Betul Samachar: बैतूल की रेल सुविधाओं पर ब्रेक, सांसद की पैरवी बेअसर!

न ट्रेनों के स्टॉपेज मिले, न स्टेशन का काम दौड़ा; जनता पूछ रही- आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?
Betul Samachar: बैतूल। रेल सुविधाओं के मामले में बैतूल की स्थिति लगातार सवालों के घेरे में है। वर्षों से विभिन्न ट्रेनों के स्टॉपेज की मांग उठ रही है, लेकिन अब तक बैतूल को एक भी नया ट्रेन स्टॉपेज नहीं मिल पाया है। दूसरी ओर अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बैतूल रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। ऐसे में अब सवाल सांसद की सक्रियता को लेकर उठने लगे हैं।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सांसद दुर्गादास उइके केंद्र में मंत्री होने के बावजूद बैतूल की रेल सुविधाओं से जुड़े मामलों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दिला पा रहे हैं। वर्षों से यात्री ट्रेनों के स्टॉपेज की मांग कर रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों द्वारा रेल मंत्रालय तक मांग पहुंचाई गई, लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
दूसरे सांसद सक्रिय, वहां लगातार मिल रही सुविधाएं
रेल सुविधाओं के मामले में प्रदेश के दूसरे संसदीय क्षेत्रों में सांसदों की सक्रियता के परिणाम सामने आ रहे हैं। हाल ही में खंडवा सांसद की मांग पर रेल मंत्री द्वारा ट्रेन के स्टॉपेज को मंजूरी दी गई। इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि जब दूसरे क्षेत्रों के सांसद अपने क्षेत्र के लिए रेल मंत्रालय से फैसले कराने में सफल हो रहे हैं, तो बैतूल में वर्षों पुरानी मांग अब तक क्यों अटकी हुई है।
बैतूल में स्थिति यह है कि नई ट्रेनों के स्टॉपेज तो दूर, लंबे समय से जिन ट्रेनों के ठहराव की मांग की जा रही है, उनमें से किसी को भी अब तक मंजूरी नहीं मिली है। यात्रियों का कहना है कि बैतूल जिले से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा, इलाज और व्यापार के लिए दूसरे शहरों में आवागमन करते हैं। ऐसे में प्रमुख ट्रेनों के स्टॉपेज जिले की जरूरत है, महज सुविधा नहीं।
अमृत भारत स्टेशन का काम भी धीमी रफ्तार से
रेल सुविधाओं का दूसरा बड़ा मुद्दा बैतूल रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बैतूल के साथ घोड़ाडोंगरी, आमला और मुलताई रेलवे स्टेशनों पर भी काम चल रहा है। लेकिन बैतूल स्टेशन पर निर्माण कार्य की रफ्तार को लेकर यात्रियों में असंतोष है।
बताया जा रहा है कि बैतूल स्टेशन का काम अभी करीब 50 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। खास बात यह है कि बैतूल के साथ ही जिन्नारदेव और छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशनों पर भी काम शुरू हुआ था। वहां निर्माण कार्य पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पण किया जा चुका है, जबकि बैतूल स्टेशन अब भी निर्माणाधीन है।
निरीक्षण तक सीमित नहीं, निगरानी भी जरूरी
केन्द्रीय निधि से होने वाले बड़े निर्माण कार्यों की प्रगति पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निगरानी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन बैतूल रेलवे स्टेशन पर चल रहे काम का सांसद द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि निर्माण कार्य की लगातार समीक्षा होती और रेलवे अधिकारियों के साथ समय-समय पर बैठक कर अड़चनों को दूर कराने का प्रयास किया जाता तो काम की गति बेहतर हो सकती थी।
मंत्री पद के बावजूद बैतूल क्यों पीछे?
सांसद दुर्गादास उइके के केंद्र सरकार में राज्य मंत्री होने के बावजूद बैतूल की रेल सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिखना अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। जनता का सवाल सीधा है-जब केंद्र में प्रतिनिधित्व और जिम्मेदारी दोनों हैं, तो फिर बैतूल की रेल सुविधाओं से जुड़े कामों के लिए लगातार इंतजार क्यों?
ट्रेन स्टॉपेज की पुरानी मांग हो या अमृत भारत स्टेशन का धीमा निर्माण, दोनों ही मामलों में अब जनता जवाब चाहती है। लोगों का कहना है कि केवल मांग उठाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रेल मंत्रालय और रेलवे अधिकारियों के स्तर पर लगातार पैरवी कर उसका परिणाम जमीन पर दिखाई देना चाहिए। यही वजह है कि बैतूल की रेल सुविधाओं को लेकर अब लोगों की नाराजगी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है।




