Betul Ki Khabar: रजिस्ट्री से पहले ‘कैश कलेक्शनÓ का खेल, प्रति दस्तावेज 5 से 8 हजार की कथित वसूली!

सर्विस प्रोवाइडरों पर अतिरिक्त राशि वसूलने के आरोप
Betul Ki Khabar: बैतूल। जिले के रजिस्ट्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की परतें धीरे-धीरे सामने आती दिखाई दे रही हैं। सांझवीर टाईम्स द्वारा प्रकाशित खबर के बाद कई नए दावे और जानकारियां सामने आई हैं। खुद रजिस्ट्री करवाने वालो तक का दावा है कि स्टाम्प ड्यूटी के अलावा अतिरिक्त रकम देना ही पड़ता है।
यह जानकारी नाम न प्रकाशित करने पर रजिस्ट्री कराने वाले कई लोगों ने सांझवीर को बताई है। सूत्रों के अनुसार भूमि की खरीद-फरोख्त के दौरान निर्धारित स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क के अलावा प्रति रजिस्ट्री 5 से 8 हजार तक की अतिरिक्त नकद राशि वसूले जाने का आरोप है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन अधिकारियों ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया है। उनका कहना है कि , यदि इस मामले में कोई शिकायत करे तो जांच करवाकर इस तरह के सर्विस प्रोवाइडर को तत्काल हटा दिया जाएगा।
सूत्रों का दावा है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े अधिकृत सर्विस प्रोवाइडर दस्तावेज तैयार करने से लेकर पूरी प्रक्रिया संचालित करते हैं। आरोप है कि स्टाम्प ड्यूटी जमा होने के बाद भी खरीदार और विक्रेता से अतिरिक्त नकद राशि ली जाती है। बताया जाता है कि इस रकम को कथित तौर पर कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सुविधा शुल्क बताकर वसूला जाता है, ताकि रजिस्ट्री बिना किसी व्यवधान के शीघ्र पूरी हो सके।
‘फिक्स हिस्सेदारीÓ का दावा
रजिस्ट्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कथित अवैध वसूली का पूरा सिस्टम बेहद व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाता है। दावा है कि कार्यालय परिसर के बाहर ही लेन-देन पूरा कर लिया जाता है, जिससे प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आ पाते। सूत्रों के अनुसार दिनभर में हुई रजिस्ट्रियों के आधार पर तय हिस्सेदारी अलग-अलग लिफाफों में संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाती है।
कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका पर भी चर्चा
सूत्रों का यह भी दावा है कि कथित हिसाब-किताब के संचालन में एक कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका काफी अहम है, जो प्रतिदिन रजिस्ट्रियों की संख्या के अनुसार बंटवारे का रिकॉर्ड तैयार करता है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज या प्रत्यक्ष साक्ष्य सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
कौन करेगा शिकायत? भ्रष्टाचार का कवच बना
लगातार सामने आ रहे इन आरोपों के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा, बल्कि आम नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने का मामला भी साबित होगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस मामले को शिकायतों को आधार बनाकर अपना बचाव करने तक का सिस्टम मजबूत है। क्रेता विक्रेता झंझट में ना पढ़ें इसके लिए ही वह सर्विस प्रोवाइडरों की मदद लेने पर मजबूर है और यही वजह है कि आम नागरिकों की इसी दुखती रग का सीधा फायदा उठाया जा रहा है।
इनका कहना…..
यदि कोई शिकायत करे तो इस मामले की जांच करवा ली जाएगी, जो भी सर्विस प्रोवाइडर दोषी पाया जाएगा उसे तत्काल हटा दिया जाएगा।
दिनेश कौसले, पंजीयक कार्यालय रजिस्ट्री बैतूल
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