Betul Samachar : लोक संस्कृति को सहेज रहे जिले के लोक कलाकार, आदिवासी संस्कृति से युवाओं को जोडऩे का चला रहे अभियान
Betul Samachar: Folk artists of the district are saving the folk culture, campaigning to connect youth with tribal culture


Betul Samachar : (बैतूल)। समृद्ध आदिम संस्कृति, प्राकृतिक खूबसूरती, विविधताओं से भरी बोली-भाषा, लोकनृत्य, साहित्य और शिल्पकला बैतूल जिले को पूरे प्रदेश में एक अलग पहचान देती है। इन्हें पीढ़ी-दर पीढ़ी जीवंत बनाए रखना, देश-दुनिया से इनका परिचय करवाने के उद्देश्य से जिले के राजेश सरियाम, बसंत कवड़े, महेश इंगले जैसे लोक कलाकार संस्कृतियों को सहेजने का काम कर रहे है जिससे आदिवासी युवा अपने कल्चर को सहेज कर रख सकेंगे।
वहीं कोरकू संगठन उन्नतिशील समाज जनजातीय संस्कृतियों को एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक हस्तांतरण करना, देश-दुनिया को इनका परिचय करने के उद्देश्य से युवा पीढ़ी को स्थानीय बोली-भाषा का महत्व समझा रहे हैं। बैतूल जिले के राजेश सरियाम अपनी आदिवासी संस्कृति को सहेजने के लिए शिद्दत के साथ जुटे हैं। यही नहीं आदिवासी समाज की महिलाओं और युवतियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से वे खास तौर पर अभियान चला रहे हैं। अमूमन युवा शिक्षित होने और आधुनिकता से जुडऩे के बाद अपनी संस्कृति को बिसरा देते हैं, राजेश अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करने में जुटे हैं।
स्कूलों में दी जा रही लोक कला की जानकारी

लोक कला से जुड़े लोक कलाकार महेश इंगले द्वारा बैतूल जिले की लोककला जिसमें लोकनृत्य ठाठीया, थापटी, धाधल, सार नृत्य, डडार, तथा भित्ती चित्र गांदोनी जो कि मिट्टी के रंगों से बनाए जाते हैं के बारे में स्कूलों में पहुंचकर जानकारियां दी जा रही है। उल्लेखनीय की विगत दिनों शा.कन्या उ.मा. विद्यालय बैतूल गंज बैतूल में 22 जुलाई शनिवार को प्राचार्य इंदू बचले के मार्गदर्शन में बाल सभा का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य छात्राओं में प्रदर्शन कला के माध्यम से संगीत, नृत्य और लोककला से परिचय करना था। इस अवसर पर लोक कलाकार महेश इंगले द्वारा छात्राओं को जिले की लोक संस्कृति से अवगत कराया गया था।
लोक कलाकार बसंत कवड़े ने बढ़ाया आदिवासी अंचल बैतूल का मान

साहित्य उत्सव में आदिवासी अंचल कहलाने वाले बैतूल का नाम खासा चर्चा में रहा। बैतूल जिले के लोक कलाकार बसंत कवडे ने इस साहित्य उत्सव में गोंडी भाषा में कविता पाठ करके आदिवासी अंचल बैतूल को गौरवान्वित किया। बसंत कवडे ने बैतूल की परंपरा को अंतर राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने गोंडी बोली भाषा शानदार तरीके से साहित्य उत्सव के मंच पर पेश की। उल्लेखनीय है कि विगत 30 वर्षों से बसंत कवड़े आकाशवाणी दूरदर्शन पर गोंडी लोक संगीत का कार्यक्रम देते आ रहे है। कवड़े समूचे मध्यप्रदेश में पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने गोंडी लोक संगीत को दूरदर्शन पर पहुंचाने का प्रयास किया।
आदिवासी समाज में परिवर्तन लाने की डगर में चल पड़े जामवंत

वर्तमान परिस्थिति में देखा जाए तो आदिवासी समाज में परिवर्तन की लहर है। अपने हक अधिकार की समझ भी इस समाज में धीरे धीरे आने लगी है। यह सब जयस प्रदेश संयोजक जामवंत सिंह कुमरे जैसे सेवाभावी युवाओं के प्रयास से ही संभव हो पाया है। आदिवासी समाज के लिए समर्पित जामवंत जैसे युवाओं ने आज जिले में आदिवासी समाज की एक अलग पहचान बना दी है। बता दिया है कि आदिवासी गुलाम नही अपने आप में एक सभ्यतावादी समाज है। हाल ही में आदिवासी सैनानियों और महापुरुषों के सम्मान में गांव गांव में अभियान चलाया जा रहा है।
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इस अभियान ने यह तो साबित कर दिया है कि आदिवासी समाज में वीरों की कमी नहीं है। जिले के इतिहास में आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जामवंत का कहना है कि आदिवासियों का उद्गम उनकी पहचान को पुष्ट करता है तो उनकी विरासत, भाषा, शिक्षा, संस्कृति और जीवनशैली की पहचान को ज़िंदा रखती है। इसकी रक्षा किए बिना उसकी अस्मिता की रक्षा नहीं हो सकती है। आदिवासियों ने अपनी संस्कृति, भाषा, अपने जीने की सामूहिक शैली, परंपराओं और रीति-रिवाजों की विरासत को जिंदा रखा है।




