Betul News: छात्रावास अधीक्षकों की नियुक्ति पर गरमाई राजनीति

रडार पर सत्तारूढ़ पार्टी के नेता, शिकायतों के बाद अधीक्षकों अभयदान
Betul News: बैतूल। जिले के छात्रावासों में अंधेर नगरी चौपट राजा की कहावत चरितार्थ होने के बाद राजनीति गरमा गई है। अधिकांश जगह क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि रडार पर आते जा रहे हैं। जिनके संरक्षण में लंबे समय से जमे छात्रावास अधीक्षकों को अभयदान मिलते आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि नियमों के विरूद्ध और लंबे समय से पदस्थ अधिकांश छात्रावास अधीक्षकों को राजनीति संरक्षण मिला हुआ है, इसलिए नेताओं की कथनी और करनी में भी अंतर साफ नजर आ रहा है। छात्रावासों में गंभीर घटनाएं होने के बाद भी संरक्षण देने वाले जनप्रतिनिधि इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। इसके दुष्परिणाम उन्हें भविष्य में भुगतना तय माना जा रहा है।
जिले के आदिवासी और अन्य अंचलों में स्थित छात्रावास अव्यवस्थाओं की चपेट मेें है। छात्र-छात्राओं की महज दो वक्त का भोजन ही गुणवत्ता युक्त नहीं मिल पा रहा है, फिर अन्य व्यवस्थाओं को लेकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। पिछले दिनों जब जिला मुख्यालय पर कन्या छात्रावास परिसर की छात्राओं ने इल्लीयुक्त भोजन मिलने का मामला उठाया तो अधीक्षिक पर निलंबन की गाज गिर गई। बताया जा रहा है कि यह अधीक्षिका भी लंबे समय से यहां पर जमी थी और इन्हेें भी तथाकथित राजनीति संरक्षण मिलते आ रहा था। मामले सामने आने के बाद कार्रवाई होना लाजमी है, लेकिन जिले के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, सहायक आयुक्त अपने जिले के दौरे पर छात्रावासों का निरीक्षण करने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी वजह अधीक्षकों को खेलने का मौका मिल रहा है और भारी बजट वाले छात्रावासों में अनियमित्ता के मामले सामने आ रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों पर उठ रही उंगलियां
पूरे मामले में सत्तारूढ़ पार्टी के ऐसे तथाकथित जनप्रतिनिधि रडार पर आ गए हैं जो सीधे तौर पर छात्रावास अधीक्षकों को अशीर्वाद दे चुके हैं। सांझवीर टाईम्स की पड़ताल में तथ्य सामने आए हैं कि जिले के अधिकांश छात्रावासों में पदस्थ अधीक्षक सत्तारूढ़ पार्टी के किस नेता के संरक्षण के कारण लंबे समय से जमे हैं। यदि हमारी पड़ताल सही है तो अधीक्षकों के नंबरों की जांच कर ली जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि सत्तारूढ़ पार्टी के किस जनप्रतिनिधि का संरक्षण मिलने के बाद अधीक्षक छात्रावासों में मनमानी कर रहे हैं।
चौकाने वाली बात तो यह है कि भैंसदेही के एक जनप्रतिनिधि तो ऐसे हैं जो अपने लंबे चौड़े क्षेत्र में फैले विस में छात्रावास अधीक्षकों को हटाने के लिए पत्र लिखते हैं और कुछ दिनों बाद उनकी पदस्थापना के लिए अधिकारियों से सिफारिश कर दे रहे हैं। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन जनप्रतिनिधियों की कथनी और करनी में अंतर है। ऐसा ही मामला घोड़ाडोंगरी में भी देखने को मिल रहा है। जहां पर छात्रावास अधीक्षक जनप्रतिनिधियों की देखरेख में खूब फल-फूल रहे हैं और आए दिनों विद्यार्थियों को अपनी सेहत के लिए खुद मोर्चा खोलना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय पर ऐसा कुछ मामला सामने नहीं आया, लेकिन जनप्रतिनिधियों के द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने के कारण यहां के अधिकांश छात्रावासों में स्थिति नियंत्रण के बाहर हो गई है।
इस मामले को देखकर अंदाजा लगाए अधिकार
वैसे तो कई मामले अधीक्षकों की लापरवाही की पोल खोलने के लिए काफी है, लेकिन सांझवीर टाईम्स एक मामला पाठकों के सामने रख रहा है। जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधीक्षकों को किनका संरक्षण मिल रहा है। पिछले दिनों कन्या आश्रम पाढर की अधीक्षका भावना मशराम और दो भृत्य बबली-सरिता की मनमानी से तंग आकर पालकों ने कलेक्टर को शिकायत की। कक्षा आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों के पालकों का कहना था कि उन्हें यहां छात्रावास अधीक्षिका और भृत्य उनसे अभद्र व्यवहार करते हैं। यहां के बच्चे इसलिए असुरक्षित है, क्योंकि यहां पर बाहरी लोगों का आना जाना लगा रहता है।
बच्चों ने खुद बताया कि अधीक्षिका पुरूषों से परिचय करवाती है। शराब की बोतल परिसर में आसानी से देखी जा सकती है। पालकों ने तो यहां तक गंभीर आरोप लगा दिए थे कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो उनके बच्चों को देह व्यापार में धकेला जा सकता है। इस गंभीर आरोप पर भी सितंबर माह में शिकायत के बाद भी न तो किसी जनप्रतिनिधि और न किसी अधिकारी ने संज्ञान लिया। आज भी अधीक्षिका और भृत्य अपनी मनमानी कर रही है और छात्राएं परेशान हैं। इस संबंध में अवकाश पर होने के कारण सहायक आयुक्त विवेक पांडे से चर्चा नहीं हो सकी।




