बैतूल पॉलिटिकल कॉलम : मुलताई से आखिर कौन होगा बागी?? कांग्रेस को आखिर क्यों है भाजपा उम्मीदवार की घोषणा का इंतजार??? जयस को किसका मिला सहारा?? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में….
Betul Political Column: Who will be the rebel from Multai?? Why is the Congress waiting for the announcement of the BJP candidate??? Whose support did Jayas get?? Read our famous column in political movement.

▪️ Prkash Sahu Betul
Betul Political Column : (बैतूल)। कांग्रेस ने भाजपा की अपेक्षा अभी तक टिकट घोषित न कर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन अंदरखाने की खबर है कि प्रदेश की 230 विधानसभाओं में से कुछ को छोड़कर अधिकांश पर उम्मीदवार तय कर लिए हैं। जिस तरह दो दिन पहले भैंसदेही के कांग्रेसी प्रतिनिधि मंडल को इशारे ही इशारे में वर्तमान विधायक धरमू सिंह की टिकट फाइनल होने की बात कह दी थी। इसी तरह घोड़ाडोंगरी के वर्तमान विधायक बह्मा भलावी का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस के अब तक सर्वे में भले ही बह्मा का नाम काफी पीछे था, लेकिन रिपोर्ट कार्ड की अपेक्षा कांग्रेस यहां भी भला मानुष की सहानूभूति के सहारे सीटिंग एमएल पर ही दाव खेलेगी। यदि कांग्रेस की पहली सूची में बह्मा का नाम आ जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं कही जा सकती।
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस से जिले की सबसे बड़ी घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान में तीन गंभीर दावेदारों के नाम सामने आए हैं। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा कराए गए दो से तीन सर्वे में वर्तमान विधायक बह्मा भलावी, घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत अध्यक्ष राहुल उइके, जिला मुख्यालय के प्रमुख चिकित्सक रमेश काकोड़िया का नाम प्रमुख है। उनके अलावा पूर्व मंत्री प्रताप सिंह उइके और एक जिला पंचायत सदस्य का नाम सामने आया है, लेकिन कांग्रेस सूत्रों की मुताबिक पहले के तीन नामों से किसी एक को उम्मीदवार बनाया जाना तय था।
सूत्रों की मुताबिक सूची में वैसे राहुल उइके और डॉक्टर रमेश काकोड़िया का नाम वजनदारी से सामने आया था। सर्वे में बह्मा भलावी अब तक तीसरे नंबर पर चलने की जानकारी सामने आई। पिछले दिनों डॉ. काकोड़िया ने लाव- लश्कर के साथ कमलनाथ से भोपाल में अपनी टिकट की दावेदारी की है। उन्होंने क्षेत्र के जिला पंचायत और जनपद सदस्यों के अलावा सरपंचों को लेकर शक्ति प्रदर्शन किया। राहुल उइके पूर्व में अपनी गंभीर दावेदारी जता चुके हैं, लेकिन बह्मा ने न तो भोपाल जाकर किसी से मुलाकात की और न ही अपने किसी समर्थकों को दावेदारी जताने के लिए भोपाल भेजा। बस यही उनके लिए प्लस पाइंट साबित हो रहा है।
विधायक की छवि पाक-साफ, समर्थकों ने बिगाड़ा खेल
सूत्र बताते हैं कि पांच वर्ष तक घोड़ाडोंगरी के विधायक जनहित समेत जनता से जुड़े मुद्दों पर सबसे सक्रिय रहने वाले विधायकों में से एक है। जानकार बताते हैं कि भाजपा के दिवंगत विधायक सज्जन सिंह उइके जैसी दबंग छवि दिखाते हुए बह्मा ने भी रेत माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोलने में कसर नहीं छोड़ी। जनहित के मुद्दों पर उन्होंने कांग्रेस के शासन काल के पंद्रह माह में भी सरकार के नुमाइंदों को घेरने में पीछे नहीं हटे।
धरना प्रदर्शन में भी उनकी सहभागिता घोड़ाडोंगरी, शाहपुर और चिचोली क्षेत्र में देखी गई है। इतना जरूर है कि उनके पांच वर्ष के कार्यकाल में कुछ समर्थकों ने मलाई खाई और बदनाम कांग्रेस के सीधे-साधे विधायक को होना पड़ा। यही उनकी गले की हड्डी बन गया है। कहा जा रहा है कि बह्मा ने कभी अपने फायदें के लिए कोई प्रयास नहीं किया। इतना जरूर है कि क्षेत्र के कांग्रेसियों के कुछ कारनामें भोपाल तक पहुंच गए। इससे विधायक की छवि खराब हुई है।
भाजपा पर खरीदने के लगाए आरोप, यही बनेगा टिकट का कारण

कांग्रेस के अपुष्ट सूत्र बताते हैं कि बह्मा भलावी की छवि भी साफ-सुथरी है। पूरे पांच वर्ष उन पर कोई दाग नहीं लगा। वर्ष 2018 में सरकार के गठन के समय बह्मा को भाजपा द्वारा प्रलोभन भी दिए जाने की बात सामने आई। इस बात का वे खुद बार-बार उल्लेख करते रहते हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने बैतूल में भी भाजपा द्वारा पचास करोड़ में खरीदने की बात दोहरा कर सनसनी फैला दी। सूत्र बताते हैं कि यदि कांग्रेस उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाती है तो आदिवासी समाज का अपमान और अन्य मुद्दें कांग्रेस को भारी पड़ सकते हैं। खुद भलावी टिकट कटने पर अपने आपने आप को असहज महसूस कर खरीदे जाने का मुद्दा भी उठा सकते हैं।
मुलताई से कौन होगा बागी?
भाजपा ने मुलताई विधानसभा से तीन माह पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर टिकट के अन्य दावेदारों को विद्रोह करने का मौका दे डाला है। पूर्व की तरह यदि टिकट घोषित होती तो शायद इतना अवसर नहीं मिला, लेकिन यहां पर एक अनार सौ बीमार होने के कारण अन्य दावेदार पार्टी की गाइड लाइन से बाहर जा रहे हैं। 1-2 दावेदार तो ऐसे हैं जो अपने समर्थकों के माध्यम से सोशल मीडिया पर खुलआम बगावत के मूड में दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा प्रत्याशी पर पिछले चुनाव में फूल छाप कांग्रेसियों ने होने का आरोप लगाकर तरह-तरह की टिप्पणी की जा रही है। दो दिन पहले ही सीएम ऐसे कार्यकर्ताओं को नसीहत देकर गए, लेकिन उनके कानों पर जू नहीं रेंग रही। खबर है कि इन दो में से एक दावेदार बागी होकर ताल ठोगने की तैयारी कर रहा है। अब वह खुद मैदान में उतरता है या जनप्रतिनिधि पत्नी पर दाव खेलता है, इसके लिए इंतजार करना होगा।
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कांग्रेस को भाजपा उम्मीदवार का इंतजार
राजनीतिज्ञ हल्के में इस समय सबसे चर्चित एक विधानसभा में भाजपा का उम्मीदवार घोषित होने को लेकर कांग्रेस बेताब है। भले ही उनकी पार्टी का उम्मीदवार तय नहीं हुआ, लेकिन कांग्रेस रणनीति के तहत उम्मीदवार होने का इंतजार कर रही है। शहर में चल रही चर्चाओं पर यकीन करें तो भाजपा समर्थित कुछ नेता उम्मीदवार तय होते ही कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। इसके लिए तैयारियां पूरी होने के साथ स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है। करीब चार से पांच युवा भाजपा नेता कांग्रेस का दामन थामकर पिछले दिनों पार्टी को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए प्लान बी बना चुके हैं। यदि उनकी उम्मीद के अुनसार उम्मीदवार घोषित होता है तो प्लान बी तय माना जा रहा है, इसको लेकर जोर-शोर से चर्चा चल रही है।
जयस का किससे ताल-मेल?
जिले की राजनीति में भाजपा कांग्रेस के इस समय जय आदिवासी संगठन(जयस) का नाम सभी की जुबान पर है। वर्षों से आप कार्यकर्ता संगठन को मजबूत करने मेें लगे हैं, लेकिन उन्हें इतनी सफलता नहीं मिली जितनी जयस ने कम समय में अर्जित की है। दो जिला पंचायत सदस्यों की जीत के बाद संगठन में नई जान आ गई है। यही वजह है कि जयस के पदाधिकारी उत्साह से पांचों विधानसभा में उम्मीदवार खड़ा करने की रणनीति बना रहे हैं। उनकी इस रणनीति में पर्दे के पीछे कौन खड़ा है, इसकी चर्चा जमकर हो रही है।
कहा तो यह भी जा रहा है कि एक राजनैतिक पार्टी के बड़े पदाधिकारी और जयस में अच्छा तालमेल है। इसी तालमेल के भरोसे पांचों विधानसभा में उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाई जा रही है। इस रणनीति से जयस को फायदा दूसरी पार्टी के प्रमुख नेता अपनी ही पार्टी का नुकसान कराने पर आमदा है। इसकी चर्चा भी जिलेभर में जोर शोर से हो रही है।




