Today Betul News: निकायों में वेतन के लाले पड़े! सरकार ने करों की राशि में कटौती की, लाखों की कर्जदार बने जिले के नगर निकाय
Today Betul News: Salary issues in civic bodies! Government cut the amount of taxes, municipal bodies of the district became debtors of lakhs

Today Betul News:(बैतूल)। आमदनी चवन्नी, खर्च रुपया वाली कहावत इन दिनों जिले की अधिकांश नगर पालिकाओं और नगर परिषद में देखने को मिल रही है। वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है, लेकिन कर्मचारियों को कई जगह बमुश्किल वेतन मिल पा रहा है। कुछ निकाय ऐसी है, जहां 2-3 माह से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। राजस्व वसूली के बाद बमुश्किल वेतन दिया जा सका है। यह सब नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा करों में कटौती के कारण हो रहा है।
सूत्र बताते हैं कि जिले की दस निकायों में पिछले कई माह से वित्तीय संकट गहराया हुआ है। वैसे यह स्थिति लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन सरकार का मुखिया बदलने के बाद उतार-चढ़ाव की स्थिति निर्मित हो रही है। दरअसल पूर्व सरकार ने लाड़ली बहना को हर माह पहले एक हजार और फिर 1250 रुपए की राशि देने का ऐलान किया था। अप्रैल माह से पूरे प्रदेश की लाड़ली बहनाओं को हर माह 1250 रुपए की राशि दिए जाने के कारण अन्य विभागों के बजट में सरकार ने बड़ी कटौती कर दी है। इसका सीधा खामियाजा व्यवस्था लड़खड़ाने के रूप में सामने आया है। कहीं दूर नहीं जाने के बजाए लाड़ली बहना योजना संचालित करने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग की वित्तीय हालात किसी से छिपी नहीं है। यहां बमुश्किल नाममात्र के बजट पर व्यवस्थाएं संचालित की जा रही है। ऐसे में फिर शहर सरकार यानी नगरीय निकाय कहलाए जाने वाला बड़ा बजट वाला विभाग की क्या हालत होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
पहले चूंगी कर, बाद में राशि में भी कटौती
सूत्र बताते हैं कि नगरपालिका और नगर परिषद को राज्य शासन से पूर्व में चूंगी कर के रूप में बड़ा बजट हर माह मिल जाया करता था। इस बजट से सभी निकाय अपने महकमे को वेतन वितरण करते आया है, लेकिन कुछ माह से ऐसी स्थिति हो गई है कि नगर पालिकाओं की चूंगी कर की राशि महज 1 करोड़ 10 लाख रुपए कर दी गई, जबकि नगर परिषद को दी जाने वाली राशि भी आधी कर दी गई। ऊपर से लाड़ली बहना योजना चालू होने के बाद अप्रैल से चूंगी कर की दी जाने वाली 1 करोड़ 10 लाख की राशि में से भी 30 से 40 लाख रुपए काटे जा रहे हैं। यही वजह है कि पिछले दस माह से चूंगी कर की बड़ी रकम हाथ से निकल जाने के कारण बैतूल जिले की बैतूल समेत आमला, मुलताई नगरपालिका और भैंसदेही, बैतूलबाजार, घोड़ाडोंगरी, शाहपुर, आठनेर, चिचोली निकायों की स्थिति गड़बड़ा गई है। केवल सारणी नगरपालिका की स्थिति थोड़ी ठीक कही जा सकती है, लेकिन प्रदेश की तीसरी बड़ी नगरपालिका के हिसाब से व्यवस्थाएं संचालित नहीं हो पा रही है।
इन निकायों में हालात सबसे अधिक बिगड़े
जिले की अधिकांश नगर परिषदों में कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े हुए हैं। आठनेर, चिचोली, शाहपुर में बमुश्किल वेतन दिया जा रहा है। दूसरी तरफ बैतूलबाजार, घोड़ाडोंगरी और भैंसदेही में भी आमदनी अठ्ठनी खर्च रुपया जैसे हालात निर्मित हो गए हैं। यहां पर निर्माण कार्य भी बजट के अभाव में ठप पड़े हैं। बमुश्किल कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। मुलताई नगर पालिका में तो वेतन न मिलने के बाद दैवेभो कर्मचारी हड़ताल कर चुके हैं। यहां पर कर्मचारियों को भी 2-3 माह बाद पिछले माह बमुश्किल वेतन मिल पाया है। आमला में भी स्थिति नियंत्रण के बाहर होने की जानकारी सामने आ रही है। जिला मुख्यालय की नगरपालिका में भी बुश्किल इसकी टोपी उसके सर जैसे हालात निर्मित हो गए हैं।
इनका कहना….
जिले के अधिकांश निकायों की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। व्यवस्था बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
ओमपाल सिंह भदौरिया, परियोजना प्रशासक शहरी आवास बैतूल।





