिछले चुनाव में 15 हजार से ज्यादा मत मिले थे। अब कांग्रेस को यह वोट अपने पक्ष में शिफ्ट होने का भरोसा है। इसके अलावा कांग्रेस प्रत्येक पोलिंग पर वोट बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठी है, लेकिन क्या कांग्रेस की यह उम्मीदें रंग ला पाएंगी? इसका पता 3 दिसम्बर को होने वाली मतगणना के बाद ही चल पाएगा।

40 हजार लाड़ली बहनों का रुझान किस तरफ

विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर दिखाई दे रही है। ऐसी स्थिति में महिला वोटर की निर्णायक भूमिका हो सकती है। भाजपा जहां लाड़ली बहना योजना के तहत बहनों को प्रति माह आर्थिक रूप से उपकृत कर रही है तो वहीं कांग्रेस ने नारी सम्मान योजना के तहत महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह दिए जाने का वादा किया है। आर्थिक लाभ देना और, दिए जाने के बीच भाजपा महिला मतदाता से भरपूर समर्थन की उम्मीद लगाए बैठी है। केंद्र की भाजपा सरकार के लाभार्थियों का वोट भी भाजपा अपने पक्ष में मान कर चल रही है। वर्तमान में विधानसभा में करीब 40 हजार लाड़ली बहना इस योजना का लाभ ले रही है। 17 नवम्बर को विधानसभा की करीब 82 हजार महिलाओं ने मतदान किया है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भी इस योजना का खासा असर देखने को मिला है, लेकिन इसके परिणाम क्या होंगे, यह ठीक एक सप्ताह बाद एक्सपोज हो जाएंगे।

क्या पिछले चुनाव की तरह बढ़ सकता है गोंगपा का वोट प्रतिशत

पिछले चुनाव में आमला सारणी विधान सभा मे गोंगपा के प्रदर्शन ने आदिवासी वोट में अच्छी खासी सेंध लगाई थी। इस चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी फिर चुनाव मैदान में है, लेकिन इस बार गोंगपा कितने वोट हासिल करेंगी। यह तो चुनाव परिणाम के दिन ही स्पष्ट होगा, लेकिन इस पार्टी को मिलने वाला वोट चुनाव परिणाम पर असर जरूर डालेगा। गौरतलब है कि वर्ष 2018 के चुनाव में पहली बार आदिवासी मतदाताओं के समर्थन से 15 हजार से ज्यादा वोट लेकर गोंडवाना ने सभी को चौंका दिया था।

20 साल पहले त्रिकोणीय संघर्ष में जीती थी कांग्रेस

प्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस के दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। इस चुनाव में कांग्रेस ने तत्कालनीन जिप अध्यक्ष सुनीता बेले को आमला से उम्मीदवार बनाया था। तब त्रिकोणीय संघर्ष में श्रीमती बेले लगभग 300 वोटो से सपा के संजय सातनकर को पराजित कर विधायकी हासिल की थी। भाजपा इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रही थी, लेकिन अगले चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन आश्चर्य जनक दिखाई दिया। 2008 और 2013 के चुनाव में भाजपा के चैतराम मानेकर ने पहली बार 29 हजार और दूसरी बार 39 हजार के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी को पराजित कर विधानसभा मे भाजपा की धमक कायम कर दी थी।इसके ठीक विपरित वर्ष 2018 के चुनाव में चैतराम की टिकिट कट गई, लेकिन कांग्रेस के मनोज मालवे हार का अंतर बीस हजार कम करने में कामयाब रहे। भाजपा के डॉक्टर योगेश पंडाग्रे ने कांग्रेस के मनोज मालवे को करीब 19 हजार वोटों से पराजित किया था। जो भी है, लेकिन विधानसभा में राजनीतिक हलचल चरम पर है। 3 दिसम्बर को होने वाली मतगणना के बाद ही इन हलचलों पर विराम लग जायेगा।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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