Prashasanik Kona: प्रशासनिक कोना: निलंबित होने के बाद ठाकुर साहब को क्यों जीना पड़ रहा गुमनामी की जिंदगी?? नपा के किस साहब के डर से भाग रहे ठेकेदार??? राजस्व वाले साहब की आरएसएस वाली जुगलबंदी के क्या मायने???? पढ़िए हमारे कॉलम प्रशासनिक कोना में विस्तार से…..
Prashasanik Kona: Administrative Corner: Why does Thakur Saheb have

निलंबित हो के बाद गुमनामी की जिंदगी में ठाकुर साहब
निलंबित होने से लेकर बहाल होने तक वर्दी वाले ठाकुर साहब का सफर गुमनामी वाला है। हालत यह है कि महकमे में भी कोई खोज-खबर लेने वाला मौजूद नहीं है। कहा जाता है कि उज्जैन वाले ठाकुर साहब जब पॉवर में थे, तब दो पैग के बाद दावा करते थे कि प्रदेश की सत्ता के मुखिया उनके कॉलेज के समय के मित्र है, लेकिन एक मामले में निलंबित होने के बाद उनके हमप्याला के भी मुगालते दूर हो गए। चर्चा है कि अब ठाकुर साहब जहां है, शाम की गणना में भी नहीं जा रहे, फिर क्या कर रहे? कोई कह रहा है कि ठाकुर साहब सरकारी क्वार्टर में आराम फरमाते है और केवल शाम की महफिल में जा रहे है। कुछ चर्चा यह है कि मढ़ई वाले रिसोर्टनुमा फार्म हाऊस पर आते-जाते रहते तो कोई कहता है कि घोड़ाडोंगरी की ओर तफरीफ के लिए निकल जा रहे। मतलब यह है कि ठाकुर साहब को बिना काम के वेतन और फुल इंजॉय का मौका मिल रहा है।
नपा वाले साहब के डर से भाग रहे ठेकेदार
इन दिनों एक नपा के युवा अधिकारी को देखकर ठेकेदार भागते फिर रहे है। कई तो उनके नंबर उठाना बंद कर दिया है। कहा जा रहा है कि चतुर्भुज की प्रक्रिया से गुजर चुके है। अब उनकी इसी माह के अंत में शहनाई बजने वाली है। ऐसे में यह युवा अधिकारी संबंधित नपा में कम और अपने घर के अलावा कुछ होटलों में ठेकेदारों से अधिक मिल रहे हैं। हालांकि अपने विवाह को हाई प्रोफाइल बनाने के लिए वह ठेकेदारों से इतनी बड़ी डिमांड कर रहे है कि काम बंद होने के कारण ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए है, लेकिन साहब अपने अधीनस्थों के माध्यम से डोरे डालने का प्रयास कर रहे है।
साहब ने मोबाइल ना उठाने वाले ठेकेदारों को हिदायत दे डाली है कि उनकी डिमांड पूरी नहीं हुई तो भविष्य में फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। इससे बेचारे ठेकेदार परेशान है और साहब डिमांड पूरी करने के लिए इधर-उधर का सहारा ले रहे है। इसके अलावा साहब का एक और निर्देश उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है। दरअसल, इस युवा और मुर्गे के शौकीन अधिकारी ने पड़ोसी जिले में होने वाले अपने विवाह में ना सिर्फ शामिल होने बल्कि बड़ा गिफ्ट लाने के लिए भी फरमान जारी किया गया है। बताते चले कि साहब ने अपनी पाईल्स की बीमारी का इलाज भी ठेकेदारों से चंदा करने के बाद कराया है।
राजस्व वाले साहब की जुगलबंदी
पिछले दिनों राजस्व से जुड़े कुछ अधिकारियों के बड़े साहब ने तबादले कर दिए थे, लेकिन एक प्रमुख जगह के साहब को कॉलोनाइजरों की गैंग ने अच्छा काम करने के बावजूद लूप-लाइन में भेज दिया। यहां पूर्व में पदस्थ साहब को बुलाया गया, लेकिन अब तक ना तो वर्तमान और ना पूर्व में पदस्थ साहब ने आमद दी है। फिलहाल तबादले के बाद भी साहब उसी जगह मौजूद है। चर्चा हो रही है कि साहब ने संघ का कौन सा जुगाड़ लगाया कि उनकी रिलीविंग नहीं हो रही। जनप्रतिनिधि और बड़े साहब भी उनके इस जुगाड़ के आगे नत्मस्तक है।




