Betul Satpuda Jalasay: सतपुड़ा जलाशय से 95 प्रतिशत नष्ट हुई चाइनीज झालर, पांच सदस्यी वैज्ञानिकों के दल ने किया निरीक्षण
Betul Satpuda Jalasay: 95 percent destroyed Chinese skirting from Satpuda reservoir, a five-member team of scientists inspected

Betul Satpuda Jalasay: (सारनी)। सतपुड़ा जलाशय सारनी से 11 महीने में 95 प्रतिशत चाइनीज झालर (सलविनिया मोलेस्टा) नष्ट हो गई। अब जलशाय में दूर दूर तक सिर्फ और सिर्फ पानी नजर आ रहा है। इससे सतपुड़ा डेम का सौंदर्य भी निखर आया है। एक समय था जब सभी मान बैठे थे की अब सतपुड़ा जलाशय अपना अस्तित्व खोने की स्थिति में पहुंच गया है। इसी बीच पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने चाइनीज झालर नष्ट करने बायोलाजिकल ट्रीटमेंट करने का प्लान बनाया और खरपतवार अनुसंधान निदेशालय जबलपुर के वैज्ञानिक डॉक्टर सुशील कुमार से संपर्क किया।
डॉक्टर कुमार की देखरेख में सितंबर 2022 में चाइनीज झालर को नष्ट करने वाले कीट अलग अलग चरणों में छोड़े गए। इन कीटों ने चाइनीज झालर की ग्रोथ रोकी और अब पूरी तरह जलाशय से खरपतवार नष्ट होनी की स्थिति में आ गई। इसी का जायजा लेने खरपतवार अनुसंधान निदेशालय जबलपुर के पांच सदस्यीय वैज्ञानिकों का दल सारणी पहुंचा है। जिसमें डॉक्टर सुशील कुमार, डॉक्टर दीपक पवार, डॉक्टर मोगिली रामहिया और अनुराग मिश्र समेत एक अन्य सदस्य शामिल है। डॉ सुशील कुमार ने कहा सतपुड़ा जलाशय से चाइनीस झालर नष्ट होते ही जलकुंभी तेजी से फैल रही है।
इसके अलावा भी चार पांच प्रकार के खरपतवार जलाशय में देखी गई है। ज्यादातर खरपतवार विदेशी है। किसी भी प्रकार की खरपतवार जलाशय के लिए ठीक नहीं है। सतपुड़ा डैम में चाइनीस झालर का निरीक्षण करने आए वैज्ञानिकों के दल के साथ पावर प्लांट सारणी के अधिकारी कर्मचारी भी मौजूद रहे। वैज्ञानिकों के दल को सतपुड़ा डैम के अलग-अलग हिस्सों में जहां चाइनीस झालर कुछ मात्रा में मौजूद है। वहां का निरीक्षण वन्य जीव संरक्षण के लिए काम करने वाले समाजसेवी आदिल खान द्वारा कराया गया।




