Women’s Day Special Betul : अंतराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष: गांव की बेटी यूएन मिशन के लिए चयनित, दक्षिण अफ्रीका जाएंगी
Women's Day Special Betul: International Women's Day Special: Village daughter selected for UN mission, will go to South Africa

22 सदस्यीय महिला दल में एमपी से अकेली, वर्तमान में सेना में पदस्थ है…
Women’s Day Special Betul :(बैतूल)। नारी दिवस बस एक दिवस क्यों, नारी के नाम मनाना है, हर दिन -हर पल, नारी को उत्तम मानो, यह नया जमाना है…. यह पंक्तियां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बैतूल जिले की एक ऐसी महिला को समर्पित की जा सकती है जो पहले से ही बहादुर सैनिक बनकर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन कर रही है। किसान की यह बेटी सेना में जाकर यात्रा खत्म नहीं बल्कि ऊंची उड़ान अभी बाकी है। दरअसल यूएन मिशन 2024 के लिए इस महिला का भी चयन होना जिले के लिए एक बड़ी मिसाल कहा जा सकता है। मप्र से एकलौती महिला इस दल में शामिल होगी।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शुक्रवार पूरे देश-विदेश में मनाया जा रहा है। उपलब्धियां हासिल करने वाली महिलाओं का बखान हो रहा है, फिर हमारे जिले की बात न हो ऐसा संभव नहीं है। सांझवीर टाईम्स ने भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक ऐसी महिला की दास्तान सामने लाई है जो अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल बन सकती है। दरअसल आमला ब्लॉक केे नांदकुड़ी निवासी किसान की बेटी धर्मवती चौहान असम रायफल जैसे महत्वपूर्ण बल में पदस्थ है। इसके लिए उन्होंने गांव से लेकर शहर तक संघर्ष करने के बाद यह मुकाम पाया। एक छोटे से गांव से निकलकर असम रायफल में कई दिनों से सेवा दे रही धर्मवती पूरे गांव में अन्य लोगों के लिए प्रेरणा है।
इस सफलता से पूरा गांव को गर्व

असम रायफलस में पदस्थ बहादुर सैनिक धर्मवती का हाल ही में यूएन मिशन पर जाने वाले 22 सदस्यीय दल में चयन हुआ है। इसे संयोग ही कहे कि मप्र से यूएन मिशन पर जाने वाली वे एकमात्र सदस्य है। अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस पर इस महिला की बड़ी उपलब्धि से पूरे गांव को गर्व हो रहा है। महिला की मां अनिता बाई खाकरे ने बताया कि उनकी बेटी फिलहाल असम है, लेकिन वीडियो मैसेज के जरिए यह खुशखबरी देकर पूरे परिवार को गौरवांवित किया है। छोटे से गांव नांदकुड़ी में भी धर्मवती के यूएन जाने पर खुशी की लहर छाई हुई है। धर्मवती के पिता बिलवंत लाल खाकरे ने बताया कि उन्होंने कभी बेटा और बेटी में फर्क नहीं समझा। शुरू से ही उसकी इच्छा सेना में जाने की थी, कभी रास्ता नहीं रोका। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी धर्मवती के इस कदम से अन्य परिजन को भी सफलता की राह मिली है।
पति और भाई-बहन जिम्मेदार पद पर
यूएन जाने के लिए चयनित धर्मवती ने सेना ज्वाइन की तो उनके परिवार भी इसी राह पर चल बैठे। उसकी छोटी बहन भी भारतीय सेना में मणिपुर के अस्पताल में पदस्थ है तो एक अन्य छोटा भाई गुजरात के सूरत में मर्चेंट नेवी में पदस्थ है। इतना ही नहीं धर्मवती के पति खुद जयराम चौहान गुजरात में मर्चेंंट नेवी में पदस्थ है। पति-पत्नी सैकड़ों किमी दूर रहकर देश की सेवा में लगे हैं। इतना ही नहीं धर्मवती के बारे में एक और जानकारी का खुलासा हुआ है कि उसका डेढ़ वर्ष का पुत्र अभी नाना-नानी के पास नांदकुड़ी में है। देश की सेवा के लिए अपने मासूम पुत्र को उसने अपने मायके में छोड़ रखा है। यूएन जाने के लिए भी वह अपने मासूम पुत्र को साथ नहीं ले जाएगी। महिला दिवस पर ऐसी अन्य बेटियों के लिए धर्मवती मिसाल बन सकती है। उनके हौसले को देश सलाम करता है।





