Betul Election : महिला मतदाताओं के मत प्रतिशत में मामूली उछाल
Betul Election: Slight jump in vote percentage of women voters

कांग्रेस और भाजपा के अलग-अलग तर्क, सबको परिणाम का इंतजार
Betul Election : (बैतूल)। गत चुनाव की अपेक्षा इस बार जिले में महिला मतदाताओं के मतदान का प्रतिशत बढ़ा है। हालांकि यह प्रतिशत निर्णायक नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि वर्ष 2018 की अपेक्षा जिले की पांच विधानसभाओं में महिला मतदाताओं के मतदान की संख्या करीब 54 हजार अधिक बढ़ी है। बढ़े हुए मतदाताओं की संख्या किस पार्टी की ओर रूख करेगी, यह कह पाना भी जल्दबाजी होगी। फिलहाल दोनों ही पार्टी महिला मतदाताओं के मतदान में मामूली इजाफा होने पर खुश नजर आ रही है। कांग्रेस और भाजपा का तर्क अलग-अलग दिखाई दे रहा है, लेकिन परिणाम के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि इस बार महिला मतदाताओं ने किस ओर रूख किया है।
आधी आबादी के मतों के प्रतिशत पर हर बार सभी की नजर टिकी रहती है। इस मर्तबा महिला वर्ग का मतदान प्रतिशत भले ही मामूली बढ़ा हो, लेकिन यह निर्णायक साबित हो सकता है। जानकार सूत्र बताते हैं कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने लाड़ली बहना योजना 6 माह पहले लागू की थी, तब से महिलाओं को हर माह पहले 1 हजार और अब 1250 रुपए दिए जा रहे हैं। भाजपा के इस मास्टर स्ट्रोक की न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश में भी सराहना हो रही है। भले ही कांग्रेस ने बाद में नारी सम्मान योजना लाकर भाजपा को जवाब देने का प्रयास किया है, लेकिन इसके सकारात्मक और वास्तविक परिणाम क्या रहेंगे, यह चुनाव के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। कांग्रेस ने चुनावी साल में महिलाओं को रिझाने के लिए नारी सम्मान योजना में 1500 प्रतिमाह देने का ऐलान किया था।
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भाजपा-कांग्रेस दोनों का आश
महिलाओं के बंपर मतदान से भाजपा और कांग्रेस में अलग-अलग स्थिति देखने को मिल रही है। दबी जुबान में भाजपा ने तक इसे लाड़ली बहना योजना का लाभ बता रहे हैं। हालांकि लाड़ली बहना की बात करें तो पूरे जिले में इनका आंकड़ा लगभग ढाई लाख से अधिक बताया जा रहा है। अगर ऐसा रहता तो मतदान का प्रतिशत और अधिक बंपर हो सकता था, लेकिन महज 54 हजार से अधिक महिला मतदाताओं ने 2018 के चुनाव की अपेक्षा अधिक मतदान किया है। यह स्थिति पांचों विधानसभा की है, इसलिए स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। दूसरी ओर कांग्रेसी दावा कर रहे हैं कि लाड़ली लक्ष्मी योजना को महिलाओं ने नकार दिया है। कांग्रेस की नारी सम्मान योजना महिलाओं को पसंद आ रही है। दोनों ही पार्टी के तर्क-वितर्क देकर यह कह पाना मुश्किल लग रहा है कि ऊंट किसके करवट बैठेंगा।
प्रत्याशी के आधार पर वोट देने की अधिक संभावना (Betul Election)
जानकार सूत्र बताते हैं कि इस चुनाव में योजनाओं के नाम महिलाओं ने अधिक रूझान नहीं दिखाया। इसकी अपेक्षा प्रत्याशी और उनकी कार्यशैली को आधार बनाकर अधिक वोट कर सकते हैं। लिहाजा चेहरे को देखकर ही महिला मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। इनमें पहली बार वोट डालने वाली महिला मतदाताओं पर भी पार्टियों की नजर टिकी है। युवा मतदाताओं के वोट बैंक में किस पार्टी ने सेंध लगाई है। यह भी अभी कह पाना जल्दबाजी होगा।
बीते चुनावों के महिला मतदाताओं के मत प्रतिशत पर एक नजर
वर्ष महिला मतदाता पुरूष मतदाता योग्य




