Prashasanik Kona : प्रशासनिक कोना: पुलिसकर्मी की लग्जरी वाहन खरीदी का आखिर क्या है सच?? पानी वाले साहब का यह कैसा रट्टू तोता जवाब??? राजस्व के अधिकारियों में सामंजस्य बनाने के सारे प्रयास क्यों हो रहे विफल???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

Prashasanik Kona: Administrative corner: What is the truth behind the purchase of a luxury vehicle by a policeman??

कालेज घोटाला पुलिसकर्मी को ऐसे फला

जिले के एक चर्चित कालेज में लाखों रुपए के घोटाले के आरोपी अब तक सलाख के पीछे नहीं आए हैं। उन्हें पुलिस ने ऐसा कौन सा फ्रीहैंड दिया है कि वे खुले घूम रहे हैं। चर्चा जोरो पर है इस बीच संबंधित थाना पुलिस के एक चर्चित पुलिसकर्मी की नई लग्जरी वाहन आने से संभावनाओं को और बल मिल गया है कि कहीं कालेज कनेक्शन वालों ने चर्चित पुलिसकर्मी को यह वाहन गिफ्ट तो नहीं किया?

विभाग में भी खासी चर्चा है कि 20 लाख की लागत वाली इस लग्जरी वाहन के पीछे पुलिसकर्मी के पास आय का क्या स्त्रोत है? जिस पुलिसकर्मी ने यह वाहन लाया है, वह थानेदार साहब का भी खास होने के साथ कई अपराधियों से भी सीधे संपर्क में रहता है। इसी वजह उसे थाने का सबसे एक्टिवकर्मी बताया जाता है। बहती गंगा में हाथ धोकर पुलिसकर्मी ने लग्जरी वाहन तो ला लिया, लेकिन अब थानेदार समेत अन्य अधिकारियों के समझ में यह माजरा नहीं आ रहा है कि भारी भरकम राशि कहां से आई? दबी जुबान से यह खबर अब कप्तान साहब तक भी पहुंचने की खबर है।

पानी वाले साहब का रट्टू तोता जवाब

पानी वाले विभाग के एक चर्चित साहब इन दिनों मीडिया से खासी परहेज कर रहे हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि शासकीय तौर पर जानकारी देने के लिए सरकार ने एक अलग विभाग बनाकर अधिकारी की नियुक्ति की है और यही प्रेसनोट भी बंटवाते हैं। उनके विभाग के अंतर्गत आने वाली पानी से जुड़ी योजनाएं बंद होने के बाद चर्चा करने पर मीडियाकर्मियों को रट्टू तोता वाला जवाब दिया जा रहा है कि विज्ञप्ति जारी करने वाले साहब से बात कर लें।

हकीकत यह है कि खबर जारी करने वाले साहब को उनके विभाग की योजना की एक प्रतिशत भी जानकारी नहीं है। वे भी कह रहे हैं कि तकनीकी बातें मैं कैसे बता सकता हूं। ऐसे में पानी वाले साहब का तर्क झूठा साबित हो रहा है। कहा जा रहा है कि वे जहां पर भी पदस्थ रहे इस तरह की बातें विज्ञप्ति जारी करने वाले साहब के लिए कहते आए हैं। कुल मिलाकर वे अपनी विभाग की नाकामी दूसरे पर डालकर पल्ला झाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। यह वही साहब जिन्हें प्रभारी मंत्री ने कुछ दिनों पहले सर्कि ट हाउस में भोपाल जाने का आग्रह करने पर जमकर फटकारा।

सामंजस्य बनाने के प्रयास नाकाम

जिले के राजस्व अमले में दो अधिकारियों के बीच 36 का आंकड़ा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि दोनों अधिकारियों की वर्किंग ठीक कही जा रही है, लेकिन कहीं न कहीं कामों में सामंजस्य स्थापित नहीं होने के कारण मीन-मेख निकालने से आए दिनों दोनों में खटास निर्मित हो रही है। हालत यह है कि दोनों के बीच मन मुटाव का फायदा निचले कर्मचारी उठाकर खासे फीलगुड महसूस कर रहे हैं। राजस्व के फील्ट में तैनात कुछ कर्मचारी तो अधिकारियों में सामंजस्य न होने पर कई मामले खुद ही रफा-दफा कर दे रहे हैं। इसे बड़े साहब तक भी शिकायतें हो रही हैं। इसके बाद दोनों अधिकारियों को एक दूसरे से सवाल-जवाब कर मामले को निपटाना पड़ रहा है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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