Betul News: Video: पुलवामा अटैक और दिल्ली बम ब्लास्ट में टेरर फंडिंग बताकर डब्ल्यूसीएम कर्मचारी की तीन दिन तक रखा डिजीटल अरेस्ट

73 लाख की सायबर ठगी होने से बची, सायबर ठग अपने आप को बता रहे थे ईडी और सीबीआई अधिकारी
Betul News: बैतूल। जिले में डिजीटल अरेस्ट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। परिजनों की सजगता और पुलिस की तत्परता के कारण सायबर ठगी की बड़ी साजिश नाकाम हुई है। सायबर ठगों ने एक डब्ल्यूसीएल कर्मचारी को तीन दिन तक डिजीटल अरेस्ट रखा। सायबर ठगों ने पुलवामा अटैक और दिल्ली बम ब्लास्ट में टेरर फंडिंग का हवाला देकर डिजीटल अरेस्ट किया था।
मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम में पत्रकारवार्ता आयोजित की जिसमें पुलिस अधीक्षक विरेन्द्र जैन, एएसपी कमला जोशी, प्रमुख रूप से उपस्थित थे। एसपी ने डिजीटल अरेस्ट की घटना का खुलासा करते हुए बताया कि एक दिसम्बर को पुलिस को सूचना प्राप्त हुई थी कि चैतराम नरवरे (64) निवासी अशोका गार्डन भोपाल जो कि डब्ल्यूसीएल के कर्मचारी है। जिन्हें राजेश गेस्ट हॉऊस बगडोना, सारनी में कुछ सायबर ठगों द्वारा डिजीटल अरेस्ट कर धमकाया जा रहा है। ठग अपने आप को ईडी और सीबीआई के अधिकारी बताकर धन राशि की मांग कर रहे है।
सूचना मिलने पर पाथाखेड़ा चौकी प्रभारी मनोज उईके सहित पुलिस टीम राजेश गेस्ट हाऊस पहुंची और टीम ने पीड़ितों को रेस्ट हाऊस से बाहर निकालकर बातचीत की। पीड़ित बड़े सदमें में दिखाई दिए और अपने साथ हुई सारी घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी। ठग इतने सातिर थे कि पुलिस को भी दखल ना देने और नौकरी से बखास्त करने की धमकी दे रहे थे, लेकिन पुलिस ने भाप लिया था कि यह सायबर ठग है और यह बड़ी ठगी की घटना को अंजाम देने की फिराक में है। पुलिस की सर्तकर्ता से बड़ी सायबर ठगी की घटना टल गई।
तीन दिन तक रखा डिजीटल अरेस्ट
पुलिस के मुताबिक सायबर ठगों ने तीन दिन तक पीड़ित को डिजीटल अरेस्ट रखा। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसके पास 26 नवम्बर को मोबाईल पर फोन आया और ठग ने बताया कि वह सीबीआई और ईडी के अधिकारी बात कर रहे है, आपका खाता मुम्बई केनरा बैंक में है और आपके खाते में पुलवामा और दिल्ली बम ब्लास्ट को लेकर लाखों की टेरर फंडिंग हुई है। ठगों ने वीडियों कॉलिंग से एटीएम कार्ड भी दिखाया। जैसे ही ठगों का कॉल आया और उन्होंने टेरर फंडिंग की बात कही वैसे ही पीड़ित सदमें में आ गया। ठगों ने सभी खातों की जानकारी ली।
पीड़ित के सेविंग खाते में 2 लाख 50 हजार की राशि थी। इस पर सायबर ठगों की नजर थी। सायबर ठगों द्वारा पीड़ित को इतना डराया-धमकाया कि उनकी एफडी भी तुड़वाली गई और राशि सेविंग खाते में डलवाई गई। ठग रिटायर्ड डब्ल्यूसीएल कर्मचारी से 73 लाख की ठगी करने के फिराक में थे। पीड़ित के बेटे की सर्तकता के कारण सायबर ठगी की साजिश नाकाम हो गई।
3 दिनों तक लगातार वीडियों कॉल करते रहे
पीड़ित ने बताया कि ठगों ने उन्हें नया मोबाईल फोन खरीदने लगाया और तीन दिन तक वीडियों और ऑडियों कॉल के माध्यम से लगातार कांटेक्ट में रहे। ठगों ने पूरे परिवार को अरेस्ट करने की धमकी दी। पीड़ित का पाथाखेड़ा, सारनी एसबीआई में खाता था। ठगों ने एफडी तुड़वाकर लगभग राशि 70 लाख रूपए अपने सेविंग खाते में डालने को कहा। पीड़ित ने ठगों के कहने पर एफडी तोड़कर उसकी सारी राशि अपने सेविंग खाते में डाल दी। पीड़ित बैंक से आरटीजीएस फार्म तक लेकर चले गए थे। जरा भी देरी होती तो जायबर ठग 73 लाख की ठगी कर लेते।
बेटे की सर्तकता से बची ठगी
जानकारी के मुताबिक डिजीटल अरेस्ट की जानकारी अपने मौसी के बेटे बडोरा निवासी दीपेन्द्र मारवाड़ी को दी। दीपेन्द्र नागपुर में सॉफ्टेयर इंजीनियर है जो कि अपने घर छुट्टी पर आया था। दीपेन्द्र को जानकारी लगते ही वह शिकायत करने बैतूल बाजार थाने पहुंचा। पुलिस को बताया कि उसके मौसा जी चैतराम नरवरे के साथ सायबर ठगी करने के फिराक में है। मौसाजी फोन भी नहीं उठा रहे है। पुलिस ने जब मोबाईल लोकेशन प्राप्त की तो पीड़ित की लोकेशन पाथाखेड़ा राजेश रेस्ट हाऊस की मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ठगी को अंजाम देने से रोका गया।



