Betul Samachar : बालिका की दस्तयाबी न होने पर भड़के आदिवासी, शाहपुर थाने का घेराव

Betul Samachar: Tribals enraged over non-availability of girl's handwritten documents, siege of Shahpur police station

पुलिस को सुराग देने के बावजूद गंभीरता नहीं दिखाने पर मचा हंगामा, अधिकारियों के फूले हाथ-पैर

Betul Samachar : (बैतूल)। आदिवासी बालिका के गुम होने की सूचना और सुराग देने के बावजूद शाहपुर पुलिस लापरवाही बरतती रही। हद तो तब हो गई कि गुम बालिका जहां मौजूद थी, उसकी जानकारी परिजनों ने पुलिस को दी इसके बाद भी पुलिस ने सक्रियता नहीं बरती, जिसके बाद आदिवासी संगठन, मांझी सरकार का गुस्सा भड़क उठा।

सोमवार लगभग दो सैकड़ा से अधिक मांझी सैनिकों के साथ आदिवासियों ने शाहपुर थाने का घेराव कर डाला और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संगठन ने बालिका को तुरंत दस्तयाब करने की मांग की। पुलिस के अधिकारी आदिवासी संगठन के पदाधिकारियों को समझाते रहे पर वे नहीं माने और पुलिस थाने के सामने नारेबाजी करने लगे।

यह है पूरा मामला (Betul Samachar)

जानकारी के अनुसार ग्राम देशावाड़ी में रहने वाली एक महिला ने 23 जुलाई को शाहपुर थाने में अपनी बालिका की गुमशुदगी की शिकायत शाहपुर थाने में दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया था कि 20 जुलाई को बालिका अचानक घर से लापता हो गई। दो-तीन दिन तक लगातार रिश्तेदारी में खोज की जाती रही, लेकिन पता न लगने की स्थिति में गांव के चार लोगों को साथ लेकर थाने में गुमशदगी की शिकायत दर्ज कराई गई। उसके बाद पुलिस कर्मियों द्वारा 6-7 दिन बाद बालिका का पता बताया कि तुम्हारी बालिका, ग्राम गोहर-गंज जिला रायसेन में हैं।

बालिका का सुराग लगने के बावजूद पुलिस बालिका को दस्तयाब करने के बजाय लापरवाही बरतती रही और कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसी बीच परिजनों को जानकारी मिली कि बालिका को सोनू कहार नामक युवक ले कर गया है और उसे गोहर गंज में रखा है। इस सूचना के बावजूद पुलिस के कान खड़े नहीं हो पाए, जिसके बाद आदिवासी समाज में पुलिस के इस लापरवाह रवैये को लेकर आक्रोश उत्पन्न हो गया और गुस्साएं आदिवासियों और माझी सरकार ने थाने का घेराव कर डाला।

अधिकारी से माफी मंगवाने पर अड़ी माझी सरकार(
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आदिवासी बालिका की गुमशुदगी को लेकर मांझी सरकार और आदिवासी समुदाय में काफी गुस्सा नजर आया। बालिका की मां का आरोप है कि गुम हुई बालिका को दस्तयाब किए जाने को लेकर शाहपुर के ही एक पुलिस अधिकारी से बार बार मिन्नतें की जाती रही, लेकिन हर बार पुलिस टरकाती रही। यही नहीं परेशानी के चलते जब पुलिस पर दबाव बनाया गया तो हमारे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और कार्यवाही किए जाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई, जिसके बाद इसकी जानकारी शांति निवारण समिति और मांझी सरकार को दी।

सोमवार सैकड़ों की संख्या में आदिवासियों ने थाने का घेराव किया। आदिवासियों ने बालिका की तत्काल दस्तयाबी के साथ साथ अभद्रता करने वाले पुलिस कर्मियों से माफी मांगे जाने की मांग की है। खबर लिखे जाने तक आदिवासियों का प्रदर्शन चल रहा था।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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