Betul Political News: प्रशासनिक कोना: आखिर क्यों गलती पर नजरें नहीं मिला पा रहे अधिकारी?? पुलिस विभाग में कौन जाएगा, किसकी हो रही आमद??? जूता चोर पर थानेदार साहब की कैसे हुई मेहरबानी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……
Betul Political News: Administrative corner: Why are officials unable to look at the mistake?? Who will go to the police department, who is coming in??? How did the police officer show favor to the shoe thief???? Read in detail our popular column in the administrative corner...

Betul Political News: बड़े साहब को आने को अभी चंद माह बीते हैं, लेकिन प्रशासन ने उनके तेवर की काफी चर्चा है। अमूनन वे हर सप्ताह होने वाली बैठक में लापरवाह अधिकारियों की क्लास लेने से नहीं चुकते हैं। अब तक ऐसी बैठकों में अध्ययन कर न जाने वाले अफसरों को भी अगले दिन होने वाली बैठक में तैयारी कर जाना पड़ रहा है। पिछली कुछ बैठकों में नजारा देखने को मिला है। बड़े साहब ने लापरवाहों को न सिर्फ आंखे दिखाई बल्कि ऐसे शब्दों में लताड़ भी लगाई जिसका प्रयोग आज तक किसी ने नहीं किया। साहब के शब्दबाण का ही असर है कि प्रशासन के इतिहास में हर सप्ताह होने वाली यह बैठक औपचारिक बनकर नहीं रहती है। साहब के कड़वी वाणी का ही असर है कि शहर से लेकर गांव तक जिम्मेदारों को अपनी अहमियत और औहदा पता चल गया है कि आम लोगों की समस्या के लिए क्या प्लान करना है। प्रशासनिक अमले में साहब के तीखे तेवर के अलावा शब्दबाण को लेकर खासी चर्चा चल रही है।
नए की आमद, पुरानों की रवानगी की तैयारी
पुलिस महकमे में लोकसभा की आचार संहिता के पहले कोई बड़ा तो नहीं, लेकिन छोटा परिवर्तन होना तय माना जा रहा है। चूंकि विधानसभा चुनाव के पहले तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं होने वालों को जिले में रहने का मौका मिल गया था। अब आयोग का डंडा चले, इसके पहले ही उप निरीक्षक, सहायक उपनिरीक्षक रेंक के अधिकारियों की जिले से रवानगी की सूची तैयार हो रही है। इसमें करीब आधा दर्जन नाम सामने आए हैं। इतना जरूर है कि 13 मार्च के आसपास आचार संहिता लगने से पहले जिले में कुछ पुराने थानेदारों को बड़े थानों में लाने के अलावा कुछ चहेते उपनिरीक्षकों की भी जिले में आमद की चर्चा है। यह सभी चर्चित नाम बताए जा रहे हैं।
जूते चोर पर थानेदार की मेहरबानी
बैतूल अनुविभाग के एक चर्चित थाने में चार दिन पहले एक जूते की दुकान पर चोरी की वारदात की खूब चर्चा हो रही है। चर्चा का कारण यह है कि खुद दुकान संचालक ने खुद चोर को आटो में जूते-चप्पलों की खेप ले जाते रंगे हाथ दबोच लिया। आटो समेत चोर को वह थाने तक लेकर गया, लेकिन थानेदार साहब ने कोई कार्रवाई के बिना चोर को अभयदान दे दिया। थानेदार साहब तर्क दे रहे हैं कि जूता चुराने वाला दुकान में काम करने वाला कर्मचारी था, इसलिए संचालक खुद कार्रवाई नहीं चाह रहा। साहब को कैसे समझाए कि यदि दुकान संचालक को कार्रवाई नहीं करना था तो वह आटो सहित चोर को थाने लेकर क्यों जाता? इसके बाद भी थानेदार मानने को तैयार नहीं। बताते चले कि साहब जिस थाने में पदस्थ है वह कुछ दिनों पहले पूरे प्रदेश में दो मामले को लेकर चर्चा में रह चुका है, इसमें कुछ की रवानगी भी हो चुकी है।





