Betul News: आचार संहिता में चल रही थी तेंदूपत्ता संग्राहकों की बैठक
Betul News: The meeting of tendu leaf collectors was going on under the code of conduct.

कांग्रेसियों को भनक लगी तो पहुंचे ट्रेनिंग सेंटर, नाराजगी जताई तो आनन-फानन में खत्म कर दी बैठक
Betul News: बैतूल। इस समय पूरे देश में लोकसभा चुनाव के कारण आदर्श आचार संहिता लागू है। शासकीय बैठक भी इस दौरान नहीं ली जा सकती, लेकिन वन विभाग ने नियमों को दरकिनार करते हुए यहां के ट्रेनिंग सेंटर में पूरे जिले के सैकड़ों तेंदूपत्ता संग्राहकों की बैठक अपने मैदानी अमले के साथ कर डाली। भोपाल से आए एक प्रमुख वन संरक्षक के अलावा बैतूल के सीसीएफ और डीएफओ भी इस बैठक में मौजूद रहे। नियम के विरूद्ध बैठक रखे जाने की जानकारी कांग्रेस को जैसे ही लगी वे ट्रेनिंग सेंटर जा पहुंचे।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत वागद्रे के नेतृत्व में पहुंचे कांग्रेसियों ने अधिकारियों से बैठक को लेकर सवाल किया तो वे बगले झांकने लगे। मामला बढ़ता देख वन विभाग के जिम्मेदारों ने अचानक बैठक रद्द कर दी। मामले में कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के आब्जर्वर और कलेक्टर को भी शिकायत की है, इससे पूरा मामला गरमा गया है।
जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह 11 बजे कालापाठा स्थित वन विद्यालय परिसर के ट्रेनिंग सेंटर में पूरे जिले के तेंदूपत्ता संग्राहकों की बैठक आहूत की गई थी। इस बैठक में संग्राहकों को लाने की जिम्मेदारी रेंजर, डिप्टी रेंजर से लेकर वनपाल को जिम्मेदारी दी गई। इधर वन विभाग के अधिकारी तर्क दे रहे हैं कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की बैठक नहीं थी। केवल अधिकारी और कर्मचारियों को तेंदूपत्ता तुड़ाई के पूर्व भोपाल के अधिकारियों के आने के बाद बैठक में बुलाया गया था।
सूत्रों ने बताया कि जिले के दूरस्थ अंचलों में निवास करने वाले तेंदूपत्ता संग्राहकों को कई वाहनों से लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुबह 10 बजे से ही ट्रेनिंग सेंटर में तेंदूपत्ता संग्राहकों की आवाजाही शुरू हो गई थी। बड़ी संख्या में वाहनों से बैतूल लाया गया था। इस बैठक में बैतूल सीसीएफ पीएन मिश्रा, उत्तर वन मंडल के डीएफओ देवाशु शेखर, दक्षिण वन मंडल के विजयानंत टीआर, पश्चिम वन मंडल के डीएफओ अरूण यादव समेत सभी एसडीओ और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

कांग्रेस पदाधिकारी पहुंचे तो बैठक खत्म
भले ही वन विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि तेंदूपत्ता की तुड़ाई मौसम को देखते हुए शुरू होने वाली है, इसलिए यह बैठक भोपाल के वरिष्ठ अधिकारी के मार्गदर्शन में आहूत की गई थी। जब वन विभाग के जिम्मेदार यह तर्क दे रहे हैं, फिर जिला कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत वागद्रे, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री समीर खान, पूर्व नपा अध्यक्ष धीरू शर्मा, कांग्रेस नेता राजा सोनी, सरफराज खान सहित अन्य कांग्रेसी सूचना मिलते ही ट्रेनिंग सेंटर जा पहुंचे, जैसे ही उन्होंने ट्रेनिंग सेंटर में प्रवेश किया और अधिकारियों से तेंदूपत्ता संग्राहकों की बैठक के संबंध में अधिकारियों से अनुमति संबंधी जानकारी मांगी तो सामने बैठे आधा दर्जन अधिकारी एक दूसरे का चेहरा ताकने लगे।
यदि उनके पास अनुमति रहती तो तत्काल कांग्रेस की आपत्ति का निराकरण हो जाता, लेकिन कांग्रेस की आपत्ति के बाद आनन-फानन में बैठक ही खत्म कर दी गई। इससे शक की सुई वन विभाग पर अधिक घूम रही है।
कांग्रेस का आरोप- भाजपा को पहुंचा रहे फायदा
जिला कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत वागद्रे ने सांझवीर टाईम्स को बताया कि वन विभाग इस मामले में झूठ बोल रहा है। जब हमे जानकारी मिली तो सैकड़ों की संख्या में तेंदूपत्ता संग्राहक बैठक में मौजूद थे। यदि वन विभाग के पास बैठक के संबंध में कोई अनुमति थी तो दिखाई जा सकती थी, लेकिन उन्होंने कोई अनुमति नहीं दिखाई।
इससे साफ है कि बैठक नियमों को दरकिनार कर आयोजित की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को भाजपा के पक्ष में लुभाने के लिए यह बैठक रखी गई थी। कांग्रेस नेता समीर खान और धीरू शर्मा ने भी तेंदूपत्ता संग्राहकों की बैठक लेने को अनुचित बताते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

वन विभाग का तर्क गले नहीं उतरा रहा
इस मामले में चौकाने वाली बात तो यह है कि बैतूल के सीसीएफ पीएन मिश्रा पदभार करने के बाद मोबाइल पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे। इसके बाद दक्षिण वन मंडल के डीएफओ ने बताया कि यह बैठक भोपाल से मिले निर्देश पर आहूत की गई थी, चूंकि तेंदूपत्ता तुड़ाई शुरू होना है। मौसम के कारण पत्ता झड़ने से नुकसान हो रहा है, इसलिए भोपाल के अधिकारियों की उपस्थिति में बैठक में आहूत की गई थी।
बैठक में तेंदूपत्ता संग्राहकों की उपस्थिति के कांग्रेस के आरोप गलत है। केवल जिले भर के विभागीय अधिकारी और कर्मचारी बैठक में शामिल हुए। उन्होंने तो यह भी दावा किया इस तरह की बैठक के लिए निर्वाचन आयोग से किसी तरह की अनुमति लेना आवश्यक नहीं है, लेकिन जिम्मेदार तर्क दे रहे हैं कि इस तरह की बैठक आहूत करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को सूचना देकर अनुमति लेना अनिवार्य है।
इसके बाद वन विभाग के अधिकारी भी कटघरे में शामिल हो गए। इस संबंध में बैतूल कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को उनके मोबाइल नंबर 7692970993 पर काल किया, लेकिन रिसीव नहीं किया, जबकि सीसीएफ पीएन मिश्रा भी अपना मोबाइल 9424790300 पर कई बार काल करने के बाद भी मोबाइल रिसीव नहीं कर पाए।
इनका कहना….
सूचना मिली थी कि बिना अनुमति के वन विभाग के ट्रेनिंग सेंटर में तेंदूपत्ता संग्राहकों की बैठक रखी गई है। कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बैठक में आपित्त जताकर निर्वाचन आयोग की अनुमति मांगी तो नहीं दी गई और बैठक खत्म कर दी। इससे साफ जाहिर है कि यह बैठक बिना अनुमति के भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए ली गई थी। इस मामले में आब्जर्वर और कलेक्टर को फोन पर जानकारी देने का प्रयास किया, लेकिन दोनों ने फोन नहीं उठाया। अब लिखित में शिकायत की जाएगी।
हेमंत वागद्रे, अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी बैतूल
तेंदूपत्ता तुड़ाई के लिए भोपाल से आए अधिकारियों के साथ बैठक ली जा रही थी। इसके लिए कोई अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है। कांग्रेस पदाधिकारी बैठक को गलत समझ बैठे।
विजयानंतम टीआर, डीएफओ दक्षिण वन मंडल
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